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संपादकीय: जासूसी का जाल

चिंता का विषय यह है कि सेना के जवान ही नहीं, अधिकारी और इंजीनियर तक हनी ट्रैप में फंस कर देश के साथ गद्दारी कर रहे हैं। यह देशद्रोह से कम नहीं है। गोपनीय सूचनाओं का इस्तेमाल कर दुश्मन देश की खुफिया एजेंसियां और सेना देश के संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाती हैं।

Author October 10, 2018 2:07 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर। (Express, Illustration: Mithun Chakraborty)

भारत के सैन्य और रक्षा प्रतिष्ठानों में पाकिस्तान के जासूसों का फैलता जाल गंभीर चिंता का विषय है। इससे देश की सुरक्षा संबंधी संवेदनशील जानकारियां बाहर जा रही हैं। हाल में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक इंजीनियर को जासूसी के मामले में गिरफ्तार किया है। ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना से जुड़ा यह इंजीनियर संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान और अमेरिका को मुहैया करा रहा था। यह काम काफी समय से चल रहा था लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लग पाई। न जाने कितनी खुफिया जानकारियां और अहम सूचनाएं दुश्मन के हाथ लगी होंगी! वैसे यह इंजीनियर आसानी से पकड़ में नहीं आता और उसका खेल लंबा चलता रहता। पुलिस को इसकी भनक तब लगी जब पिछले महीने उत्तर प्रदेश एटीएस ने नोएडा से सीमा सुरक्षा बल के एक जवान को जासूसी के मामले में गिरफ्तार किया। पता चला कि यह जवान हनी ट्रैप का शिकार था और पिछले काफी समय से आइएसआइ के लिए काम कर रहा था। एटीएस को इसी से डीआरडीओ के इंजीनियर का सुराग मिला। जाहिर है, पाकिस्तान सहित दूसरे देशों को गुप्त सूचनाएं देने वालों का नेटवर्क मामूली नहीं है।

हनी ट्रैप यानी महिलाओं के जाल में फंस कर जासूसी के मामले सोशल मीडिया के आने के बाद ज्यादा बढ़े हैं। सोशल मीडिया के इस दुरुपयोग ने जासूसों का काम आसान कर दिया है। जासूसी करने वाले फेसबुक और वाट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं। अब तक ऐसे जितने भी मामले सामने आए हैं उनमें ज्यादातर हनी ट्रैप से जुड़े हैं। रक्षा और सैन्य प्रतिष्ठानों, सैन्य अड्डों, कारखानों, योजनाओं आदि की जासूसी करने वालों का नेटवर्क हमारे अपने तंत्र के भीतर ही सक्रिय है। इसलिए यह खुफिया और सुरक्षा एजंसियों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस साल फरवरी में वायुसेना के एक ग्रुप कैप्टन को सेना से संबंधित बेहद संवेदनशील जानकारियां आइएसआइ तक पहुंचाने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह अधिकारी फेसबुक और वाट्सऐप के जरिए आइएसआइ से जुड़ी कुछ महिलाओं के संपर्क में था और उन्हें जानकारियां देता था, जिसे वे आगे पहुंचाती थीं। कुछ साल पहले मेरठ में आइएसआइ का एक एजंट पकड़ा गया था जो लंबे समय से भारत के सैनिकों का ब्योरा और संवेदनशील ठिकानों के नक्शे दुश्मन देश को मुहैया करा रहा था। पंजाब में सेना का एक नायब सूबेदार पाकिस्तान की एक महिला जासूस के जाल में फंस गया और सैन्य ठिकानों से जुड़े अहम राज देता रहा। इसके एवज में महिला उसे पैसे और अश्लील तस्वीरें और वीडियो भेजती थी और उसे यूरोप की सैर कराने का भी लालच दिया था।

चिंता का विषय यह है कि सेना के जवान ही नहीं, अधिकारी और इंजीनियर तक हनी ट्रैप में फंस कर देश के साथ गद्दारी कर रहे हैं। यह देशद्रोह से कम नहीं है। गोपनीय सूचनाओं का इस्तेमाल कर दुश्मन देश की खुफिया एजेंसियां और सेना देश के संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाती हैं। जाहिर है, अपने देश के बारे में सूचनाएं हमारे अपने बीच के ही लोग पहुंचाते हैं। महाराष्ट्र एटीएस ने डीआरडीओ के जिस इंजीनियर को जासूसी के मामले में पकड़ा है, उसे ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट में तैनात किया गया था। लेकिन इस इंजीनियर की करतूत का पर्दाफाश होने में दो साल लग गए। कहीं न कहीं यह हमारे तंत्र की कमजोरी और विफलता को भी उजागर करता है। सोशल मीडिया के दौर में हरेक पर निगरानी रख पाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में रास्ता यही है कि हमारी खुफिया एजंसियां अपने नेटवर्क को ज्यादा ताकतवर बनाएं।

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