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संपादकीयः सौदा और सियासत

यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में हुए अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में आए इटली की अदालत के फैसले ने स्वाभाविक ही भाजपा को कांग्रेस के खिलाफ हमलावर होने का मौका दे दिया है।

Author Published on: April 28, 2016 2:56 AM
अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले

यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में हुए अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में आए इटली की अदालत के फैसले ने स्वाभाविक ही भाजपा को कांग्रेस के खिलाफ हमलावर होने का मौका दे दिया है। इटली की अदालत ने अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी के प्रमुख ऊर्सी व हेलिकॉप्टर बनाने वाली कंपनी फिनमैकेनिका को रिश्वत देने और भारत के पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी को रिश्वत लेने का दोषी ठहराया है। फैसले में ‘सिग्नोरा’ गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए सरकार के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे एमके नारायणन के साथ दो और नेताओं का जिक्र है। इस फैसले के चलते देश में सियासी तापमान चढ़ गया है।

उत्तराखंड और कई अन्य मामलों में कांग्रेस के हमले झेल रही भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करने और उसे घेरने की तैयारी तेज कर दी है। गौरतलब है कि अगस्ता की मूल कंपनी इटली की फिनमैकेनिका ने छत्तीस सौ करोड़ रुपए में बारह वीवीआईपी हेलिकॉप्टर भारत को बेचने का सौदा किया था। इसकी खरीदारी की प्रक्रिया 2005 से 2007 के बीच ही शुरू हो गई थी, और तब एसपी त्यागी भारतीय नौसेना के प्रमुख थे। वर्ष 2010 में हुए सौदे के तहत तीन हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति की जा चुकी थी और तीस फीसद रकम का भुगतान हो चुका था। लेकिन तीन सौ साठ करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आने पर यूपीए सरकार ने वह सौदा रद्द कर दिया। मामले का संज्ञान लेते हुए तब के रक्षामंत्री एके एंटनी ने 2013 में सीबीआई जांच का आग्रह किया। आरोप है कि हेलिकॉप्टर की क्षमता के मानक बदलने तथा सौदे को अंतिम रूप दिलाने के लिए कुछ भारतीय राजनीतिकों तथा अफसरों को रिश्वत दी गई। अदालत के फैसले ने भाजपा को कांग्रेस नेतृत्व पर उंगली उठाने का मौका दे दिया है। पर अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि उन नामों का जिक्र किस रूप में या किस संदर्भ में आया है।

इस बीच, सौदे में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुके जेम्स क्रिश्चियन मिशेल ने कहा है कि वह सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के सभी सवालों के जवाब देने को तैयार थे और इस आशय का अनुरोध-पत्र भी दोनों एजेंसियों को भेजा था, पर उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। हालांकि अब सीबीआई ने मिशेल को गिरफ्तार करने के लिए इंटरपोल से आग्रह किया है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भाजपा पर पलटवार करते हुए सवाल उठाया है कि रिश्वतखोरी के आरोप सामने आने पर यूपीए सरकार ने सौदा रद्द करने के साथ ही जिस अगस्ता वेस्टलैंट को काली सूची में डाल दिया था, उसे राजग सरकार ने काली सूची से बाहर क्यों कर दिया?

भाजपा का आरोप है कि यूपीए सरकार ने सीबीआई जांच का आदेश भले दिया था, पर जांच की प्रक्रिया बहुत धीमी कर दी गई थी, वहीं कांग्रेस का सवाल है कि राजग सकार आने के बाद सीबीआई जांच तेज क्यों नहीं की गई? इन आरोपों और सवालों से जाहिर है कि यह घमासान अभी चलता रहेगा और संसद में हंगामे का भी एक खास विषय फिलहाल बना रहेगा। यह पहला मौका नहीं है जब किसी रक्षा सौदे में दलाली या रिश्वत के आरोपों ने देश की राजनीति में तूफान मचाया हो। बोफर्स विवाद के बाद कमीशनखोरी को प्रतिबंधित करने तथा पारदर्शिता के कुछ नियम-कायदे तय किए गए थे। रक्षा सौदों को बोफर्स विवाद के इतने बरस बाद भी पाक-साफ क्यों नहीं बनाया जा सका?

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