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संपादकीय: सुरक्षा का घेरा

दुनिया भर में तमाम देश परमाणु हथियारों का जखीरा इसीलिए जमा करते हैं कि वक्त आने पर उन्हें अपने दुश्मन देश के सामने दबना न पड़े। हालांकि आज दुनिया की जो स्थिति है, उसमें युद्ध की स्थितियां लगभग न के बराबर हैं।

Author November 7, 2018 3:19 AM
यह पनडुब्बी पूरी तरह देश में ही तैयार की गई है। इस तरह अब भारत दुनिया का छठा देश हो गया है, जिसके पास परमाणु पनडुब्बी है।

वही देश सामरिक रूप से सशक्त माना जाता है, जिसके पास थल, जल और वायु तीनों जगहों से दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दे सकने की क्षमता हो। इस मामले में भारत सक्षम है। परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत के आने के बाद उसकी ताकत और बढ़ गई है। यह पनडुब्बी पूरी तरह देश में ही तैयार की गई है। इस तरह अब भारत दुनिया का छठा देश हो गया है, जिसके पास परमाणु पनडुब्बी है। अभी तक अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और चीन के पास परमाणु पनडुब्बियां थीं। अरिहंत की खासियत यह है कि यह साढ़े सात सौ से लेकर पैंतीस सौ किलोमीटर तक मार कर सकती है। इसके जरिए पानी के भीतर और सतह पर से मिसाइलें दागी जा सकती हैं। पानी के भीतर से भी किसी विमान को निशाना बनाया जा सकता है। अरिहंत ने अपना पहला गश्ती फेरा पूरा कर लिया। इस तरह उसके तकनीकी पक्षों को लेकर आश्वस्त हुआ जा सकता है। स्वाभाविक ही इस मौके पर प्रधानमंत्री ने वहां उपस्थित होकर अरिहंत के चालक दल को बधाई दी और उनका मनोबल बढ़ाया। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए चेतावनी दी कि अब उसके परमाणु हमले की धौंस सुनने के दिन समाप्त हो गए।

पाकिस्तान अक्सर तनाव की स्थितियों में परमाणु हमले की धमकी देता रहता है। ऐसे में अब निस्संदेह भारत को उसका दबाव झेलने की जरूरत नहीं होगी। दुनिया भर में तमाम देश परमाणु हथियारों का जखीरा इसीलिए जमा करते हैं कि वक्त आने पर उन्हें अपने दुश्मन देश के सामने दबना न पड़े। हालांकि आज दुनिया की जो स्थिति है, उसमें युद्ध की स्थितियां लगभग न के बराबर हैं। आज वही देश ताकतवर माने जाते हैं, जिन्होंने अपनी अर्थव्यवस्खा को मजबूत बनाया है। ऐसे में परमाणु हथियार सिर्फ दुश्मन देश पर धौंस जमाने के ही काम आते हैं। पर पाकिस्तान में जिस तरह परोक्ष रूप से सेना का शासन चलता है, उसमें अक्सर वह युद्ध का माहौल बनाए रखने का प्रयास करती है। यही उसके लिए अपनी जनता का ध्यान वहां की बुनियादी जरूरतों और समस्याओं से भटकाए रखने का सबसे बड़ा औजार है। फिर पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को जिस तरह पनाह मिली हुई है, वे वहां की सेना से ही हथियार और दूसरे साजो-सामान लेकर भारत में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास करते हैं। वे कब युद्ध की स्थिति पैदा कर दें, कहना मुश्किल है। ऐसे में शक्तिशाली हथियार रखने जरूरी हैं, ताकि उनके भय की वजह से हमले करने से पहले वे सोचें।

हालांकि परमाणु हथियारों का उपयोग कोई भी देश नहीं करना चाहेगा। उसका असर सिर्फ दुश्मन देश पर नहीं, बल्कि अपने देश पर भी पड़ेगा। यह बात पाकिस्तान भी जानता है। भले वह परमाणु हमले की धमकी देता रहा हो, पर वह जहां तक हो सकेगा, इसके इस्तेमाल से बचेगा। मगर सिर्फ इस तर्क पर भारत उसे मुंहतोड़ जवाब देने वाले हथियारों का जखीरा इकट्ठा करने से परहेज नहीं कर सकता। समुद्री सीमा में पाकिस्तान ने अपनी ताकतवर पनडुब्बियां तैनात कर रखी हैं। उनका सामना करने के लिए अरिहंत जैसी पनडुब्बी की जरूरत थी। अरिहंत केवल पानी के भीतर दुश्मन से निपटने में सक्षम नहीं है, बल्कि वह पानी के भीतर से हवा में मार करने की भी क्षमता रखता है, इसलिए यह सेना के लिए ज्यादा कारगर साबित होगी। निश्चय ही इसके पहले गश्ती फेरे से लौट कर आने के बाद नौसेना का मनोबल बढ़ा है।

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