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नफरत की जड़ें

जनसत्ता 18 सितंबर, 2014: सांप्रदायिक ताकतें छोटी-छोटी घटनाओं को हिंसा और सांप्रदायिकता का रंग देने से बाज नहीं आ रही हैं। इस प्रकार की घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देकर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जैसे पारंपरिक रूप से शांति रहने वाले और सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश करने वाले क्षेत्र को वैमनस्य की आग में झोंक […]

Author September 29, 2014 12:01 PM

जनसत्ता 18 सितंबर, 2014: सांप्रदायिक ताकतें छोटी-छोटी घटनाओं को हिंसा और सांप्रदायिकता का रंग देने से बाज नहीं आ रही हैं। इस प्रकार की घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देकर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जैसे पारंपरिक रूप से शांति रहने वाले और सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश करने वाले क्षेत्र को वैमनस्य की आग में झोंक दिया गया। पिछले लोकसभा चुनावों में इसी सांप्रदायिक तनाव का लाभ उठाकर चुनाव में भारी सफलता हासिल की गई। पिछले दिनों झारखंड की राजधानी रांची में तारा शाहदेव नामक एक खिलाड़ी द्वारा पुलिस को लिखाई गई एक रिपोर्ट पर सीधी कार्रवाई करते हुए झारखंड में भी सांप्रदायिक तनाव फैलाने की पूरी कोशिश की गई।

इन्हीं सांप्रदायिक शक्तियों की ओर से केरल की कई घटनाओं का हवाला देते हुए तरह-तरह का दुष्प्रचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि मिशन लव जेहाद के के जरिए केरल में हजारों लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराया जा चुका है। जबकि केरल में ही सीआइडी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लव जेहाद नाम का न तो कोई मिशन है न ही इस प्रकार की योजना किसी धर्म विशेष द्वारा चलाई जा रही है। दुष्प्रचार करने वाली शक्तियों द्वारा केरल के हवाले से ही यह बताया जा रहा था कि राज्य में तीन हजार से अधिक लड़कियों का मुसलिम लव जेहादियों द्वारा धर्म परिवर्तन कराया गया और ये सभी लड़कियां अपने-अपने घरों से लापता हो चुकी हैं। पर जब इस अफवाह की पड़ताल की गई तो पता चला कि अपने घरों से लापता होने वाली इन लड़कियों की संख्या तीन हजार नहीं बल्कि तीन सौ से भी कम है। इनमें से भी कम से कम 250 लड़कियां प्रेम प्रसंग के चलते हिंदू युवकों के साथ ही अपने घरों से भागी हैं। पर दहशत और नफरत का वातावरण पैदा करने के लिए बिना तथ्यों की गहराई में गए हुए सीधा इल्जाम मुसलिम युवकों पर सिर्फ इसलिए मढ़ दिया गया कि समाज में सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण किया जा सके और उसका लाभ सत्ता के सौदागरों को चुनाव में मिल सके।

निश्चित रूप से देश इस समय बहुत नाजुक दौर से गुजर रहा है। पिछले दरवाजे से सांप्रदायिकता का अपना मिशन चलाने वाली ताकतें अब सत्ता पर काबिज होते ही अपने एजेंडे के साथ मैदान में खुलकर आ चुकी हैं। मुजफरनगर दंगों के आरोपी संजय बालियान को मोदी सरकार में मंत्री बनाकर उनकी कारगुजारियों के लिए पुरस्कृत किया गया है तो दूसरे आरोपी संगीत सोम को जेड सुरक्षा दी गई है। इसी प्रकार योगी आदित्यनाथ, जो शुद्ध रूप से सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने की ही राजनीति करते हैं, का पिछले दिनों विवादित वीडियो सामने आया जिसमें वे कहते सुने-देखे जा रहे हैं कि यदि किसी एक हिदू लड़की का धर्म परिवर्तन होगा तो हम सौ मुसलिम लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराएंगे। यह वीडियो प्रचारित होने के साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश के  उपचुनावों में भाजपा की ओर से चुनाव प्रचार का प्रभारी बना कर समाज में सीधा संदेश दिया गया। ऐसे सभी प्रयास बहुमत और सत्ता प्राप्त करने के लिए तो लाभकारी साबित हो सकते हैं, देश में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में अंतरजातीय व अंतर्धार्मिक विवाह की प्रासंगिकता से इनकार नहीं किया जा सकता।

तनवीर जाफरी, अंबाला 

 

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