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संपादकीयः त्रासदी का हमला

किसी भी युद्ध में विमानों के जरिए बम-बारूद या बाकी व्यापक विनाश वाले हथियारों का इस्तेमाल अब कोई हैरानी नहीं पैदा करता।

Author April 7, 2017 3:19 AM
Syrian Crisis: हमले के बाद प्रभावित इलाकों में मदद पहुंचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सहायता दल पहली खेप रवाना कर दी गई है।(PHOTO: REUTERS)

किसी भी युद्ध में विमानों के जरिए बम-बारूद या बाकी व्यापक विनाश वाले हथियारों का इस्तेमाल अब कोई हैरानी नहीं पैदा करता। दूसरे हथियारों से बचने के लिए लोग तात्कालिक तौर पर कोई ठिकाना ढूंढ़ते हैं, कभी कामयाब भी होते हैं, लेकिन रासायनिक गैसों के हमले की जद में आए लोगों के पास बचने का कोई विकल्प नहीं होता, सिवाय इसके कि हवा में घुली जहरीली गैसों की चपेट में आकर वे तड़प-तड़प कर मर जाएं। सीरिया में इदलिब प्रांत पर हुआ हमला ऐसा ही था, जिसमें दर्जनों बच्चों सहित सौ से ज्यादा लोगों की जान चली गई और करीब चार सौ घायल जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। सीरिया में चल रहा गृहयुद्ध एक ऐसे दौर में है, जब सरकार और विद्रोहियों के बीच की लड़ाई में शायद किसी भी पक्ष को इस बात का खयाल रखना जरूरी नहीं लग रहा है कि उनके किस हमले से किसकी मौत होगी! युद्ध अब चरम त्रासद शक्ल अख्तियार कर चुके हैं।

विचित्र यह है कि दुनिया के जो देश सीरिया में सरकार या विद्रोहियों के पक्ष में खड़े हैं या फिर किसी न किसी रूप में उनकी मदद कर रहे हैं, वे अब कह रहे हैं कि रासायनिक हथियारों से हमले अनुचित हैं। सवाल है कि अगर युद्ध में दोनों पक्षों के पास रासायनिक हथियार हैं और दोनों को एक दूसरे पर हमला करने के लिए किसी भी तरह की नैतिकता का पालन करना जरूरी नहीं लग रहा हो तो किससे यह उम्मीद की जाएगी कि वह उचित-अनुचित का खयाल रखे? यह कोई पहला मौका नहीं है जब सीरिया के गृहयुद्ध में शत्रुपक्ष को खत्म करने या पीछे धकेलने के लिए रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ हो। अगस्त, 2013 में सीरिया के घौटा में सैरिन नामक रासायनिक गैस के जरिए हुए हमले में जब करीब दो हजार लोगों की जान चली गई, तब दुनिया भर में इस हथियार का इस्तेमाल करने के लिए विद्रोहियों के साथ-साथ सीरियाई सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया गया था। हालांकि फिर सीरिया ने उस संधि में शामिल होने के लिए संयुक्त राष्ट्र में आवेदन पेश किया था, जिसके तहत रासायनिक हथियारों के उत्पादन और संग्रह पर प्रतिबंध लगाने और मौजूदा जखीरे को नष्ट करने की व्यवस्था है।

लेकिन उसके चार साल बाद भी वहां के हालात में कोई फर्क नहीं आया है। ताजा हमले के लिए भी सीरिया सरकार को जिम्मेवार बताया गया है। लेकिन जहां सीरिया सरकार ने इस आरोप को खारिज किया, वहीं सीरिया के समर्थक रूस ने हमले के ठिकाने पर विद्रोहियों की ओर जमा रासायनिक हथियारों का हवाला दिया। इसके पहले संयुक्त राष्ट्र भी यह चेतावनी जारी कर चुका है कि दुनिया का सबसे खूंखार आतंकी संगठन आइएस रासायनिक हमला करने की क्षमता रखता है। करीब छह साल से सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध में अब तक लाखों लोग मारे जा चुके हैं। वहां के लोगों की जिंदगी जहां हर पल मौत से रूबरू है, वहीं युद्ध के चलते हो रहा विस्थापन एक भयावह त्रासदी रच रहा है। सीरिया की सरकार और विद्रोही गुटों को अपने आप से यह पूछना चाहिए कि आखिर वे किसके हक में युद्ध कर रहे हैं! अगर इतने बड़े पैमाने पर नागरिकों की जान जा रही है तो वहां बाद में किस बात पर खुशी मनाई जा सकेगी?

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