राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल आग लगने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। इन हादसों से बार-बार महानगर के बुनियादी ढांचे, विद्युत प्रणालियों और सुरक्षा नियमों में खामियां सामने आती हैं।

ताजा मामला दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के एक होटल में लगी भीषण आग का है, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले विवेक विहार में लगी आग में नौ लोगों की जान चली गई थी। इस तरह की घटनाओं ने अवैध निर्माण, प्रशासनिक ढिलाई और कानूनों की अवहेलना की बढ़ती परिपाटी के खतरनाक गठजोड़ को उजागर किया। अग्नि सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक ढांचा कागजों तक सीमित हैं।

मालवीय नगर के जिस होटल में आग लगी, वहां सरकार ने छह कमरों की इजाजत दी थी और 25 कमरे चलाए जा रहे थे। नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा था। सवाल यह है कि कानून एवं प्रवर्तन एजेंसियां क्या कर रही थीं?

दिल्ली के शहरी विस्तार ने एक विरोधाभास पैदा कर दिया है। यहां प्रशासन विकेंद्रित है। कई एजेंसियों—दिल्ली दमकल सेवा, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण, राज्य सरकार आदि—के बीच कामकाज बंटा हुआ है। जब कोई हादसा होता है, तो एक विभाग दूसरे पर आरोप मढ़ कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। प्रशासनिक गतिरोध के कारण जवाबदेही शून्य हो जाती है।

संकरी गलियां, अनधिकृत निर्माण, एक ही प्रवेश एवं निकास द्वार, और अग्नि अनापत्ति प्रमाणपत्र के बिना काम चलाना आम बात है। सख्त कानूनों के बावजूद, जमीनी स्तर पर भवन निर्माताओं और अवैध संचालकों में नियमों के पालन का कोई डर नहीं है। कई इमारतें और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, जो अवैध होती हैं, उनमें अक्सर अग्नि सुरक्षा नियम का ध्यान नहीं रखा जाता। अग्नि सुरक्षा को दरकिनार किया जाना भी गंभीर चिंता का विषय है। इस तरह के हादसे प्रशासनिक और नागरिक लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है। सवाल उठता है कि अनियोजित विस्तार की अंधी दौड़ में जान-माल से समझौता कब तक होता रहेगा?

कानूनों को लगातार दरकिनार बन रहा घातक

नगर निकायों से संबंधित नियम शहरी सुरक्षा की रीढ़ होते हैं। आपातकालीन निकास, विद्युत भार क्षमता, निर्धारित दूरी और अग्नि सुरक्षा मार्गों और भवन निर्माण से संबंधित मानदंड दशकों के अनुभव के आधार पर तैयार किए गए हैं। इनका उल्लंघन इमारतों को मौत के जाल में बदल देता है। सुविधा, प्रतिष्ठा या लाभ की लालसा में कानूनों को दरकिनार करने की प्रवृत्ति हादसों को निमंत्रण देती है।

कायदे से नियमों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। इन्हें ताक पर रखकर इमारत बनाने वालों और रिश्वत लेकर उन्हें मंजूरी देने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। नगर निकायों को नियमों के अनुपालन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाना चाहिए।

शहरी आवास के बदलते स्वरूप भी चिंताजनक हैं। शहर आधुनिक विलासिता तो चाहता है, लेकिन अक्सर सुरक्षित जीवन के मूलभूत सिद्धांतों की उपेक्षा करता है। एक आधुनिक शहर वह नहीं है, जिसमें ऊंची इमारतें, विलासिता, अनाप-शनाप कमाई हो, बल्कि वह है जहां मानव जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

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दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में बुधवार को आग लगने के कारण 21 लोगों की मौत हो गयी। मालवीय नगर स्थित पांच मंजिला होटल ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ में बुधवार सुबह भीषण आग गई। मृतकों में कई विदेशी नागरिक भी हैं जबकि कई लोग बुरी तरह जख्मी हैं। इस हादसे में गुरुग्राम के एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई। मैक्स में परिजन का इलाज कराने के लिए आए हुए ये सभी लोग होटल में नाश्ता करने गए थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक