देश भर में हर साल लाखों विद्यार्थी इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। मगर उनकी उम्मीदें तब धुंधली पड़ जाती हैं, जब परीक्षा में अनियमितता की बातें सामने आती हैं या फिर पर्चाफोड़ की वजह से परीक्षा को रद्द कर दिया जाता है। इस बार भी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी-2026’में पर्चाफोड़ के गंभीर आरोप लगे हैं, जिस कारण राष्ट्रीय परीक्षा एजंसी (एनटीए) ने तीन मई को आयोजित परीक्षा को रद्द कर दिया है। साथ ही इस मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी गई है।
सवाल है कि इस तरह की प्रवेश परीक्षाओं में बार-बार गड़बड़ियों के मामले सामने क्यों आ रहे हैं? एनटीए का दावा है कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसे संबंधित परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में पूरी गोपनीयता बरती जाती है और जरूरी सुरक्षा मानदंडों का भी कड़ाई से पालन किया जाता है, फिर क्या वजह है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र चुनिंदा विद्यार्थियों तक पहुंच जाता है! आखिर एनटीए और जांच एजंसियां उस सिरे को क्यों नहीं ढूंढ पा रही हैं, जिसकी वजह से इस तरह की गड़बड़ियों का सिलसिला जारी है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है, जब एनटीए की ओर से आयोजित की जाने वाली किसी प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों से इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2024 में नीट की परीक्षा देने वाले कुछ अभ्यर्थियों ने शिकायत की थी कि उन्हें दूसरी भाषा के प्रश्नपत्र दिए गए।
इसके बाद एनटीए की ओर से क्षतिपूर्ति के तौर पर प्रभावित परीक्षार्थियों को दिए गए कृपांक को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे। इससे पहले वर्ष 2021 में भी कुछ छात्रों को गलत प्रश्नपत्र दिए जाने और कई केंद्रों पर परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग की शिकायतों से विवाद हुआ था। सरकार ने वर्ष 2018 में एनटीए की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षाएं आयोजित करना है, जिनमें नीट, जेईई, यूजीसी और नेट भी शामिल हैं।
दरअसल, प्रवेश परीक्षाओं की प्रक्रिया को पारदर्शी, कुशल और निष्पक्ष बनाना एनटीए की बुनियादी प्राथमिकता है। मगर, इनमें जिस तरह से एक के बाद एक विसंगतियां सामने आ रही हैं, उससे इस एजंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। नीट यूजी 2026 परीक्षा में करीब 23 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे।
एनटीए का दावा है कि इस परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने में पूरी गोपनीयता बरती गई और इन्हें ‘जीपीएस-ट्रैकिंग’ वाले वाहनों में ले जाया गया था। परीक्षा केंद्रों की निगरानी एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से एआइ-सहायता प्राप्त सीसीटीवी के माध्यम से की गई थी। सुरक्षा के इन तमाम प्रबंधों के बावजूद अगर प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही कुछ विद्यार्थियों तक पहुंच जाता है, तो यह वास्तव में बहुत ही गंभीर मसला है।
जाहिर है कि परीक्षा के आयोजन से संबंधित संस्था और अन्य संगठनों की पर्चाफोड़ माफिया से मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं हो सकता। सरकार को इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि विद्यार्थी इन परीक्षाओं के लिए कितनी मेहनत करते हैं, महंगी कोचिंग के लिए कई परिवार तो अपनी जमीन गिरवी रख देते हैं, तो कोई बैंक से कर्ज लेता है। इसलिए जरूरी है कि प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।
