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संपादकीय: लापरवाही का संक्रमण

अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत दुनिया में तीसरा देश है जहां कोरोना का कहर सबसे ज्यादा बरपा है। इस साल तीस जनवरी को पहला मामला सामने आया था और आठ महीने में यह आंकड़ा तिरसठ लाख को पार कर गया। सबसे ज्यादा चिंताजनक तो यह है कि छब्बीस लाख से ज्यादा मामले सिर्फ सितबंर महीने में आए।

coronavirus indian economy narendra modiदेश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। (एक्सप्रेस फाइल पोटो)

भारत में कोरोना संक्रमण के प्रसार को लेकर किए जा रहे अध्ययन बता रहे हैं कि अगर लोगों और सरकारों के स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई होती और बचाव के उपायों को पूरी तरह से अपनाया होता, तो हालात इतने ज्यादा नहीं बिगड़ते। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में किए गए एक विशेष अध्ययन से पता चला कि महज आठ फीसद लोगों ने साठ फीसद से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर डाला। दोनों राज्यों में पौने छह लाख संक्रमितों पर यह अध्ययन किया गया जो करीब पचासी हजार पुष्ट मामलों के संपर्क में आए थे।

जाहिर है, संक्रमण की शृंखला काफी तेजी से बढ़ती गई। चौंकाने वाली बात यह है कि संक्रमण के ऐसे सबसे ज्यादा मामले बच्चों में देखने को मिले, जिनमें नवजातों से लेकर चौदह साल तक के बच्चे थे। पैंसठ साल से अधिक उम्र वाले लोगों में भी संक्रमण का फैलाव इसी तरह हुआ। इसमें कोई संदेह नहीं कि अगर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की तरह और राज्यों में भी संक्रमण के फैलाव को लेकर अध्ययन कराया जाए तो नतीजे लापरवाही की ही कहानी कहते मिलेंगे।

अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत दुनिया में तीसरा देश है जहां कोरोना का कहर सबसे ज्यादा बरपा है। इस साल तीस जनवरी को पहला मामला सामने आया था और आठ महीने में यह आंकड़ा तिरसठ लाख को पार कर गया। सबसे ज्यादा चिंताजनक तो यह है कि छब्बीस लाख से ज्यादा मामले सिर्फ सितबंर महीने में आए। यह संख्या अब तक कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या का इकतालीस फीसद है।

हालांकि इसका बड़ा कारण जांच भी रही है। शुरू में भारत के पास जांच के लिए पर्याप्त उपकरण और प्रयोगशालाएं नहीं थीं, लेकिन अब रोजाना लाखों लोगों की जांच हो रही है। ऐसे में संक्रमितों का पता लगना और उन्हें समय पर समुचित इलाज मिलना आसान हो गया है। जहां तक कोरोना से होने वाली मौतों का सवाल है तो अब यह आंकड़ा एक लाख के करीब पहुंचने को है और इसमें सितंबर में ही सबसे ज्यादा तैंतीस हजार तीन सौ नब्बे मौतें हुर्इं, जो अब तक संक्रमण से हुई मौतों का करीब चौंतीस फीसद है। लेकिन राहत की बात यह है कि भारत में संक्रमण से उबरने वालों की दर भी निरतंर बढ़ रही है।

अगर सितंबर में संक्रमण से होने वाली मौतों का सर्वाधिक आंकड़ा देखने को मिला, तो दूसरी ओर सबसे ज्यादा लोग भी इसी महीने में ठीक हुए। दुनियाभर में कोरोना महामारी पर करीबी से नजर रखने वाली अमेरिका की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की ताजा रिपोर्ट बता रही है कि भारत दुनिया में पहला देश है जहां लोग संक्रमण से सबसे तेजी से उबर रहे हैं। इसके बाद ब्रजील और अमेरिका हैं।

आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में किया गया अध्ययन इस बात की ओर भी इशारा करता है कि हम चाहें तो संक्रमण को फैलने से अभी भी रोक सकते हैं। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि संक्रमितों को लेकर किसी भी स्तर पर कहीं कोई लापरवाही नहीं बरती जाए। पिछले कुछ महीनों में अस्पतालों से संक्रमितों के भाग निकलने, तमाम प्रतिबंधों के बावजूद लोगों द्वारा बचाव संबंधी उपायों का पालन न करने जैसी अनगिनत घटनाएं सामने आती रही हैं।

अब पूर्णबंदी खत्म हो जाने के बाद लोग भी निश्चिंत और लापरवाह हो चले हैं। लग रहा है जैसे महामारी अब कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। हाल में स्वास्थ्य मंत्री को भी यह कहने को मजबूर होना पड़ा कि लोगों की लापरवाही से संक्रमण ज्यादा फैला। इसलिए अगर हमें कोरोना से बचना है तो मास्क और सुरक्षित दूरी जैसे उपायों को तो अपनाना ही होगा।

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