किसी भी हादसे का सबसे बड़ा सबक यह होना चाहिए कि ऐसे हर इंतजाम किए जाएं, ताकि दोबारा उस तरह की त्रासदी न हो। मगर ऐसा लगता है कि हर जगह लापरवाही एक ऐसी सामान्य आदत के रूप में घुल गई है, जिसके कई बार बेहद दुखद नतीजे सामने आते हैं। राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में एक गोल्फ कोर्स क्लब परिसर में बने जलाशय में बीते हफ्ते जिस तरह तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई, वह एक बार फिर यही दर्शाता है कि लापरवाही और अनदेखी का आलम किस हद तक पसरा हुआ है।
शुरुआती छानबीन के मुताबिक, आठ से दस साल के तीन बच्चे कम ऊंचाई वाली दीवार को पार कर गोल्फ कोर्स परिसर में चले गए और संभवत: वहां के कृत्रिम जलाशय में नहाने लगे, जहां डूबने से उनकी जान चली गई। हैरानी की बात यह है कि सुरक्षा कारणों से परिसर की घेराबंदी के लिए खड़ी की गई दीवार की ऊंचाई बस इतनी है कि कोई आठ-दस वर्ष का बच्चा भी उसे पार कर लेता है। संभव है कि वहां कुछ सुरक्षा गार्डों की भी तैनाती होगी, लेकिन दीवार फांद कर बच्चों को परिसर में प्रवेश करने से रोकने वाला कोई नहीं था। डूबने लायक पानी से भरा जलाशय बना हुआ है, लेकिन अगर कोई उसमें गिर जाए, तो उसके बचाव का वहां कोई इंतजाम नहीं है।
सवाल है कि इस कदर बहुस्तरीय लापरवाही की वजह से अगर बच्चों की जान चली गई, तो इसकी जवाबदेही किस पर होगी। इस मामले में एक त्रासद पक्ष यह भी है कि जुलाई, 2023 में भी वहां ठीक इसी तरह तीन लड़कों की मौत हो गई थी। उस घटना के बावजूद कोई सबक नहीं लिया गया। नतीजतन, एक बार फिर तीन बच्चों की जान चली गई। यह पूछे जाने की जरूरत है कि इस स्तर की व्यापक लापरवाही का कारण क्या है और क्या परिसर का प्रबंधन इसके लिए जिम्मेदार नहीं है!
जलाशयों या जलजमाव की खुली जगहों पर ऐसे हादसों की खबरें अक्सर आती रहती हैं और अमूमन सबमें स्थानीय शासन-तंत्र या फिर संबंधित परिसर के प्रबंधन की लापरवाही ही मुख्य कारण लगती है। मगर न तो ऐसी घटनाओं से सबक लिया जाता है और न ही इसके लिए वास्तविक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है।
