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संपादकीय: मोर्चे पर मजबूती

भारत-चीन के बीच यह गतिरोध आसानी से खत्म होने वाला नहीं है। भले ही सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर वार्ताएं चल रही हों, या विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच वार्ताएं हुई हों, सीमा पर चीन की सैन्य तैयारियां यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि वह किसी न किसी बहाने भारत को जंग में उलझाना चाहता है।

China, India, Border Dispute, 5gचीनी सैनिकों की एलअसी (LAC) के नजदीक निरंतर गतिविधियां के कारण ,भारत को भी लदाख में सैनिकों की बढ़ी संख्या की तैनाती को जारी रखना पड़ रहा है। (फाइल फोटो-PTI)

पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत ने अब टैंकों और बख्तरबंद वाहनों की तैनाती कर दी है। इस वक्त वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जिस तरह के तनावपूर्ण हालात हैं, उसे देखते हुए अपनी तैयारियों को चाकचौबंद रखना अपरिहार्य हो गया है। भारत के प्रति चीन ने जिस तरह का आक्रामक रुख अपनाया हुआ है, उससे यह अनुमान लगा पाना मुश्किल है कि कब वह भारत पर हमला कर दे।

गलवान घाटी में 15-16 जून की रात और फिर 28-29 अगस्त की रात पैंगोंग के दक्षिणी हिस्से में जिस तरह से चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ और हमले किए, वे उसके रुख को बताने के लिए काफी हैं। पैंगोंग के दक्षिणी हिस्से में ऊंचाई वाले इलाकों में स्थिति मजबूत करने के लिए चीन ने टैंकों का ही सहारा लिया था। ऐसे में अब भारत सतर्क है और वह उसकी चाल को समझ चुका है। इसीलिए सीमा पर चीनी सैनिकों के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए भारतीय सेना हर तरह से मोर्चा मजबूत कर चुकी है। देश की आजादी के बाद के यह पहला मौका है जब लद्दाख क्षेत्र में एलएसी पर भारत को दुश्मन का मुकाबला करने के लिए इतने बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारियां करनी पड़ी हैं।

भारत-चीन के बीच यह गतिरोध आसानी से खत्म होने वाला नहीं है। भले ही सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर वार्ताएं चल रही हों, या विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच वार्ताएं हुई हों, सीमा पर चीन की सैन्य तैयारियां यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि वह किसी न किसी बहाने भारत को जंग में उलझाना चाहता है। इस इलाके में चीन ने करीब पचास हजार सैनिकों की तैनाती के साथ ही टैंक, युद्धक विमान और हथियारों के साथ मोर्चा जमा लिया है।

जाहिर है, वह बड़े ही सुनियोजित तरीके से अनंतकाल तक यहां डटे रहने के मंसूबे पाले हुए है। ऐसे में भारत के सामने इसके अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता कि वह भी सीमा पर हर तरह के हालात से निपटने और दुश्मन सेना को करारा जवाब देने के लिए अपनी पुख्ता सैन्य तैयारियां करे। हालांकि गलवान घाटी की घटना के बाद से ही भारत सतर्क है और मोर्चे पर स्थिति मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। टैंकों से लेकर तोपखाने और गोला-बारूद सहित जरूरी हथियारों को मोर्चे पर पहुंचाया जा चुका है। रफाल विमानों सहित वायुसेना के युद्धक विमान और हेलिकॉप्टरों की तैनाती भी बता रही है कि इस बार चीन को उलझना भारी पड़ सकता है।

सैन्य विशेषज्ञ भी इस पर एकमत हैं कि भारत को अब वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपनी स्थिति मजबूत रखनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि अब इस इलाके में स्थायी रूप से डटे रहना होगा। सीमा सड़क संगठन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा तक जल्द ही पहुंच बनाने के लिए सड़कों का नेटवर्क भी लगभग तैयार कर लिया है, ताकि जवानों को मोर्चे पर तत्काल पहुंचाया जा सके। जवानों को लिए रसद, गर्म कपड़े, जूते, रहने के लिए टैंट और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति को सुनिश्चित कर लिया गया है। हालांकि सोलह हजार फुट की ऊंचाई पर और वह भी शून्य से चालीस-पचास डिग्री नीचे तापमान में लगातार रहना सैनिकों के लिए आसान नहीं है। सेना की ये तैयारियां चीन को इस बात का साफ संदेश है कि अब उसकी किसी भी कार्रवाई का उसे उसी की भाषा में जवाब देने के लिए भारतीय सेना हर पल तैयार है।

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