बैंक के भीतर ही जब धोखाधड़ी का रास्ता बन जाए, तो साइबर अपराध पर अंकुश कैसे लगेगा? सुरक्षा एजेंसियों के तमाम दावों के बावजूद साइबर ठगी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अपराधी ऑनलाइन माध्यम से धोखाधड़ी के नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं।
इस संजाल की जड़ें इतनी गहरी हैं कि अपराधियों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में अगर बैंक या किसी अन्य संबंधित महकमे के अधिकारी एवं कर्मचारी भी सांठगांठ में शामिल हों, तो मामला और पेचीदा हो जाता है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के न्यू कोंडली इलाके में पुलिस ने ऐसे ही मामले में एक सहकारी बैंक के उप प्रबंधक को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी कमीशन पर खाते खुलवाने और उनका संचालन करने में मदद करता था। साइबर अपराधी बैंक में किसी और के नाम से इस तरह के खाते खुलवाते हैं और फिर ठगी के जरिए उसमें आई रकम को दूसरे खाते में भेज देते हैं। सवाल है कि जब सरकारी तंत्र में शामिल कर्मी ही इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल हों, तो फिर अपराध पर अंकुश कैसे लग पाएगा?
गौरतलब है कि देश भर में साइबर ठगी के मामले साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं। अपराधी वित्तीय धोखाधड़ी के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय भी गंभीर चिंता जाहिर कर चुका है। ताजा मामला भी तभी पकड़ में आया, जब राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच का मिलान किया गया। दरअसल, देश के कई हिस्सों में दर्ज साइबर ठगी की 159 शिकायतों में यह खाता शामिल पाया गया, जिससे करीब 67 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है।
इस साजिश से पता चलता है कि देश में ऑनलाइन धोखाधड़ी का संजाल कहां तक फैला हुआ है। जांच में सामने आया है कि जिसने यह खाता खुलवाया था, वह कभी उस बैंक की शाखा में गया ही नहीं। जाहिर है कि किसी बैंक कर्मी की मदद के बिना यह संभव नहीं है। मगर सवाल यह भी है कि इस खाते से जब करोड़ों रुपए का लेन-देन हो रहा था, तो दूसरे अधिकारियों ने इसकी जांच की जरूरत क्यों नहीं समझी? ऐसे में जरूरी है कि साइबर ठगी के मामलों में बैंक अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
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बेंगलुरु पुलिस ने मंगलवार को दो ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर एक महिला से पहले दोस्ती की और फिर धमकी देकर उससे सोने के गहने और नकद रकम हड़प लिए। महिला का आरोप था कि इन लोगों ने उससे 85.65 लाख रुपये के सोने के गहने और 20 लाख रुपये नकद ले लिए। बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक पीड़िता केआर पुरम थाना क्षेत्र की रहने वाली है। वह करीब डेढ़ साल से मुख्य आरोपी महेश के संपर्क में थी। दोनों के बीच संपर्क स्नैपचैट के जरिए शुरू हुआ था। शुरू में यह दोस्ती सामान्य लग रही थी, लेकिन धीरे-धीरे यह मानसिक दबाव और ब्लैकमेल तक पहुंच गई। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
