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संपादकीय: संकल्प और चुनौती

पिछले तीन दिनों में देश में कोरोना के मरीजों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी है, उससे अब यह आशंका गहराती जा रही है कि कहीं हालात विस्फोटक रूप न ले लें। कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या चार सौ के पार चली गई है। इस खतरे को देखते हुए ही देश के ज्यादातर राज्यों ने अपने यहां लॉक डाउन यानी पूर्ण बंदी जैसा बड़ा और सख्त उठाया है।

Author Published on: March 24, 2020 4:30 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

कोरोना महामारी से निपटने के लिए देश के ज्यादातर हिस्सों में की गई पूर्ण बंदी को जिस तरह से लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, वह गंभीर चिंता का विषय है। इसीलिए सोमवार को प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों से कहा कि वे अपने यहां पूर्ण बंदी को सख्ती से लागू कराएं, ताकि लोग घरों से बाहर न निकलें। इसीलिए चंडीगढ़, पंजाब और महाराष्ट्र ने अपने यहां कर्फ्यू लगा दिया है। इस वक्त देश जिस विकट परिस्थति से गुजर रहा है और केंद्र व राज्य सरकारें, स्वास्थ्यकर्मी, पुलिस के जवान स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे जुटे हैं, वह सराहनीय है। लेकिन सरकार की यह सारी कवायद तभी सफल हो पाएगी जब आमजन का इसमें पूरा सहयोग मिलेगा। सोमवार को कई जगह ऐसा देखने में आया कि पूर्ण बंदी के बाद भी लोग सड़कों पर निकले। जबकि रविवार को देशभर में लोगों ने ‘जनता कर्फ्यू’ को कामयाब बनाते हुए यह संदेश दिया था कि कोरोना को हराने के लिए वह सरकार के साथ हैं।

पिछले तीन दिनों में देश में कोरोना के मरीजों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी है, उससे अब यह आशंका गहराती जा रही है कि कहीं हालात विस्फोटक रूप न ले लें। कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या चार सौ के पार चली गई है। इस खतरे को देखते हुए ही देश के ज्यादातर राज्यों ने अपने यहां लॉक डाउन यानी पूर्ण बंदी जैसा बड़ा और सख्त उठाया है। 31 मार्च तक देशभर में रेल सेवाएं, अंतरराज्यीय परिवहन सेवाएं, महानगरों में मेट्रो रेल सेवाएं और मुंबई की लोकल ट्रेन सेवा पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। घरेलू उड़ानें आज रात से बंद हो जाएंगी।

वास्तविकता यह है कि अब जिस तरह के हालात बन गए हैं, उससे सरकार चिंतित है और लोग भयभीत। इस वक्त सबसे पहली और बड़ी चुनौती वायरस के फैलाव को रोकने की है। इसीलिए चीन और इटली जैसे देशों से सबक लेते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने पूर्ण बंदी जैसा बड़ा कदम उठाने का साहस दिखाया। दूसरी बड़ी समस्या है कोरोना संदिग्धों की पहचान। यह तो साफ हो चुका है कि पिछले दो महीनों में जो लोग चीन और यूरोप के देशों से लौटे हैं, उन्हीं में से कुछ या कई लोगों के साथ यह वायरस भारत पहुंचा और फिर फैलता गया। अब उन लोगों का पता लगाया जा रहा है जो पिछले दो महीने में कोरोना प्रभावित देशों से भारत आए हैं। यह एक मुश्किल काम है। पहले ऐसे लोगों का पता लगाना और फिर यह देखना कि ऐसे लोग कितनों के संपर्क में आए होंगे, उनकी छानबीन करना। यह काम तभी संभव हो पाएगा, जब लोग सरकार के प्रयासों में पूरा सहयोग करेंगे।

पूर्ण बंदी जैसे कदम की घोषणा अचानक होने से लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है। ऐसा होना स्वाभाविक भी है। लेकिन जिस तेजी से हालात बिगड़ रहे हैं, उसे देखते हुए कठोर कदम उठाने और उन पर सख्ती से अमल भी जरूरी है। इस वक्त दुनिया के पैंतीस देशों में पूर्ण बंदी जैसा कदम उठाया गया है। ब्रिटेन ने लोगों से बारह हफ्तों तक घरों में रहने को कहा है। दुनिया के कई देशों ने तो इस समस्या से निपटने के लिए आर्थिक पैकेज तक घोषित कर दिए हैं। पर जो हो, इस वक्त सबसे जरूरी है बीमारी को फैलने से रोकना। यही इससे बचाव का सबसे बड़ा उपाय भी है। बिना जनसहयोग के कोरोना पर काबू पाना संभव नहीं होगा।

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