डेंगू का डंक

हर साल बरसात के बाद डेंगू का प्रकोप बढ़ जाता है।

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सांकेतिक फोटो।

हर साल बरसात के बाद डेंगू का प्रकोप बढ़ जाता है। कुछ समय पहले तक उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस पर काबू पाने को लेकर प्रशासन हलकान दिखाई दे रहा था। पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी हो गई थी। उस दौरान सैकड़ों बच्चों की मौत हो गई। अब दिल्ली में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। इससे एक व्यक्ति की मौत हो गई। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन सालों में इस बार सर्वाधिक मामले आए हैं। इस बार डेंगू के लक्षण कुछ जटिल भी देखे गए हैं।

उत्तर प्रदेश में इसी वजह से डेंगू के मरीजों के इलाज में चिकित्सकों को परेशानियां आर्इं। दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामले इसलिए भी चिंताजनक हैं कि सरकार लगातार इसे लेकर लोगों को जागरूक बनाने का प्रयास करती रहती है। घरों में सफाई रखने, साफ पानी जमा न होने देने को लेकर हिदायत देती रहती है। इसके विज्ञापन लगातार चलते रहते हैं। इस अभियान का असर भी पिछले दो सालों में देखा गया, मगर इस साल फिर से मामले बढ़ते पाए जा रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि लोग अब फिर लापरवाही बरतने लगे हैं।

यह हकीकत सबको पता है कि डेंगू का मच्छर साफ पानी में पलता है और दिन में ही काटता है। इसके काटने पर पैदा परेशानियों के लक्षण भी सबको पता हैं। फिर भी अगर लोग सतर्कता नहीं बरत रहे, तो यह खतरे की वजह बन सकता है। 2018 से पहले के कुछ सालों के तथ्य छिपे नहीं हैं जब दिल्ली के अस्पतालों में डेंगू मरीजों की भीड़ भरी रहती थी। कई लोग मारे गए थे।

इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को हर वक्त तैनात रहने का आदेश दिया था। मगर शायद लोग उन स्थितियों को भूल गए हैं। दिल्ली में देश के दूसरे शहरों की अपेक्षा अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मानी जाती हैं, यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी कमीं नहीं। फिर भी अगर यहां डेंगू के किसी मरीज को नहीं बचाया जा पाता, तो यह चिंता की बात है। हालांकि सरकारें इस तथ्य से अनजान नहीं हैं कि कोई भी विषाणु जब नए सिरे से पांव पसारता है, तो नए रूप में प्रकट होता है, पहले से अधिक ताकत के साथ अता है। इसी तरह मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां भी इसीलिए हर बार कुछ जटिल रूप ले लेती हैं, क्योंकि वे बदलते वातावरण के अनुसार खुद को ढाल चुके होते हैं, प्रचलित दवाएं उन पर कम असरकारी साबित होती हैं।

हालांकि डेंगू फैलने के पीछे आम लोगों की लापरवाही बड़ा कारण है, मगर इस आधार पर दिल्ली सरकार और नगर निगम अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकते। घर-घर जांच अभियान क्यों तेजी नहीं पकड़ पा रहा? जगह-जगह बरसात का पानी जमा देखा जाता है, कूड़ा-करकट समय पर नहीं उठाया जा पाता। पार्कों और खेल के मैदानों की उचित साफ-सफाई नहीं हो पाती, जिसके चलते मच्छरों के पनपने का मौका मिलता है। दिल्ली सरकार मच्छरमार दवाओं के छिड़काव के मामले में क्यों शिथिल दिखती है? जब कोई भी समस्या बढ़ जाती है, तभी सरकारों की नींद क्यों खुलती है। अगर समय-समय पर मच्छरमार दवाओं का छिड़काव किया जाता रहे, साफ-सफाई का समुचित प्रबंध हो, तो इस समस्या पर काबू पाना कठिन नहीं है। मगर विचित्र है कि दिल्ली सरकार और नगर निगम अपने अधिकारों की लड़ाई और एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में ही अधिक उलझे नजर आते हैं। असल समस्या पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा पाते।

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