नशे का जाल

मादक पदार्थों के कारोबार और उसके नशे की चपेट में आए लोगों, समूहों को इसके कैसे नतीजे झेलने पड़े हैं, यह कोई छिपी बात नहीं है।

सांकेतिक फोटो।

मादक पदार्थों के कारोबार और उसके नशे की चपेट में आए लोगों, समूहों को इसके कैसे नतीजे झेलने पड़े हैं, यह कोई छिपी बात नहीं है। इन पदार्थों की तस्करी और स्थानीय स्तर पर इसका अवैध कारोबार करने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियान चलाने की बातें भी खूब होती रही हैं। लेकिन कुछ सीमित महत्त्व और नतीजे वाली कार्रवाइयों का हासिल क्या रहा है, यह सबके सामने है।

विडंबना यह है कि इस समस्या को लेकर जताई जाने वाली चिंता के समांतर इसे खत्म करने की दिशा में अब तक कोई ठोस कोशिश नहीं हुई है। आज हालत यह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से अक्सर मादक पदार्थों की तस्करी और उनकी जब्ती की खबरें आती रहती हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ कार्रवाइयों को छोड़ दिया जाए तो इस समस्या की जड़ों और इसका कारोबार करने वाले असली स्रोतों पर शायद ही कभी चोट की जाती है। अगर सरकार की नजर में यह समस्या वास्तव में गंभीर है तो इससे निपटने के क्रम में औपचारिक महत्त्व की कार्रवाइयों का कोई बड़ा नतीजा नहीं निकलने वाला है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों के दौरान गुजरात से मादक पदार्थों की जब्ती और कुछ गिरफ्तारियों की खबरें आई हैं। इसके अलावा, हाल में मुंबई में क्रूज जहाज पर मादक पदार्थों की जब्ती के मामले ने समूचे देश का ध्यान इस मसले की ओर खींचा है। सोमवार को गुजरात में आतंकवाद निरोधक दस्ते ने सवा सौ किलो हेरोइन जब्त कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी बड़ी तादाद में हेरोइन की कीमत छह सौ करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। इससे पहले बीते कुछ दिनों में गुजरात पुलिस ने मादक पदार्थों की दो बड़ी खेप जब्त की।

वहीं गुजरात आतंकवाद रोधी दस्ते ने 2016 से लेकर अब तक उन्नीस हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की कीमत का मादक पदार्थ जब्त किया। इसमें नौ सौ करोड़ रुपए के नशीले पदार्थ अकेले इस साल बरामद किए गए। इस दौरान सत्तर से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। गुजरात के ही मुंद्रा बंदरगाह से करीब तीन हजार किलो मादक पदार्थ जब्त किए गए थे। सवाल है कि छिपी हुई आपराधिक गतिविधियों का भी भंडाफोड़ करने और हर स्तर पर निगरानी का दावा करने वाली सरकार और उसकी पुलिस की नजरों के सामने इतने बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी के जाल ने कैसे अपना ऐसा तंत्र खड़ा कर लिया!

दरअसल, पाकिस्तान, ईरान या अफगानिस्तान से भारत में मादक पदार्थों की तस्करी के लिए गुजरात का समुद्र तट पसंदीदा मार्ग बन गया है। तस्कर पाकिस्तान से चल कर गुजरात के कच्छ या भुज समुद्र के रास्ते अपने साथ मादक पदार्थ लेकर आते हैं। चोरी-छिपे गुजरात के अपने ठिकानों पर पहुंचाने के बाद इसे अवैध तरीकों से देश के अन्य राज्यों में भी पहुंचा दिया जाता है।

जाहिर है, इस रास्ते और इलाके में तस्करों को कोई न कोई ऐसी सुविधा है, जिसके बूते वे कई देशों के इतने बड़े दायरे में अपना धंधा चला रहे हैं। पिछले कुछ समय में जितनी मात्रा में हेरोइन या दूसरे मादक पदार्थों की जब्ती की खबरें आई हैं, अनुमानों के मुताबिक वे इस कारोबार का महज छोटा-सा हिस्सा हैं। इस तरह छोटे स्तर पर की जा रही कार्रवाइयों या अभियानों से कुछ समय के लिए समस्या काबू में आती भले दिख सकती है, लेकिन जब तक इस कारोबार के असली और केंद्रीय स्रोतों और बड़ी खेप लाने वालों पर शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक इसके मूल तंत्र तक पहुंच कर उन्हें तोड़ा या खत्म नहीं किया जा सकता।

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