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संपादकीयः बीमारी के ठिकाने

यह जगजाहिर तथ्य है कि इस रोग से बचाव के लिए या इसके मरीजों के इलाज के दौरान सबसे जरूरी पहलू साफ-सफाई सुनिश्चित करना ही है। क्या इन अस्पतालों के प्रबंधन के पास इस मामूली से तथ्य की जानकारी नहीं है? या फिर सब कुछ देखते और जानते-बूझते हुए भी कचरे की अनदेखी की जा रही है?

Author Published on: July 10, 2020 1:20 AM
यह जगजाहिर तथ्य है कि इस रोग से बचाव के लिए या इसके मरीजों के इलाज के दौरान सबसे जरूरी पहलू साफ-सफाई सुनिश्चित करना ही है।

यह अपने आप में एक बेहद अफसोसनाक हालत है कि जिस दौर में साफ-सफाई का ध्यान रखना केवल जरूरी नहीं, अनिवार्य काम के रूप में देखा जा रहा है, उसमें खुद कुछ अस्पतालों में फैली गंदगी हालात को और खतरनाक बना रही है। खासतौर पर जिस अस्पताल को कोरोना के इलाज के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है, वहां पसरी गंदगी अगर इस खतरनाक रोग सहित दूसरी बीमारियों को न्योता दे रही हो तो सवाल उठने लाजिमी हैं। एक खबर के मुताबिक दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल के रसोईघर और शल्य क्रिया इकाई के पास बायोमेडिकल कचरे का अंबार लगा है, जिसमें इस्तेमाल के बाद फेंके गए पीपीई किट से लेकर मास्क, ग्लब्स, सिरिंज और दूसरे कचरे शामिल हैं। पिछले दिनों हुई बारिश में खुले में पड़े कचरे की कई गठरियां फट गईं, जिसे वहां घुस आए आवारा कुत्तों ने और बिखेर दिया। यह इसलिए हैरान करने वाली बात है कि इस अस्पताल को कोरोना संक्रमितों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। दिल्ली के एक अन्य अहम् माने जाने वाले सफदरजंग अस्पताल की स्थिति भी कमोबेश यही है। इन अस्पतालों के परिसर में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में आने वाली सामग्रियां कचरे के ढेर के रूप में पड़ी हैं।

यह जगजाहिर तथ्य है कि इस रोग से बचाव के लिए या इसके मरीजों के इलाज के दौरान सबसे जरूरी पहलू साफ-सफाई सुनिश्चित करना ही है। क्या इन अस्पतालों के प्रबंधन के पास इस मामूली से तथ्य की जानकारी नहीं है? या फिर सब कुछ देखते और जानते-बूझते हुए भी कचरे की अनदेखी की जा रही है? अगर सरकार ने इस तरह के कचरे को उठाने का काम किसी अन्य महकमे, एजेंसी या फिर कंपनी को सौंपा हुआ है तो यह सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है कि समय पर और सही तरीके से जमा हुए कचरे को उठा कर ले जाया जाए और उसका निर्धारित प्रक्रिया के साथ निपटान कराया जाए? अगर संबंधित एजेंसी या कंपनी पैसे या अन्य किसी वजह से अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय अस्पताल परिसर में कचरे के ढेर को खतरनाक बनने की स्थितियां पैदा करने को किस आधार पर टालने लायक समझा गया? साफ है कि यह बहुस्तरीय लापरवाही का मामला है, जो अस्पतालों के परिसर में मौजूद मरीज से लेकर डॉक्टर, सबके लिए बेहद घातक है।

एक ओर कोरोना के संक्रमण को रोकने या खत्म करने के लिए सरकार की ओर चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा जोर आसपास की जगहों से लेकर निजी स्तर सफाई बरतने पर ही दिया जा रहा है। खासतौर पर अस्पतालों में आम साफ-सफाई से आगे आजकल जरूरी रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि कोरोना सहित किसी भी बीमारी के विषाणु या जीवाणु और उसके असर को खत्म किया जा सके। दूसरी ओर कुछ अस्पताल परिसरों की हालत अफसोसनाक हकीकत बयान कर रही है। अफसोस की बात यह है कि न केवल दिल्ली, बल्कि देश के तमाम अस्पतालों के परिसर में गंदगी फैले होने सहित दूसरी कई तरह की अव्यवस्था की शिकायतें आती रहती हैं। जिन अस्पतालों में कोरोना संक्रमित या इसकी आशंका में जांच कराने वाले लोग काफी संख्या में पहुंच रहे हों, वहां उन्हें इस रोग के इलाज के काम आने वाले कचरे के ढेर का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह दावा कैसे किया जा सकता है कि परिसर में जाने वाला संक्रमण से मुक्त कोई व्यक्ति स्वस्थ रह सकेगा और इस खतरनाक रोग की चपेट में नहीं आएगा!

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