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संपादकीयः जानलेवा धागे

इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि किसी का मनोरंजन या खेल दूसरों की जान लेने वाला साबित होने लगे। पिछले कुछ सालों के दौरान पतंग के मांझे वाले धागे की वजह से लोगों की जान जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

Author April 4, 2019 3:29 AM
जानलेवा धागों की खुले बाजार में बिक्री में कोई कमी नहीं आई है।

इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि किसी का मनोरंजन या खेल दूसरों की जान लेने वाला साबित होने लगे। पिछले कुछ सालों के दौरान पतंग के मांझे वाले धागे की वजह से लोगों की जान जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस मसले पर काफी चिंता भी जताई गई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई। लेकिन आज भी हालत यह है कि इस तरह के जानलेवा धागों की खुले बाजार में बिक्री में कोई कमी नहीं आई है। प्रशासन की ओर से बरती गई इस लापरवाही और आम लोगों की गैरजिम्मेदारी की कीमत एक बार फिर एक युवक को अपनी जान गंवा कर चुकानी पड़ी। मंगलवार को राजधानी दिल्ली के तिमारपुर इलाके में अठारह साल का युवक मोटरसाइकिल से कुछ सामान लाने निकला था, लेकिन बीच में एक कटी पतंग का धागा उसके गले में उलझ गया। तीखे मांझे से लैस धागे से उसकी गर्दन काफी गहराई तक कट गई और ज्यादा खून बहने से आखिरकार उसे नहीं बचाया जा सका। कोई खेल खेलना या मनोरंजन किसी का हक हो सकता है। लेकिन अगर वह किसी दूसरे और उस खेल से अनजान व्यक्ति के लिए जानलेवा बनता है तो इसे किस आधार पर सही ठहराया जा सकता है?

यह किसी से छिपा नहीं है कि बाजार में सरेआम पतंग उड़ाने के लिए जो धागे बिकते हैं, उन पर सीसे के बुरादे से तैयार मांझा चढ़ा होता है। पतंग कटने के बाद धागा समेटने या फिर पतंग के साथ काफी निचले स्तर से गुजरता धागा आमतौर पर दिखाई नहीं देता। यह अगर एक झटके से व्यक्ति के शरीर से गुजर भर जाए तो गहरा घाव हो सकता है। खासतौर पर मोटरसाइकिल की सवारी करने वाले लोगों की नजर चूंकि सड़क पर होती है, इसलिए धागे को देख पाना उनके लिए आमतौर पर मुश्किल होता है और कई बार वे उस जानलेवा धागे की चपेट में आ जाते हैं। यह कहा जाता है कि ये धागे चीन से भारतीय बाजारों में आ रहे हैं। हो सकता है कि यह तथ्य हो। लेकिन इसके अलावा भी पतंग के शौकीन लोग स्थानीय स्तर पर नायलॉन के धागों पर कांच का चूरा, खतरनाक अधेसिव, एल्युमीनियम आॅक्साइड, जिरकोनिया आॅक्साइड और मैदा जैसी चीजों से तैयार लेप चढ़ा कर उसे मारक बना देते हैं, ताकि दूसरों की पतंग आसानी से काटी जा सकें। लेकिन सच यह है कि आज ये धागे कुछ लोगों के लिए पतंग काटने या इसके जरिए मनोरंजन करने का जरिया हैं तो इससे किसी का गला भी कट जा रहा है।

दिल्ली में मांझे वाले धागे की वजह से युवक की मौत की ताजा घटना इस तरह का कोई नया मामला नहीं है। इसके चलते कई बच्चों और लोगों के मरने की खबरें आ चुकी हैं। कुछ खास मौकों पर खतरनाक मांझे से लैस धागों के जरिए की जाने वाली पतंगबाजी की वजह से बड़ी तादाद में पक्षियों की मौत या फिर घायल होने के मामले भी सामने आते हैं। मगर अफसोस की बात यह है कि पिछले कुछ सालों से तीखे मांझे वाले धागे की वजह से हुई कई मौतों और इस मसले पर दिल्ली हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद न तो सरकार या प्रशासन को इस दिशा में ठोस पहलकदमी की जरूरत महसूस हुई है, न लोगों के बीच इस मसले पर संवेदनशीलता का विकास हुआ कि उनके खेल की वजह से अगर किसी जान जा सकती है, तो वे उसके बारे में एक बार ठहर कर सोचें।

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