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संपादकीय: कोरोना का कहर

हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई शहरों में सन्नाटा पसरा पड़ा है और लोगों को घरों में कैद कर दिया गया है। चीन में अब तक सोलह सौ लोगों के मरने की खबर है। हालांकि अपुष्ट आंकड़े तो इससे कई गुना हैं। आने वाले दिनों में संक्रमित लोगों की तादाद एक लाख को पार कर जाए तो कोई बड़ी बात नहीं।

Author Published on: February 17, 2020 1:17 AM
खतरनाक होता जा रहा है कोरोना वायरस। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

चीन में कोरोना वायरस का कहर थमता नजर नहीं आ रहा है। पूरब से पश्चिम तक इस बात को लेकर चिंता बनी हुई है कि कहीं यह वायरस पूरी दुनिया को चपेट में न ले ले। यह डर निराधार इसलिए नहीं है, क्योंकि कुछ पश्चिमी देशों में भी कोरोना से संक्रमित लोग पाए गए। फ्रांस में कोरोना से संक्रमित एक व्यक्ति की मौत हो गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे वैश्विक आपदा बता कर इसके खतरे से आगाह कर चुका है। चीन के हालात के बारे में अभी कोई कयास इसलिए भी नहीं लगाए जा सकते कि जो कुछ पता चल रहा है, वह सिर्फ सरकारी स्रोतों के जरिए ही सामने आ रहा है। वुहान सहित कई शहर इस वायरस की जद में हैं।

हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई शहरों में सन्नाटा पसरा पड़ा है और लोगों को घरों में कैद कर दिया गया है। चीन में अब तक सोलह सौ लोगों के मरने की खबर है। हालांकि अपुष्ट आंकड़े तो इससे कई गुना हैं। आने वाले दिनों में संक्रमित लोगों की तादाद एक लाख को पार कर जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। दुनिया के सामने समस्या यह है कि इस वायरस संक्रमण का कोई इलाज नहीं खोजा जा सका है। इसलिए संक्रमित रोगियों की तादाद बढ़ती जा रही है और जो लोग चीन से अपने-अपने देश लौट रहे हैं, वे इस रोग को अपने साथ ला रहे हैं। चीन से यह बीमारी ज्यादातर एशियाई देशों में पहुंच चुकी है। दो दिन पहले जापान में कोरोना से संक्रमित एक महिला की मौत हो गई। हांगकांग से जापान के याकोहामा बंदरगाह पहुंचे एक जापानी क्रूज में भी दो सौ से ज्यादा कोरोना संक्रमित लोगों की पहचान की गई है।

इस जहाज में कई भारतीय भी हैं। पर इन लोगों को जहाज से निकालना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। ऐसे में सवाल है कि लोगों का इलाज कैसे हो। अभी बड़ा संकट यह है कि कोरोना वायरस के डर से ज्यादातर देशों ने अपने यहां चीन से लौटने वालों पर पाबंदी लगा दी है। दूसरे एशियाई देशों से भी लोगों को गहन जांच के बाद ही देश में प्रवेश करने दिया जा रहा है। ऐसे में समस्या उन लोगों की है जो चीन में फंस गए हैं और उन्हें उनके देश नहीं लौटने दिया जा रहा है। हालांकि भारत ने इस संकट की भनक लगते ही अपने साढ़े छह सौ से ज्यादा नागरिकों को सकुशल चीन से निकाल लिया था, पर अब भी कई छात्र अभी चीन में फंसे हैं। इनकी भी सुरक्षित वापसी का इंतजार है।

कोरोना वायरस से बचाव के लिए भारत जिस तरह वक्त पर चेत गया और अस्पतालों को सतर्क किया गया है, उससे इतना तो हुआ है कि दूसरे देशों से आने वाले जो लोग इस संक्रमण से ग्रस्त पाए जा रहे हैं, उन्हें जरूरी चिकित्सा मुहैया कराई जा रही है। इसी का नतीजा है कि कोरोना संक्रमित कुछ मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल गया और वे ठीक होकर घर लौट गए। पिछले दो दशकों में वायरस-जनित बीमारियां अचानक और तेजी से फैलने की घटनाएं ज्यादा सामने आई हैं। पर कोरोना का कहर इनसे कहीं ज्यादा घातक साबित हुआ है। इस तरह की वायरस-जनित बीमारियों का तत्काल कोई तोड़ निकालना चिकित्सा विज्ञान के सामने भी बड़ी चुनौती बन गया है।

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