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संपादकीय: जोखिम की थाली

अक्सर ऐसी खबरें आती रहती हैं, जिनके मुताबिक मरी हुई छिपकली से विषाक्त हो गए भोजन को खाने की वजह से काफी लोग बीमार हो गए। यह ध्यान रखने की बात है कि छिपकली आमतौर पर उन्हीं जगहों को अपना ठिकाना बनाती है, जहां उसके खाने के रूप में दूसरे कीड़े-मकोड़े होते हैं। इस घटना से साफ है कि स्वच्छ भोजन के दावे वाले मशहूर रेस्तरां में भी खाना बनाते समय पर्याप्त सावधानी और स्वच्छता नहीं बरती जाती और रसोई जैसी जगहों को कीड़े-मकोड़ों से मुक्त बनाने में लापरवाही बरती जाती है।

खाने में छिपकली। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दिल्ली के कनाट प्लेस जैसे इलाके के एक मशहूर रेस्तरां के खाने में मरी हुई छिपकली मिलने की घटना ने एक बार फिर इस चिंता को रेखांकित किया है कि जो लोग शौक से या जरूरत से ऐसी जगहों पर खाने जाते हैं, वह कितना जोखिम भरा है! गौरतलब है कि कनाट प्लेस स्थित इस रेस्तरां को विशेष रूप से बेहतरीन दक्षिण भारतीय भोजन या व्यंजनों के लिए जाना जाता है और देश भर में इसकी शृंखला है। इसकी इस खास पहचान की वजह से न केवल दक्षिण भारतीय, बल्कि इस भोजन का स्वाद लेने की चाहत रखने वाले देश के सभी हिस्सों के लोग वहां जाते हैं।

रविवार को दो लोगों ने जब वहां मसाला डोसा खाना शुरू किया तो सांभर के प्लेट में उन्हें मरी हुई छिपकली मिली। फिर उन्होंने उसका वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। इस मसले पर आपत्ति और विरोध जताने के बाद आखिर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। लेकिन इस घटना के बाद अच्छे, पोषक, स्वास्थ्यवर्धक और साफ-सुथरे भोजन मुहैया कराने में अपनी प्रसिद्धि का दावा करने वाले इस रेस्तरां को अब भविष्य में कितना सुरक्षित और भरोसेमंद माना जाएगा?

पुलिस के पास शिकायत दर्ज होने के बाद हो सकता है कि इसे रेस्तरां के प्रबंधकों या रसोई में काम करने वालों की लापरवाही के रूप में देखा जाएगा और कानूनी कार्रवाई का स्वरूप भी शायद इसी पर आधारित होगा। मगर इतना तय है कि जिस ग्राहक की नजर में खाने में मरी हुई छिपकली का यह मामला आया, उसके अलावा भी बहुत सारे लोगों ने उसी सांभर को खाया होगा। कई बार ध्यान नहीं जाने या पता नहीं चलने पर उसका असर सीमित रह जाता है। लेकिन अगर किन्हीं स्थितियों में भोजन ज्यादा विषैला हो जाए और उसे धोखे से कोई व्यक्ति खा ले तो उसकी सेहत को होने वाले नुकसान की भरपाई कई बार संभव नहीं हो पाती।

अक्सर ऐसी खबरें आती रहती हैं, जिनके मुताबिक मरी हुई छिपकली से विषाक्त हो गए भोजन को खाने की वजह से काफी लोग बीमार हो गए। यह ध्यान रखने की बात है कि छिपकली आमतौर पर उन्हीं जगहों को अपना ठिकाना बनाती है, जहां उसके खाने के रूप में दूसरे कीड़े-मकोड़े होते हैं। इस घटना से साफ है कि स्वच्छ भोजन के दावे वाले मशहूर रेस्तरां में भी खाना बनाते समय पर्याप्त सावधानी और स्वच्छता नहीं बरती जाती और रसोई जैसी जगहों को कीड़े-मकोड़ों से मुक्त बनाने में लापरवाही बरती जाती है।

यह ऐसी कोई पहली घटना नहीं है। पिछले साल नागपुर से भी इसी तरह देश भर में शृंखला वाले एक जाने-माने रेस्तरां में भी जो खाना परोसा गया था, उसमें भी मरी हुई छिपकली मिलने की शिकायत सुर्खियों में आई थी। इसके अलावा भी अक्सर ऐसी खबरें आती रहती हैं। ऐसे रेस्तरां या खाने-पीने की मशहूर मानी जाने वाली जगहों पर लोग इस विश्वास के बुनियाद पर खाने जाते हैं कि वहां स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक भोजन मिलेगा।

आमतौर पर ऐसा होता भी है। लेकिन लापरवाही की ऐसी घटनाएं लोगों के बीच घर से बाहर के खाने को लेकर विश्वसनीयता को कम करती हैं और लोग जोखिम को लेकर आशंकित हो जाते हैं। ऐसे में न केवल लोगों के घर से बाहर कभी शौक से तो कभी जरूरत से खाने के भरोसे को चोट पहुंचती है, बल्कि मशहूर माने जाने वाले दूसरे रेस्तरां में जाने को लेकर भी लोग हिचकने लगते हैं। खासतौर पर जिस दौर में हर जगह पर साफ-सफाई बरतने को लेकर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है, उसमें ऐसी घटनाएं बेहद अफसोसजनक हैं।

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