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संपादकीयः सेना की ताकत

चीन से बढ़ते तनाव के बीच लड़ाकू विमानों का यह सौदा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सीमाई इलाकों में भारत अब अपनी सैन्य स्थिति और मजबूर कर रहा है, खासतौर से सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण इलाकों के लिए अब ठोस रणनीति पर काम शुरू हो गया है।

Author Published on: July 4, 2020 1:54 AM
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भारत ने रूस से तैंतीस लड़ाकू विमानों की खरीद का जो फैसला किया है, उससे वायुसेना को निश्चित रूप से मजबूती मिलेगी और सरहदों पर मिल रही चुनौतियों से ज्यादा कारगर तरीके से निपटा जा सकेगा। लद्दाख के पूर्वी हिस्से में भारत-चीन सीमा पर पिछले दो महीने से जिस तरह का तनावपूर्ण घटनाक्रम चल रहा है, उसे देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि भारत अपनी सैन्य ताकत में तेजी से इजाफा करे। यों वायुसेना के आधुनिकीकरण की कोशिशें तो काफी पहले से हो रही हैं, लेकिन हाल की जरूरतों को देखते हुए इसमें किसी भी तरह की देरी की गुंजाईश है नहीं। इसीलिए पिछले महीने रक्षा मंत्री की मास्को यात्रा के दौरान मिग-29 और सुखोई विमानों की खरीद पर जो चर्चा हुई थी, उसे जल्द ही अंतिम रूप भी दे दिया गया और इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए रक्षा खरीद समिति ने गुरुवार को अड़तीस हजार नौ सौ करोड़ रुपए की रक्षा खरीद को हरी झंडी दे दी। इसके तहत वायु सेना, नौ सेना और थल सेना के लिए हथियार खरीदे जाएंगे। पिछले साल फ्रांस से राफेल विमानों की खरीद के बाद यह दूसरी बड़ी रक्षा खरीद है।

चीन से बढ़ते तनाव के बीच लड़ाकू विमानों का यह सौदा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सीमाई इलाकों में भारत अब अपनी सैन्य स्थिति और मजबूर कर रहा है, खासतौर से सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण इलाकों के लिए अब ठोस रणनीति पर काम शुरू हो गया है। यह तो हकीकत है ही कि भारतीय वायु सेना पहले से ही लड़ाकू विमानों की कमी का सामना कर रही है और संकटकाल में लड़ाकू विमानों की कमी देश की सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है। इसलिए सबसे ज्यादा जोर लड़ाकू विमानों की खरीद पर है। ताजा रक्षा सौदे के तहत भारत रूस से इक्कीस मिग-29 और बारह सुखोई-30 विमान खरीदेगा। मिग-29 की खेप तो रूस से ही आएगी, लेकिन सुखोई विमान हिंदुस्तान एअरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में ही तैयार किए जाएंगे। सुखोई विमान के निर्माण के लिए तकनीकी सहयोग को लेकर भारत और रूस के बीच करार है। इसके अलावा पुराने मिग विमानों का भी कायाकल्प करके उन्हें आधुनिक बनाया जाएगा। थल सेना की शक्ति बढ़ाने के लिए रॉकेट लांचर पिनाक और मिसाइलें खरीदने के अलावा रेडियो सॉफ्टवेयर को उन्नत बनाने का काम भी होगा। नौ सेना के लिए भी लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल प्रणाली खरीदी जाएगी।

भारत को सबसे बड़ी और स्थायी चुनौती तो दो पड़ोसियों पाकिस्तान और चीन से ही है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों ही देशों की तरफ से सीमाओं पर जिस तरह का आक्रामक रुख देखने को मिला है, उससे यह तो साफ है कि भारत को कभी भी किसी भी देश से या एक ही वक्त में दोनों तरफ से हमलों का सामना करना पड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञ भी समय-समय पर इस बारे में सचेत करते रहे हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अशांति के बाद चीन ने जिस तरह की मोर्चाबंदी करते हुए सैन्य जमावड़ा बढ़ा दिया है, उसे देखते हुए जरूरी हो गया है कि हमारी वायु सेना अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों से सुसज्जित हो। पिछले साल वायु सेना ने दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू हेलिकॉप्टर- अपाचे एएच-64ई को अपने बेड़े में शामिल किया था। इसके बाद राफेल खरीदे गए। हालांकि भारत अपनी ओर से युद्ध से बचने की नीति पर चलने वाला देश है, लेकिन दुश्मन के हमले का जवाब देने के लिए सेना का मजबूत होना जरूरी है।

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