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बेलगाम अपराध

उत्‍तर प्रदेश में कानून व्‍यवस्‍था की स्थिति संतोषजनक नहीं होने के कारण आए दिन घटनाएं हो रही हैं।

crimeसांकेतिक फोटो।

एक ओर राज्य की सरकार अक्सर यह दावा करे कि उसके शासन में सभी सुरक्षित हैं, कानून-व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त है और दूसरी ओर हर कुछ रोज बाद कोई बड़ी आपराधिक घटना सुर्खियों में हो, तो उसे कैसे देखा जाएगा! उत्तर प्रदेश की स्थिति आजकल यही हो गई लगती है, जहां आए दिन होने वाले अपराध की घटनाओं ने समूचे राज्य में कानून-व्यवस्था पर गहरा सवालिया निशान लगा दिया है।

खासतौर पर महिलाओं और कमजोर तबकों के खिलाफ जैसी आपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे यह सवाल उठता है कि क्या इस तरह की अराजकता फैला कर कुछ लोग एक भय का माहौल बनाना चाहते हैं और क्या सरकार और पुलिस ने ऐसे तत्त्वों के सामने खुद को लाचार मान लिया है! वरना क्या वजह है कि पिछले कुछ समय से लगातार महिलाओं से छेड़छाड़ से लेकर बलात्कार तक के मामले राज्य की खबरों की कमोबेश दिनचर्या में शामिल हो गए लगते हैं। ऐसा लग रहा है कि अपराधियों पर लगाम लगाने में सरकार और उसके संबंधित महकमे पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।

गौरतलब है कि राज्य के हाथरस जिले में एक युवती से छेड़छाड़ का विरोध करने पर उसके पिता की कुछ युवकों ने गोली मार कर हत्या कर दी। दरअसल, करीब ढाई साल पहले कुछ युवकों ने युवती से छेड़छाड़ की थी तो पीड़िता के पिता ने उन पर मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में एक अभियुक्त को पंद्रह दिन की जेल भी हुई थी।

इसके बाद उस मुकदमे को वापस लेने को लेकर आरोपी और उसका साथ देने वालों की ओर से पीड़िता और उसके पिता को लगातार धमकियां मिलने लगीं। इसकी शिकायत पुलिस से की गई। लेकिन जैसा कि आमतौर पर देखा जाता है, पुलिस तब तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है, जब तक कि कोई बड़ी वारदात न हो जाए। सोमवार को जब पीड़िता के पिता अपने खेत में आलू की खुदाई करा रहे थे तब मुख्य आरोपी अपने कुछ साथियों के साथ वहां कार में आया और गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।

इसमें पीड़िता के पिता की जान चली गई। एकबारगी यह घटना किसी ऐसे इलाके में हुई लगती है, जहां सरकार, प्रशासन और पुलिस की उपस्थिति नहीं हो। सवाल है कि अगर खतरनाक धमकी देने की शिकायत पर समय रहते पुलिस ने जरूरी कार्रवाई की होती तो क्या हत्या की इस घटना को रोका नहीं जा सकता था?

विडंबना यह है कि राज्य की सरकार अक्सर यह कहती दिख जाती है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चौकस है और इस दावे के बरक्स सरेआम हत्या और महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही हैं, आए दिन बलात्कार की बर्बरता सुर्खियों में आ रही हैं। आखिर उत्तर प्रदेश में किस तरह के रामराज्य लाने की प्रतिबद्धता का दावा किया जा रहा है!

हालत यह है कि पिछले कुछ समय के दौरान राज्य में बलात्कार की घटनाओं के अलावा पीड़िता की हत्या कर देने और छेड़छाड़ की शिकायत करने पर धमकी देने या फिर मार डालने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ समय पहले हाथरस में ही एक दलित लड़की से बलात्कार की घटना ने तब तूल पकड़ लिया था, जब उसकी मौत के बाद जबरन शव को जला कर मामले को रफा-दफा करने के आरोप पुलिस पर लगे थे।

कहने को महिलाओं की सुरक्षा के मकसद से राज्य में मिशन शक्ति से लेकर कई अन्य कार्यक्रम चलाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि छेड़छाड़, बलात्कार और हत्या जैसे अपराधों के लिहाज से राज्य में हालात काबू से बाहर होते लग रहे हैं।

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