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संपादकीयः Coronavirus के खतरे के सामने

कोरोना वायरस के खतरे के पैमाने को देखते हुए इसे एक महामारी के तौर पर देखा जा रहा है। खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इससे पैदा जोखिम के आकलन में गलती को स्वीकार किया है। चीन के वुहान प्रांत में शुरू इस बीमारी का फैलाव फिलहाल रुकता नहीं दिख रहा है और इसके असर से उपजी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका है।

Author Published on: January 29, 2020 2:22 AM
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चीन में कोरोना वायरस के कहर की जैसी खबरें आ रही हैं, वे चिंता में डालने के लिए काफी हैं। वहां अब तक अस्सी मरीजों की मौत हो जाने के अलावा कई हजार लोगों के इसकी जद में होने की खबरें आ चुकी हैं। इस लिहाज से देखें तो भारत में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत स्वाभाविक ही है। हालांकि अभी तक देश में इसके गंभीर असर के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन अगर समय रहते इसका सामना करने के उपाय किए जाएं तो यह समूचे देश के लिए जरूरी होगा। शायद यही वजह है कि चीन प्रवास से भारत लौटने वाले लोगों की जांच की जा रही है, ताकि अगर कोरोना वायरस के संक्रमण के कोई संकेत हों तो पहले ही चरण में उसके इलाज की कोशिश की जा सके। यों अभी तक इस वायरस से हुई बीमारी के इलाज के लिए कोई टीका तैयार नहीं किया जा सका है, तो ऐसी स्थिति में बचाव ही एक बेहतर उपाय बच जाता है। इसीलिए पिछले छह दिनों में ढाई हजार से ज्यादा लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई है। इसके अलावा, इस वायरस की चपेट में आने की आशंका के मद्देनजर मुंबई में अब तक चार लोगों को एहतियातन अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दरअसल, कोरोना वायरस के खतरे के पैमाने को देखते हुए इसे एक महामारी के तौर पर देखा जा रहा है। खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इससे पैदा जोखिम के आकलन में गलती को स्वीकार किया है। चीन के वुहान प्रांत में शुरू इस बीमारी का फैलाव फिलहाल रुकता नहीं दिख रहा है और इसके असर से उपजी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका है। अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस वायरस की चपेट में आए चार सौ इकसठ मरीज ‘नाजुक’ स्थिति में पहुंच चुके हैं। अगर इसके फैलने की रफ्तार यही रही तो भारत में इसका गंभीर असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। यों चीन से भारत लौटे लोगों की जांच के बाद अब तक किसी के भी कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी की जद में आने के लक्षण नहीं नजर आए हैं। लेकिन बिहार और राजस्थान में दो मरीजों के इस वायरस की चपेट में होने की आशंका जताई गई है। ऐसी स्थिति में अधिकतम सावधानी बरतने को एक जरूरी प्रक्रिया और चिंताजनक हालात का सामना करने का उपाय माना जाना चाहिए।

गौरतलब है कि मंगोलिया ने चीन से सटी अपनी सीमा पर कार और पैदल यात्रियों के प्रवेश पर रोक लगा दी है, वहीं पाकिस्तान में भी पांच लोगों को इस वायरस के संक्रमण की जांच के लिए अस्पताल में भेजा गया है। भारत के लिए चिंता की बात यह है कि अकेले वुहान में छह सौ से ज्यादा भारतीय विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। चूंकि नए साल की वजह से वहां छुट्टियां थीं, तो काफी विद्यार्थी भारत आ गए थे। लेकिन वहां अब भी ढाई से तीन सौ विद्यार्थियों के होने की आशंका है। फिलहाल कोरोना वायरस की वजह से स्थिति गंभीर होने के बाद से चीन का यह शहर एक तरह से बंद चल रहा है तो वहां फंसे लोगों को निकालने के लिए सरकार को कोई अन्य रास्ता निकालना चाहिए। इसी के मद्देनजर सोमवार शाम को सरकार ने भारतीयों को वुहान से निकालने का फैसला किया है और इसके लिए कोशिश जारी है। इस सबके बीच चूंकि कोरोना वायरस की चपेट में आने के बाद शरीर अमूमन भारत में सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी मौसमी बीमारियों की तरह ही प्रतिक्रिया करता है, इसलिए इसमें फर्क करने और उसके प्रति जरा भी कोताही नहीं बरतने को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।

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