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संपादकीय: नया फैलाव

गनीमत है कि इसके लक्षण भी वही हैं, जो कोविड के हैं। इसलिए इस पर काबू पाना चिकित्सा विज्ञानियों के लिए मुश्किल काम नहीं है। वे बार-बार आश्वस्त भी कर रहे हैं कि इस नए खतरे से परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।

दुनिया के कुछ देशों में कोरोना के नए रूप के आने से चिंता बढ़ गई है।

ब्रिटेन के अलावा दक्षिण अफ्रीका आदि में कोविड-19 का नया प्रकार पाए जाने से स्वाभाविक ही दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना विषाणु अपना रूप बदल रहा है। समय-समय पर स्थितियों के मुताबिक विषाणु अपना स्वरूप बदलते रहते हैं, इसलिए यह आश्चर्यजनक बात नहीं है। पर चिंता की बात इसलिए है कि कोविड का यह नया रूप सत्तर फीसद अधिक तेज गति से फैल रहा है।

पूर्णबंदी हटने के बाद हवाई सेवाएं और सड़क परिवहन सुविधाएं खोल दी गई हैं। एक से दूसरे देशों में लोगों की आवाजाही होने लगी है। ऐसे में इस विषाणु का नया रूप कहां-कहां पहुंच गया होगा, अभी अंदाजा नहीं लगाया जा सका है। ब्रिटेन में इसका पता सितंबर में ही चल गया था। दक्षिण अफ्रीका में यह विषाणु वहीं से पहुंचा बताया जा रहा है। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका में पाया गया स्वरूप ब्रिटेन के विषाणु से भिन्न है।

अभी तक इसके खतरे का अंदाजा भी ठीक-ठीक नहीं लगाया जा सका है, पर गनीमत है कि इसके लक्षण भी वही हैं, जो कोविड के हैं। इसलिए इस पर काबू पाना चिकित्सा विज्ञानियों के लिए मुश्किल काम नहीं है। वे बार-बार आश्वस्त भी कर रहे हैं कि इस नए खतरे से परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।

दरअसल, कोरोना के पिछले अनुभवों को देखते हुए लोगों में एक प्रकार का भय बना हुआ है, इसलिए इससे संबंधित कोई भी बदलाव उनमें स्वाभाविक रूप से भय को बढ़ा देता है। अभी कई देश कोरोना संकट से बाहर नहीं निकल पाए हैं। अमेरिका में स्थिति संभाली नहीं जा सकी है। हालांकि अब कई देशों ने इसके टीके बना लिए हैं और वहां टीकाकरण की प्रक्रिया जारी है।

इससे विश्वास पैदा हुआ है कि जल्दी ही लोगों में प्रतिरोधक क्षमता के विकास में कामयाबी हासिल कर ली जाएगी। मगर चूंकि ये टीके अभी आम आदमी की क्षमता से बाहर हैं और ज्यादातर देश टीका विकसित नहीं कर पाए हैं, वे दूसरे देशों की कंपनियों पर निर्भर हैं, इसलिए इस विषाणु से पूरी तरह मुक्ति कब तक मिल पाएगी, दावा नहीं किया जा सकता। भारत का स्वास्थ्य विभाग इस विषाणु के नए रूप को लेकर पहले से सतर्क है।

इस पर लगातार नजर रखी जा रही है। ब्रिटेन आदि देशों से भारत आए और उनमें संक्रमित पाए गए लोगों पर कड़ी नजर रखी गई है। फिलहाल इस विषाणु से प्रभावित जगहों पर आवाजाही बंद कर दी गई है। इससे काफी आश्वस्ति मिलती है।

मगर अब भी सावधानी, सतर्कता और तत्परता ही सबसे बड़ा उपाय है, इसके फैलाव को रोकने का। बंदी खुलने के बाद कई शहरों में कड़े प्रतिबंध के बावजूद जिस तरह लोग मानमानी करते पाए जा रहे हैं, जरूरी सावधानी की परवाह भी नहीं करते, वह ज्यादा चिंता की बात है। इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि किसी संक्रमित व्यक्ति की जब तक पहचान होती है, तब तक वह अपने संपर्क में आने वाले कम से कम बीस और लोगों को संक्रमित कर चुका होता है।

इस तरह जो शृंखला बनती है, उसे तोड़ पाना खासा कठिन काम हो जाता है। इसलिए बेशक अपने यहां अब कोरोना का असर उतार पर नजर आ रहा है, इसका टीका भी जल्दी ही उपलब्ध हो सकेगा, पर इतने भर से शिथिल नहीं हो जाना चाहिए। सरकारों को बाहर से आए लोगों के संपर्क में आने वालों की भी पहचान, परीक्षण और उन पर निगरानी बनाए रखनी चाहिए।

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