देश की राजधानी होने के नाते यह उम्मीद की जाती है कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था अन्य जगहों के मुकाबले ज्यादा चाक-चौबंद होगी और यहां अपराध को ज्यादा सक्षम तरीके से काबू में किया जाएगा। मगर समय-समय पर आने वाले अपराध के आंकड़ों में यही विडंबना सामने आती है कि दिल्ली में अपराधियों का दुस्साहस उफान पर है और उन पर पूरी तरह लगाम लगा पाना पुलिस-प्रशासन के लिए संभव नहीं हो सका है।

अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि दर्ज हुए आपराधिक मामलों के संदर्भ में देश के अन्य महानगरों की तुलना में दिल्ली की दशा ज्यादा खराब है। सवाल है कि हर स्तर पर कानून-व्यवस्था के पुख्ता होने के दावों के बावजूद स्थिति ऐसी क्यों है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की ‘भारत में अपराध 2024’ रिपोर्ट में यह उजागर हुआ है कि देश के उन्नीस महानगरों की तुलना में दिल्ली में सबसे ज्यादा संज्ञेय अपराधों के मामले दर्ज किए गए हैं।

हालांकि पिछले दो वर्ष में अपराधों में गिरावट देखी गई है, इसके बावजूद एनसीआरबी के आंकड़े यही बताते हैं कि अपराध और अपराधियों पर काबू पाने में यहां की पुलिस को अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, देश के उन्नीस महानगरों में कुल पांच लाख तिरानबे हजार छियानबे मामले दर्ज हुए, जिनमें अकेले दिल्ली की भागीदारी छियालीस फीसद से ज्यादा रही। कहा जा सकता है कि देश के कुल महानगरों में जितने अपराध होते हैं, उनमें से हर दूसरा दिल्ली में दर्ज हुआ।

हालांकि एनसीआरबी की मानें तो एक पहलू यह है कि जिन राज्यों में ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज कराने की सुविधा है, वहां लोग जघन्य से लेकर छोटे-बड़े सभी अपराधों की शिकायतें आसानी से दर्ज करा सकते हैं। जिन राज्यों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां अपराध के आंकड़े तुलनात्मक रूप से कम दर्ज हो सकते हैं। यानी यह स्वीकार किया जा रहा है कि देश के कई हिस्सों में आज भी सुविधा न होने या फिर प्रक्रिया की जटिलता की वजह से बहुत सारे लोग पुलिस के पास अपनी शिकायत दर्ज नहीं कर पाते। अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपराध के कितने पीड़ित इंसाफ का इंतजार करते रह जाते होंगे।

इस लिहाज से देखें तो निश्चित तौर पर दिल्ली में एक तंत्र के काम करने के ढांचे में बेहतरी लाई गई है। मगर सवाल है कि अपराधों की रोकथाम के लिए सरकार और संबंधित महकमे क्या करते हैं। इसके अलावा, वक्त के साथ एक नई जटिलता यह पैदा हुई है कि रोजमर्रा की गतिविधियों के संदर्भ में जैसे-जैसे लोगों की निर्भरता डिजिटल माध्यमों पर बढ़ रही है, अब अपराधियों की नजर उधर भी खिसक रही है।

मसलन, खुद एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराधियों के गिरोह अब डिजिटल संसार में अपनी दखल बढ़ा रहे हैं। साइबर अपराधों में करीब अठारह फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसमें ऑनलाइन ठगी, ‘डिजिटल अरेस्ट’ और भयादोहन जैसे मामले सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं। यह हाल के वर्षों में उपजी नई चुनौती है, जिससे निपटना बेहद जरूरी है।

महानगरों में सुविधाओं से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक सब कुछ अन्य शहरों के मुकाबले ज्यादा बेहतर और दुरुस्त होने की उम्मीद की जाती है। उसमें भी अगर अपराध के मामले में दिल्ली कई महानगरों को पीछे छोड़ रही है, तो यह सोचने का वक्त है कि आखिर यहां सरकार, पुलिस और खुफिया तंत्र तथा अन्य एजेंसियों के बीच किस स्तर पर तालमेल और सक्रियता में कमी है, जिसमें तत्काल सुधार की जरूरत है।