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संपादकीय: संक्रमण का चक्र

पूरी दुनिया के सामने अभी सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि आखिर कोरोना से निपटा कैसे जाए। अमेरिका सहित कई देशों ने अपने यहां दवाएं बनाने का दावा तो किया है, लेकिन ये सब परीक्षण के दौर में ही हैं। डब्ल्यूएचओ ने भी अगले साल के मध्य तक इसका टीका आने की बात कही है। कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को ऐसे संकट में भी डाल दिया है जिसके गंभीर सामाजिक और आर्थिक परिणाम जल्दी ही देखने को मिलेंगे। कई देशों की अर्थव्यवस्था तो एकदम चौपट हो चुकी है।

Author Published on: June 30, 2020 1:50 AM
coronavirus disease , covid19कोरोना के चलते दुनियाभर में 5 लाख से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। (रायटर्स इमेज)

दुनिया में कोरोना संक्रमितों की तादाद एक करोड़ से ऊपर निकल चुकी है और पांच लाख से ज्यादा लोग इस महामारी से मारे जा चुके हैं। इनमें से एक चौथाई मौतें अकेले अमेरिका में हुई हैं। जाहिर है, कोरोना का कहर अभी थमा नहीं है। ज्यादा चिंता की बात तो यह है कि महामारी विशेषज्ञ इसके दूसरे दौर की भविष्यवाणी रहे हैं। जो हालात हैं, उनसे तो लग रहा है कि इस महामारी से जल्द मुक्ति मिलने के आसार नहीं हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक रविवार को दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के एक दिन में एक लाख नवासी हजार मामले सामने आए, जबकि इससे पिछले रविवार को यह आंकड़ा एक लाख तिरासी हजार का था। आंकड़ों का बढ़ना इस बात का प्रमाण है कि दुनियाभर में कोरोना संक्रमण का फैलना जारी है।

अभी सबसे ज्यादा हालत ब्राजील की खराब है, जहां एक दिन में करीब सैंतालीस हजार मामले आए। दक्षिण अफ्रीका में हालात बिगड़ रहे हैं। हालांकि यूरोपीय देशों के लिए राहत की बात यह है कि वहां संक्रमण फैलने की रफ्तार अब काफी कम पड़ चुकी है और जो दिन इटली, स्पेन, फ्रांस, जर्मनी जैसे देशों को मार्च-अप्रैल में देखने पड़े थे, उससे तो अब एक हद तक छुटकारा मिला है, लेकिन अभी पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि ये देश कोरोना से मुक्त हो चुके हैं।

कोरोना संक्रमण के प्रसार की गति को धीमी करने के लिए दुनियाभर में पहले और एकमात्र उपाय के तौर पर पूर्णबंदी का कदम उठाया गया। लेकिन जो हकीकत अब देखने को मिल रही है, उससे तो लग रहा है कि पूर्णबंदी जैसा उपाय भी कोरोना की रफ्तार कम कर पाने में उम्मीद के मुताबिक ज्यादा कामयाब नहीं हुआ। इसकी एक वजह इसे लागू करने के समय और तरीकों और नागरिकों की भूमिका भी रही है। अमेरिका इसका उदाहरण है, जहां पूर्णबंदी को लेकर राष्ट्रपति और राज्यों के बीच विवाद बना रहा।

दक्षिण अफ्रीका में पूरे दो महीने तक बंद रखा गया, लेकिन आर्थिक मजबूरियों के कारण अब पूर्णबंदी हटा दी गई और अब वहां हालात बेकाबू हो रहे हैं। इसी तरह एशियाई देशों में रोजाना हजारों नए मामले सामने आ रहे हैं। नेपाल में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सिंगापुर और इंडोनेशिया में संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। चीन में दोबारा से कई शहरों में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं। जहां तक बात अमेरिका की है, तो वहां एक दिन में चवालीस हजार मामले सामने आए हैं। भारत में यह आंकड़ा बीस हजार को पार कर चुका है।

पूरी दुनिया के सामने अभी सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि आखिर कोरोना से निपटा कैसे जाए। अमेरिका सहित कई देशों ने अपने यहां दवाएं बनाने का दावा तो किया है, लेकिन ये सब परीक्षण के दौर में ही हैं। डब्ल्यूएचओ ने भी अगले साल के मध्य तक इसका टीका आने की बात कही है। कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को ऐसे संकट में भी डाल दिया है जिसके गंभीर सामाजिक और आर्थिक परिणाम जल्दी ही देखने को मिलेंगे। कई देशों की अर्थव्यवस्था तो एकदम चौपट हो चुकी है।

करोड़ों लोग अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं से घिरने लगे हैं। यह संकट दुनिया की सभी सरकारों के सामने है। कोरोना महामारी से यह तो साफ हो गया है कि दुनिया में ऐसी आपदा अब बार-बार दस्तक दे सकती है। इसलिए यह वक्त कोरोना से लड़ने के साथ ही ऐसी रणनीतियां बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने का भी है जिससे हम ऐसे मुश्किलों का सामना आसानी से कर सकें।

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