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संपादकीय: कोरोना का शिकंजा

इस बात को लेकर अभी संशय ही बना हुआ है कि क्या भारत में संक्रमण सामुदायिक प्रसार का रूप ले चुका है। विशेषज्ञों में भी इस बात को लेकर सहमति नहीं है। पर नए संक्रमितों की बढ़ती संख्या कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा तो करती है कि भले पूरे देश में नहीं, लेकिन कुछ राज्यों में तो हालात सामुदायिक प्रसार का रूप ले चुके हैं।

Coronavirus covid19 corona death tollदेश में कोरोना वायरस का संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। (रायटर्स)

देश में कोरोना संक्रमितों की लगातार बढ़ती तादाद बता रही है कि हम महामारी के संकट से उबरने के बजाय इसमें घिरते जा रहे हैं। भारत में कोरोना संक्रमितों की तादाद पच्चीस लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि नए संक्रमितों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। एक दिन में सत्तर हजार मामलों का मिलना कहीं न कहीं इस बात की पुष्टि तो करता है कि कोरोना संक्रमण व्यापक स्तर पर पैर पसार चुका है। ऐसे में आने वाले कुछ दिनों में यह और गंभीर रूप धारण कर ले और संक्रमितों की संख्या एक लाख रोजाना पहुंच जाए, तो हैरानी की बात नहीं। वैसे भी अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत दुनिया का तीसरा देश बन चुका है, जहां हालात बेकाबू हैं।

हालांकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में भी निरंतर सुधार दिख रहा है और यह सुधार दर सत्तर फीसद के करीब है। मृत्युदर में कमी आई है। लेकिन संक्रमितों की संख्या को बढ़ने से रोकना कहीं ज्यादा जरूरी है, जिसमें अभी तक हमें कामयाबी नहीं मिली है। जहां तक जांच का दायरा बढ़ाने की बात की बात है, अब आठ लाख से ज्यादा जांच रोजाना हो रही हैं। जांच में सक्रियता का ही नतीजा है कि संक्रमितों का पता लग रहा है।

इस बात को लेकर अभी संशय ही बना हुआ है कि क्या भारत में संक्रमण सामुदायिक प्रसार का रूप ले चुका है। विशेषज्ञों में भी इस बात को लेकर सहमति नहीं है। पर नए संक्रमितों की बढ़ती संख्या कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा तो करती है कि भले पूरे देश में नहीं, लेकिन कुछ राज्यों में तो हालात सामुदायिक प्रसार का रूप ले चुके हैं। कोरोना की मार देश के दस राज्यों में ही ज्यादा है, जिनमें महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं।

कोरोना के सक्रिय मामलों में अस्सी फीसद और महामारी से अब तक मारे जा चुके बयासी फीसद लोग इन्हीं राज्यों के हैं। इसीलिए हाल में प्रधानमंत्री ने इन राज्यों के मुख्मंत्रियों के साथ बैठक में सबसे ज्यादा जोर जांच पर दिया है। जितनी ज्यादा जांच होगी, संक्रमितों का पता चलेगा और उनका इलाज शुरू हो सकेगा। साथ ही, संक्रमितों के संपर्क में आने वालों का पता लगा कर उनकी भी जांच हो सकेगी और इस तरह संक्रमण को फैलने से रोका जा सकेगा।

अभी एक बड़ी चुनौती जांच की विश्वसनीयता को लेकर भी बनी हुई है। ज्यादातर मामलों में देखा जा रहा है कि एंटीजन जांच के सही परिणाम नहीं आ रहे हैं। जिनमें कोरोना संक्रमण नहीं है, वे भी जांच में संक्रमित पाए जा रहे हैं और जो संक्रमित हैं, उनका भी जांच नतीजा गलत आ रहा है। ऐसे में संक्रमित लोग दूसरों के लिए खतरा बन रहे हैं।

इससे लोगों में खौफ और पैदा हो रहा है। जहां तक सवाल है आरटी-पीसीआर जांच का, जो सबसे प्रामाणिक और महंगी जांच है, वह आर्थिक संकट के कारण राज्यों के लिए संभव नहीं हो पा रही है। इस पर आने वाले खर्च को लेकर मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी बात रख भी चुके हैं। मौजूदा हालात में इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि जब तक कोरोना का कारगर इलाज न आ जाए, तब तक मास्क, सुरक्षित दूरी और संक्रमितों के एकांतवास जैसे उपायों से ही हम अपने को बचा सकते हैं।

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