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संपादकीय: महामारी का कहर

अभी यह रहस्य ही बना हुआ है कि यह महामारी आखिर फैली कैसे। इसे लेकर तरह-तरह के किस्से चल रहे हैं और आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं। चीन और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापार युद्ध के नजरिए से भी इसे देखा जा रहा है और अमेरिका चीन पर कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लगा चुका है।

Author Published on: March 30, 2020 2:15 AM
कोरोना का प्रकोप मानवता के लिए ऐतिहासिक तो है ही, इसके कारण और भी कई इतिहास बनेंगे और परंपराएं टूटेंगी।

कोरोना वायरस चीन के बाद अब अमेरिका और यूरोपीय महाद्वीप के देशों में कहर बरपा रहा है। इटली, स्पेन, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में जिस तेजी से लोग मर रहे हैं और नए संक्रमित मामले सामने आ रहे हैं, उससे तो लग रहा है कि दुनिया को जल्द ही इस संकट से मुक्ति नहीं मिलने वाली। इटली और स्पेन में रोजाना नौ सौ के आसपास लोग मर रहे हैं, जबकि अमेरिका में मरने वालों का आंकड़ा तो बढ़ रहा है, उससे भी ज्यादा गंभीर बात नए मामलों का नाटकीय ढंग से सामने आना है। दुनिया में अमेरिका पहला देश बन गया है, जहां अब तक एक लाख लोग जांच में कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, राजपरिवार के प्रिंस चार्ल्स तक इससे नहीं बच पाए। ब्रिटेन के हालात भी बड़े खतरे का संकेत दे रहे हैं। हालांकि चीन में यह महामारी खत्म नहीं हुई है, लेकिन इससे निपटने के लिए उसने बिना वक्त गंवाए जिस तेजी से युद्धस्तर पर काम किया, उससे हालात पर नियंत्रण पा लिया गया। यह दूसरे देशों के लिए एक सबक है।

अभी यह रहस्य ही बना हुआ है कि यह महामारी आखिर फैली कैसे। इसे लेकर तरह-तरह के किस्से चल रहे हैं और आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं। चीन और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापार युद्ध के नजरिए से भी इसे देखा जा रहा है और अमेरिका चीन पर कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लगा चुका है। कारण भले जो रहे हों, पर ज्यादातर देशों में यह लापरवाही की वजह से फैला। कई देशों ने चीन में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने को शुरू में गंभीरता से नहीं लिया और वहां से आने वाले अपने और विदेशी नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगाने जैसा कदम नहीं उठाया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन हालात की गंभीरता को देखते हुए दुनिया के सभी देशों को अपने यहां पूर्ण बंदी जैसा कदम उठाने को कहता रहा, लेकिन किसी ने इस पर गौर नहीं किया। इटली, स्पेन सहित यूरोप के ज्यादातर देश और अमेरिका इसी का नतीजा भुगत रहे हैं। ब्रिटेन में लॉकडाउन जैसे कदम को वहां के नागरिकों ने बड़े हल्के में लिया। यही अमेरिका में भी हुआ। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा, सरकार को संक्रमण फैलने से रोकने के लिए जो कदम डेढ़ महीने पहले उठाने चाहिए थे, वे नहीं उठाए गए। इसका परिणाम यह हुआ कि दुनिया भर से लोग भारत में प्रवेश करते गए और महामारी फैलाते रहे।

कोरोना महामारी ने दुनिया के ज्यादातर देशों की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। अमेरिका और इटली की स्वास्थ्य सेवाओं को दुनिया में सबसे उत्कृष्ट माना जाता है। लोग यूरोप और अमेरिका इलाज कराने जाते ही इसलिए हैं कि वहां सबसे उन्नत और बेहतर चिकित्सा सेवाएं हैं। पर आज हालात ये हैं कि अस्पतालों में दवाइयों, बिस्तरों, चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी है। ज्यादातर देशों में कोरोना की जांच के लिए परीक्षण किट ही नहीं हैं, प्रयोगशालाओं की कमी है।

अमेरिका जैसा सबसे ताकतवर देश वेंटीलेटर जैसे जीवन रक्षक उपकरणों की भारी कमी से जूझ रहा है। भारत और अन्य विकासशील देशों की हालत तो और खराब है। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि कई देश परमाणु बम के हमले से बचने के उपाय तो खोज चुके हैं, लेकिन कोरोना जैसी महामारी से बचने और इलाज के तरीके किसी के पास नहीं हैं।

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