Racism and Safety: भारत की विविधता को उसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक माना जाता रहा है। अलग-अलग भाषा, संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली के बावजूद देश की एकता कायम है। मगर इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को आज भी देश के कई हिस्सों में भेदभाव, उपेक्षा और यहां तक कि हिंसा का सामना करना पड़ता है।
उनकी अलग भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर बने पूर्वाग्रह और गलत धारणाएं इस समस्या को और गंभीर बनाती हैं। दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार चोंगथाम विक्रम सिंह की हत्या को भी इसी धारणा से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या दिल्ली जैसे महानगरों की चकाचौंध में नागरिकों की सुरक्षा का मसला हाशिये पर चला गया है।
निश्चित तौर पर यह सरकार और कानून-व्यवस्था की नाकामी का भी प्रश्न है, क्योंकि देश की राजधानी होने के बावजूद यहां बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के दावे अक्सर खोखले साबित होते हैं।
गौरतलब है कि दिल्ली की सनलाइट कालोनी में बीते रविवार की रात को मणिपुरी संगीतकार विक्रम सिंह ने अपने घर के पास कुछ लोगों को शराब पीकर हंगामा और शोर मचाने से रोकने की कोशिश की थी।
इसी से गुस्साए लोगों ने उनसे मारपीट की, जिससे उनकी मौत हो गई। यों हर अपराध कानून-व्यवस्था की विफलता का सूचक है, लेकिन जब कोई पीड़ित देश के पूर्वोत्तर राज्य से हो, तब ऐसी घटना को एक व्यापक सामाजिक संदर्भ में देखा जाता है। पूर्वोत्तर राज्यों के लोग अक्सर यह शिकायत करते रहे हैं कि दिल्ली सहित देश के अनेक शहरों में उन्हें केवल शक्ल-सूरत, भाषा, खान-पान और जीवन-शैली के कारण पूर्वाग्रहों से भरी दृष्टि से देखा जाता है।
इस क्षेत्र के लोगों पर किसी दूसरे प्रदेश में नस्लीय दुराग्रहों की वजह से हमले या उनकी हत्या के मामले भी अक्सर सामने आते रहे हैं। भेदभाव की यह प्रवृत्ति न केवल ऐसे पूर्वाग्रह पालने वालों की सोच पर सवाल उठाती है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता की भावना को भी चोट पहुंचाती है। इसलिए हत्या की इस वारदात की जांच निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए और इसमें यह भी देखना जरूरी है कि क्या इसके पीछे किसी तरह का भेदभाव या इससे उपजी पूर्वाग्रह की मानसिकता तो नहीं थी!
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