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संपादकीय: संकट और बचाव

कोरोना को लेकर हर स्तर पर लोगों को जागरूकता बनाने के भी प्रयास हो रहे हैं ताकि इस बीमारी को लेकर लोगों में कोई भ्रम न पैदा हो, कोई खौफ न फैले। लेकिन दुख और हैरानी की बात है कि ऐसे वक्त में भी हमारे नेता बचकानी और बेतुकी बातें करने से बाज नहीं आ रहे।

कोरोना वायरसमुंबई के कस्तूरबा अस्पताल के वार्ड 9 के बाहर विदेश से आए लोग जांच के लिए कतार में लगे रहे। (एक्सप्रेस फोटो: गणेश शिरसेकर)

भारत में कोरोना संक्रमण से दो लोगों की मौत और कुछ नए मरीजों का सामने आना बता रहा है कि बचाव के तमाम उपायों के बावजूद देश में यह महामारी फैल रही है। भले बड़े पैमाने पर संक्रमण के मामले सामने न आए हों, लेकिन रोजाना जिस तरह से नए मरीज सामने आ रहे हैं, वह चिंता का विषय है। ज्यादातर राज्यों में स्कूल-कॉलेज, सिनेमाघर, मॉल आदि बंद कर दिए गए हैं। ऐहतियात के तौर पर लोगों को दफ्तर के बजाय घर से काम करने को कहा गया है। सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए कोरोना संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है। हालात बेकाबू न हों, इसके लिए हर स्तर पर हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। अभी तक कोरोना संक्रमण के जितने मामले सामने आए हैं, उनसे यह साबित हो चुका है कि यह संक्रमण संपर्क के जरिए ही फैल रहा है। ज्यादातर कोरोना पीड़ित वही लोग हैं जो विदेश यात्रा से लौटे हैं और यहां जो उनके संपर्क में आया, उसे यह संक्रमण लगा।

लेकिन अब एक नई समस्या यह सामने आ रही है कि कुछ कोरोना संदिग्ध और संक्रमित अस्पतालों से चुपचाप निकल जा रहे हैं। नागपुर के अस्पताल से चार संदिग्ध भाग निकले। इसी तरह केरल में एक संक्रमित मरीज अस्पताल से खिसक लिया। हालांकि पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे खोज निकाला। अल्लपुझा के सरकारी मेडिकल कालेज में दाखिल एक अमेरिकी दंपति भी धोखा दे निकल गया, जिसे कोच्चि हवाई अड्डे पर पकड़ लिया गया। सवाल है कि क्या कोरोना संक्रमित मरीजों और संदिग्धों की कोई निगरानी नहीं हो रही? क्या अस्पतालों में इन्हें आम मरीजों की तरह ही लिया जा रहा है? इस वक्त जिस तरह के हालात हैं, उसमें तो ऐसे मरीजों की खासी निगरानी और सुरक्षा होनी चाहिए। बीमारी न फैले, इसके लिए अल्पतालों में विशेषतौर पर अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं। यहां से किसी मरीज का निकल जाना गंभीर बात है।

कोरोना को लेकर हर स्तर पर लोगों को जागरूकता बनाने के भी प्रयास हो रहे हैं ताकि इस बीमारी को लेकर लोगों में कोई भ्रम न पैदा हो, कोई खौफ न फैले। लेकिन दुख और हैरानी की बात है कि ऐसे वक्त में भी हमारे नेता बचकानी और बेतुकी बातें करने से बाज नहीं आ रहे। हरियाणा सरकार के एक मंत्री ने यह सुझाव दे डाला कि कोरोना से बचने के लिए शाकाहारी बनें, तो कोई योग करने और गरम पानी पीने पर जोर दे रहा है। जबकि हकीकत यह है कि शाकाहार, योग कोरोना संक्रमण से बचाव का कोई उपाय नहीं हैं। सभी डॉक्टर हाथ धोने, भीड़ वाली जगहों पर मास्क लगाने और खांसी-जुकाम वाले मरीजों से एक मीटर की दूरी बनाए रखने जैसे उपायों पर जोर दे रहे हैं जो इस संक्रमण से बचाव के बुनियादी तरीके हैं। जब ऐसी महामारी फैलती है तो लोग घबरा जाते हैं और अपने स्तर पर ऐसे उपाय करने लगते हैं जो उन्हें संकट में डाल सकते हैं। कोरोना से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि डॉक्टर इससे बचाव के जो तरीके बता रहे हैं, उन्हें नजरअंदाज न किया जाए।

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