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संपादकीय: लापरवाही का संक्रमण

जब चरणबद्ध तरीके से बंदी हटाई गई तो बार-बार लोगों से अपील की गई कि उचित दूरी बनाए रखें, हाथ धोते रहें, मुंह ढंका रखें। जब तक इसका टीका नहीं आ जाता, तब तक किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। प्रधानमंत्री ने भी बार-बार लोगों से सावधानी बरतने की अपील की। मगर हकीकत यह है कि लोगों ने बंदी खुलने का मतलब यह मान लिया कि कोरोना का खतरा टल गया है। जगह-जगह भीड़भाड़ लगाना शुरू कर दिया, बिना मुंह ढंके घूमने-फिरने लगे।

coronavirus, bihar electionतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (रॉयटर्स)

दिल्ली में कोरोना संक्रमण के बढ़ते आंकड़ों ने स्वाभाविक ही भय और चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को संक्रमितों की संख्या सात हजार के पार और इसकी वजह से मरने वालों की संख्या चौंसठ तक पहुंच गई। यह दिल्ली में अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। इससे पार पाने के लिए सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे तभी घरों से बाहर निकलें, जब बहुत जरूरी हो। घरों के खिड़की, दरवाजे बंद रखें। यह एक प्रकार से अघोषित बंदी जैसी ही अपील है।

दिल्ली में संक्रमण के तेजी से बढ़ने की कुछ वजहें साफ हैं। एक तो यह कि कारोबारी गतिविधियां खुलने से बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़भाड़ बढ़ने लगी है। जो प्रवासी मजदूर अपने गांव-घर चले गए थे, वे भी कारखाने वगैरह खुलने से वापस लौटने लगे हैं। बंदी खुलने के शुरुआती दिनों में तो बाहर से आने वालों की जांच की जाती रही, ताकि उनकी वजह से दिल्ली में संक्रमण दुबारा न फैलने पाए। मगर फिर शिथिलता बरती जाने लगी। फिर सर्दी शुरू होने के साथ मौसम में नमी लौटी और वायुमंडल पृथ्वी की सतह के करीब सघन होने लगा, तभी पड़ोसी राज्यों में पराली जलाई जाने लगी, जिससे हवा में प्रदूषण बढ़ गया। इस प्रदूषण में कोरोना के विषाणु भी पांव पसारने लगे।

मगर इसकी बड़ी वजह लापरवाही भी रही। जब चरणबद्ध तरीके से बंदी हटाई गई तो बार-बार लोगों से अपील की गई कि उचित दूरी बनाए रखें, हाथ धोते रहें, मुंह ढंका रखें। जब तक इसका टीका नहीं आ जाता, तब तक किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। प्रधानमंत्री ने भी बार-बार लोगों से सावधानी बरतने की अपील की। मगर हकीकत यह है कि लोगों ने बंदी खुलने का मतलब यह मान लिया कि कोरोना का खतरा टल गया है। जगह-जगह भीड़भाड़ लगाना शुरू कर दिया, बिना मुंह ढंके घूमने-फिरने लगे।

दशहरे के साथ ही त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है और दिवाली की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो जाती हैं। इस मौसम में बाजारों में अपेक्षया भीड़भाड़ कुछ अधिक रहती है। चूंकि वस्त्र, बिजली के सामान, खिलौने आदि जैसी कई व्यावसायिक गतिविधियां दिल्ली के थोक बाजारों पर निर्भर हैं, आसपास के राज्यों से कारोबारियों का आवागमन बढ़ जाता है। घरों की रंगाई-पुताई करने वाले मजदूरों-कारीगरों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में अगर बिना नाक-मुंह ढंके और उचित दूरी का ध्यान रखे लोग आपस में मिलेंगे-जुलेंगे तो संक्रमण का खतरा स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा। वही दिल्ली में हुआ भी है।

जिस समय पूरे देश में कोरोना संक्रमण तेज गति से बढ़ रहा था, दिल्ली सरकार ने जरूरी सावधानी बरतते हुए जांचों में तेजी लाने, इलाज का इंतजाम करने में सराहनीय काम किया। उसका नतीजा भी दिखा कि बहुत तेजी से संक्रमण पर काबू पाया जा सका। मगर फिर दिल्ली सरकार खुद ही शिथिल हो गई और लोगों से अपील की गई कि वे नाहक भयभीत न हों, घर पर रह कर भी कोरोना संक्रमण का इलाज संभव है।

इससे भी लोगों में जरूरी सावधानी बरतने के मामले में कुछ लापरवाही आई। इस वक्त दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। दिवाली नजदीक है और पिछले अनुभवों को देखते हुए उसके बाद प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका है। इसलिए इस वक्त दिल्ली सरकार से कुछ अधिक सख्त और व्यावहारिक कदम उठाने की अपेक्षा की जाती है।

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