महामारी में दुविधा

इस बार कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकारें दुविधा में देखी जा रही हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एक्सप्रेस प्रतीकातम्क फोटो)

इस बार कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकारें दुविधा में देखी जा रही हैं। एक तरफ तो वे पिछली दो लहरों के समय की गई बंदियों के अनुभव से आर्थिक गतिविधियों पर अंकुश लगा कर लोगों के रोजी-रोजगार पर संकट का जोखिम मोल नहीं लेना चाहतीं। दूसरी ओर उन्हें इस बात से कुछ राहत महसूस हो रही है कि इस बार का संक्रमण अधिक घातक साबित नहीं हो रहा।

हालांकि सरकारों ने पहले से अस्पतालों और चिकित्सीय सुविधाओं का इंतजाम कर रखा है, पर चूंकि मरीजों पर इसका संक्रमण गंभीर नहीं देखा जा रहा, इसलिए उन्होंने दफ्तरी कामकाज और कारोबारी गतिविधियों को काफी हद तक उन्हें संचालित करने वालों पर छोड़ दिया है। हालांकि इसका नतीजा यह देखा जा रहा है कि बाजारों, सार्वजनिक स्थानों और सार्वजनिक परिवहनों में खासी भीड़भाड़ नजर आ रही है, जिससे स्थिति के विस्फोटक होने की आशंका बनी हुई है।

दिल्ली सरकार ने पहले सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को आधी क्षमता के साथ चलाने का एलान किया, मगर जैसे ही लोगों को असुविधा होनी शुरू हुई, उसने अपना फैसला पलट दिया। इसी तरह दुकानों को सम-विषय नियम के अनुसार खोलने का नियम लागू किया, पर उसमें कड़ाई नहीं बरती गई, जिससे उसका बहुत असर नजर नहीं आ रहा। अब जब मामले बहुत तेजी से बढ़ने लगे हैं, तो दिल्ली सरकार ने घोषणा की है कि निजी कार्यालय बंद रखने होंगे, उनके कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। मगर बहुत सारे व्यापारी और उद्यमी इसका विरोध कर रहे हैं।

जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, वहां रैलियों आदि पर तो रोक लगी हुई है, मगर बाजारों में पहले जैसी ही भीड़भाड़ नजर आ रही है। शादी-विवाह के समारोहों में नियम-कायदों का पालन नहीं हो रहा। यहां तक कि राजनीतिक दलों ने कई जगह शादी-विवाह के समारोहों में प्रचार का रास्ता निकाल लिया है। उन राज्यों की सरकारें किसी तरह की सख्त पाबंदी लगाने से बच रही हैं।

ऐसे में कोरोना संक्रमण के खतरे लगातार बने हुए हैं। एक भ्रम कोरोना और ओमीक्रान को लेकर भी बना हुआ है। चिकित्सा विज्ञानी बता रहे हैं कि ओमीक्रान का संक्रमण जानलेवा नहीं है, इससे घबराने की जरूरत नहीं। इसलिए बहुत सारे लोगों ने ओमीक्रान और कोरोना दोनों को एक ही मान लिया है, जबकि कोरोना का डेल्टा बहुरूप अभी समाप्त नहीं हुआ है। सरकारें अपेक्षा कर रही हैं कि लोग सावधानी बरतें और कोरोना नियमों का पालन करें, मगर हमारे देश के लोगों की आदत है कि जब तक सरकारें कड़ाई नहीं करतीं, वे मनमानी करते रहते हैं।

सरकारों की कोरोना की इस नई लहर में दुविधा ने कई तरह की आशंकाएं पैदा कर दी हैं। स्थिति यह है कि अभी देश में बहुत सारे लोगों ने कोरोनारोधी टीके की एक भी खुराक नहीं ली है, लाखों लोगों को दूसरी खुराक नहीं मिल पाई है, किशोरों के लिए टीकाकरण अभियान अभी शुरू ही हुआ है। ऐसे में दावा नहीं किया जा सकता कि कोरोना का प्रकोप जल्दी शांत हो जाएगा।

हर बार केंद्र सरकार कुछ व्यावहारिक कदम उठाती रही है, मगर इस बार वह शिथिल ही नजर आ रही है। इसलिए भी राज्य सरकारों का रुख ढीला-ढाला बना हुआ है। केंद्र सरकार को इस मामले में कुछ व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी बुरा असर न पड़े और लोग सुरक्षित रह कर कामकाज कर सकें। नए कोरोना नियमों की घोषणा की अपेक्षा बनी हुई है।

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