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संपादकीयः बीमारी की मुद्रा

यह संभव है कि कोई व्यक्ति घर लौटने के बाद या कुछ भी खाने के पहले अच्छी तरह से इसलिए हाथ साफ करता है कि उसने बाहर कई ऐसी चीजें पकड़ी या छूई होती हैं, जिनसे उसे संक्रमण होने का खतरा रहता है।

यह संभव है कि कोई व्यक्ति घर लौटने के बाद या कुछ भी खाने के पहले अच्छी तरह से इसलिए हाथ साफ करता है कि उसने बाहर कई ऐसी चीजें पकड़ी या छूई होती हैं, जिनसे उसे संक्रमण होने का खतरा रहता है। लेकिन बहुत कम लोगों को यह अंदाजा होगा कि रुपए गिनते हुए छूने वाले नोट भी किसी बीमारी का वाहक हो सकते हैं। गौरतलब है कि कुछ समय पहले आई काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआइआर) की एक रिपोर्ट के मुताबिक लोगों की जेब में रखे मुद्रा नोटों की वजह से अठहत्तर प्रकार की बीमारियां होने का खतरा होता है। इसी के मद्देनजर व्यापारियों के संगठन कैट यानी कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने मुद्रा नोटों से फैलने वाली बीमारियों के प्रति चिंता जताते हुए वित्त मंत्री को पत्र लिखा है और इसकी जांच कराने के अलावा इससे बचने के उपाय करने का आग्रह किया है। इसमें अध्ययनों के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा गया है कि नोटों में बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया पाए गए हैं। इनसे पेट खराब होने से लेकर तपेदिक और अन्य कई तरह की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। सही है कि व्यापारी समुदाय मुद्रा नोटों का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है। लेकिन अगर नोटों में जीवाणु संबंधी रिपोर्ट सही है तो यह सामान्य उपभोक्ताओं की सेहत के सामने भी बराबर का जोखिम पैदा करेगा।

संक्रमण से होने वाली बीमारियों के मसले पर जागरूकता अभियानों के जरिए लगातार बताया जाता है कि इससे बचने के लिए क्या-क्या करें। खासतौर पर कुछ भी खाने-पीने से पहले हाथ ठीक से साफ करने को लेकर तमाम हिदायतें जारी की जाती हैं, ताकि मौसमी बीमारियों सहित संक्रमणशील रोगों से बचने के लिए यह लोगों के रोजमर्रा के अभ्यास में शामिल हो सके। इसके बावजूद सच यही है कि ज्यादातर लोग इस तरह से संदेशों की अनदेखी करके अपनी तरह से दिनचर्या निबाहते हैं। इसी दौरान बरती गई लापरवाही की वजह से कई बार लोग किसी बीमारी के चपेट में आ जाते हैं। यानी संक्रमण से बचाव के मामूली उपाय करके जिन रोगों से बचा जा सकता था, उसकी अनदेखी की वजह से बहुत सारे लोगों को डॉक्टर और अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। लेकिन एक बड़ी समस्या यह भी है कि कई बार लोगों को यह भी पता नहीं होता कि उन्हें किन-किन चीजों से बचना चाहिए या उनके प्रति सावधानी बरतना चाहिए।

आमतौर पर हर साल विज्ञान पत्रिकाओं में संक्रमणशील लोगों, उनके कारणों और बचाव के इंतजामों पर केंद्रित अध्ययन या रिपोर्टें प्रकाशित होती रहती हैं। लेकिन शायद ही इन रिपोर्टों और उनमें दर्ज चेतावनियों को गंभीरता से लिया जाता है। देश भर में रोजाना किसी न किसी रूप में मुद्रा नोटों के संपर्क में आने वाले लोग शायद ही कभी सोचते हैं कि उनके हाथ में जो नोट हैं, उनमें किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ से आए बैक्टीरिया हो सकते हैं। जागरूकता के अभाव की इसी स्थिति की वजह से बहुत सारे लोग किसी संक्रमणशील बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। शोध के मुताबिक मुद्रा नोट तरह-तरह के कीटाणुओं और बैक्टिरिया के संपर्क में आते हैं, चाहे वह किसी वेटर के कपड़े हों, किसी व्यक्ति की अंगुली, मशीन या गद्दों के नीचे रखे गए हों। अगर किसी संक्रमणशील बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के हाथ से नोट गुजरते हैं तो वे दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकते हैं। मुद्रा नोटों के संपर्क में आने से पूरी तरह बचा नहीं जा सकता। इस स्थिति में लोगों के बीच व्यापक पैमाने पर जागरूकता फैलाने की जरूरत होगी कि वे इन नोटों को गिनते या रखते हुए या फिर उसके बाद किस तरह की सावधानियां बरतें।

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