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संपादकीयः मनमानी के बराती

यह समझना मुश्किल है कि अगर राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना संक्रमण को रोकने के निर्देश लागू हैं, तो युवक के बाहर से आने के बाद गांव में स्थानीय पंचायत, स्वास्थ्यकर्मियों से लेकर प्रशासन के संबंधित अधिकारियों ने उसकी जांच सुनिश्चित क्यों नहीं करवाई।

Author Published on: July 3, 2020 1:20 AM
प्रशासन ने विवाह समारोह में शामिल हुए लोगों की जांच कराई तो सौ से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित पाए गए।

जिस दौर में कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए देश भर में पूर्णबंदी लागू की गई थी, अब तीन महीने के बाद भी पूरी सावधानी बरतने की अपील की जा रही है, उसमें पटना जिले के एक गांव डीहपाली में जैसी लापरवाही और उसके दुखद अंजाम का उदाहरण सामने आया है, वह हैरान करने वाला है। गौरतलब है कि दिल्ली से सटे गुरुग्राम में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम करने वाला एक युवक इक्कीस मई को अपने वाहन से गांव गया था, क्योंकि अगले महीने उसकी शादी होनी तय हुई थी। घरवालों के मुताबिक उसने अपने घर में एकांतवास भी किया था, हालांकि उसमें कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कोई लक्षण नहीं थे। लेकिन पंद्रह जून को जब विवाह के दूसरे दिन उसकी तबियत खराब हुई और आखिरकार उसकी मौत हो गई, तो इसके बाद उसके कोरोना संक्रमित होने की आशंका जताई जाने लगी। फिर जब किसी सूचना पर प्रशासन ने विवाह समारोह में शामिल हुए लोगों की जांच कराई तो सौ से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। सवाल है कि इतनी बड़ी लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है?

यह समझना मुश्किल है कि अगर राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना संक्रमण को रोकने के निर्देश लागू हैं, तो युवक के बाहर से आने के बाद गांव में स्थानीय पंचायत, स्वास्थ्यकर्मियों से लेकर प्रशासन के संबंधित अधिकारियों ने उसकी जांच सुनिश्चित क्यों नहीं करवाई। लापरवाही का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब पेट दर्द की शिकायत के बाद पटना के एम्स में ले जाने के क्रम में युवक की मौत हो गई, तब भी अस्पताल में मृतक में कोरोना संक्रमण की जांच कराना जरूरी नहीं समझा गया। चूंकि उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, इसलिए यह साफ नहीं हो सका कि युवक कोरोना से संक्रमित था या नहीं। लेकिन अगर एक ही विवाह समारोह में शामिल इतनी बड़ी तादाद में लोगों में संक्रमण पाया गया, तो आखिर यह कहां से फैला? पूर्णबंदी में ढील दिए जाने के साथ ही सरकार की ओर से यह सख्त हिदायत जारी की गई है कि लोग आपस में दूरी बनाए रखें और संक्रमण से बचाव के सारे नियमों का पालन करें। इस क्रम में विवाह समारोहों की इजाजत तो दी गई है, लेकिन इस शर्त के साथ कि समारोह में पचास से ज्यादा अतिथि शामिल नहीं हो सकेंगे। लेकिन डीहपाली में हुए विवाह के दौरान कई स्तरों पर नियमों को ताक पर रखा गया और आयोजित समारोह में अलग-अलग चरण में करीब साढ़े तीन सौ लोग शामिल हुए।

यानी एक ओर देश भर में कोरोना से बचाव के लिए हर स्तर पर सावधानी बरतने की बातें की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई बार घोर अनदेखी भी की जा रही है। बिहार में इसे सामुदायिक संक्रमण का पहला मामला माना जा रहा है और वास्तविक चिंता की बात यही है। लेकिन सवाल है कि कोरोना से बचाव के लिए रोज नए निर्देश जारी करने और सख्ती बरतने के दावे करने वाली सरकार और उसके संबंधित महकमे नियमों पर अमल के लिए क्या कर रहे हैं! यह लापरवाही न केवल आम लोग बरत रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक पैमाने पर भी निगरानी रखना जरूरी नहीं समझा जा रहा है। राजस्थान में ऐसे ही एक विवाह समारोह के आयोजन में नियमों के उल्लंघन पर संबंधित परिवार को छह लाख रुपए जुर्माना किया गया था। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि देश में आज भी कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और अगर लापरवाही की इंतहा इसी तरह जारी रही तो इसके त्रासद नतीजे शायद सबको झेलने पड़ सकते हैं।

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