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संपादकीय : गहराता संकट

कोरोना की जब तक कोई इलाज नहीं खोज लिया जाता, तब तक बचाव के तरीके ही इससे हमें बचा सकते हैं। भारत के सामने इस वक्त सबसे बड़ा संकट ऐसे लोगों की पहचान करना है जो पिछले दो महीनों में दूसरे देशों खासतौर से कोरोना प्रभावित देशों से लौटे हैं।

Coronavirus LIVE Updates: दुनिया के 173 देशों में कोरोनावायरस के 2 लाख से ज्यादा मामले सामने आए। (सोर्स- सोशल मीडिया)

भारत में कोरोना के मामले अब जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, वे हालात की गंभीरता को बताने के लिए काफी हैं। देश का शायद ही कोई राज्य ऐसा बचा होगा जहां से कोरोना संक्रमित व्यक्ति के मिलने की खबर न आ रही हो। कश्मीर से लेकर केरल तक और गुजरात से पश्चिम बंगाल और असम तक में कोरोना संक्रमित मरीजों का बढ़ता ग्राफ चिंता पैदा करता है। सबसे ज्यादा खराब हालात तो महाराष्ट्र में है जहां संक्रमित लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है।

सरकार लोगों जागरूक कर रही है, मीडिया के माध्यम से जानकारियां दे रही है, हाथ धोने से लेकर मास्क पहनने जैसी अपील कर रही है, इसके बावजूद लोग लापरवाही बरत रहे हैं और इसका सीधा असर यह हो रहा है कि महामारी को फैलने से रोकने के जरूरी कदम बेकार साबित हो रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह हो गई है कि जो लोग या जिनके परिजन विदेश से लौटे हैं, वे इस बात को छिपा रहे हैं, ताकि उन्हें पकड़ न लिया जाए।

इसमें कोई संदेह नहीं कि कोरोना को फैलने से रोका जा सकता है। लेकिन जब बचाव के उपाय नहीं किए जाएंगे और लापरवाही बरती जाएगी तो यह वायरस दूसरे लोगों को अपनी चपेट में ले लेगा, यह समझने की जरूरत है। बॉलीवुड गायिका कनिका कपूर ने जिस तरह लंदन से लखनऊ लौटने की जानकारी छिपाई और इसके बाद वह लगातार कार्यक्रम देती रहीं, उसका नतीजा यह हुआ कि बड़ी संख्या में लोग इस संक्रमण के संदेह के घेरे में आ गए।

कनिका की इस लापरवाही से कितने लोगों तक यह संक्रमण पहुंचा होगा, इसका पता तो जांच के बाद ही चलेगा। कनिका के कार्यक्रमों में पहुंचने वाले सांसदों के जरिए इस वायरस के संसद तक पहुंच का खतरा पैदा हो गया। कनिका लंदन से मुंबई आने के बाद अगले दिन 11 मार्च को लखनऊ लौटी थीं, पर हवाई अड्डे पर उनकी जांच नहीं हुई और फिर उन्होंने निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन भी नहीं किया। नतीजा सबके सामने है।

इसी तरह पश्चिम बंगाल में एक महिला अधिकारी विदेश से लौटे अपने बेटे को सचिवालय ले गईं और वह लड़का कुछ दिन पार्टियां भी करता रहा। महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एक दंपति ने विदेश से लौटने की अपनी जानकारी दबाए रखी। सवाल है कि जो लोग समझदार हैं और जान रहे हैं कि बीमारी फैलने का कारण लोगों का एक दूसरे के संपर्क में आना है, वे भी इसके प्रति घोर लापरवाही बरत रहे हैं। यह बड़ा सामाजिक अपराध है।

कोरोना की जब तक कोई इलाज नहीं खोज लिया जाता, तब तक बचाव के तरीके ही इससे हमें बचा सकते हैं। भारत के सामने इस वक्त सबसे बड़ा संकट ऐसे लोगों की पहचान करना है जो पिछले दो महीनों में दूसरे देशों खासतौर से कोरोना प्रभावित देशों से लौटे हैं। राजस्थान सहित कुछ राज्यों में पर्यटकों के जरिए ही यह बीमारी फैली। विदेशी पर्यटक जितने लोगों के संपर्क में आए होंगे, वे भी एक तरह से संदिग्ध ही हैं और जब तक जांच नहीं हो जाती तब तक कुछ भी कह पाना मुश्किल है।

सरकार देर से चेती। चीन में जब कोरोना का विस्फोट हुआ था, तभी से अगर देश में आने वाले हर विदेशी या भारतीय की जांच होती तो इसे काफी हद तक रोका जा सकता था। अब जरूरत इस बात की है कि ऐसे आयोजनों पर रोक लगनी चाहिए जहां लोगों का जमावड़ा हो और इसमें शामिल होने वाले लोगों को भी यह सोचना होगा।

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