किसी खास किस्म के मांझे से दूसरों की पतंग काटने की लोगों के भीतर कैसी भूख है कि यह राह चलते निर्दोष लोगों और मासूम पक्षियों के लिए जानलेवा बन जाती है। यह जानते-समझते हुए भी लोग खतरनाक मांझे से पतंग उड़ाते हैं, जिनसे उलझ कर हर साल कई लोग जख्मी हो जाते हैं। इससे कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
अब ऐसे हादसों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने ठोस कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चीनी मांझे से होने वाली मौत को हत्या की श्रेणी में रखते हुए दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, एक दिन पहले ही लखनऊ में मांझे वाले धागे से गला कटने की वजह से एक युवक की मौत हो गई थी।
राज्य सरकार अब विशेष अभियान चला कर चीनी मांझा बेचने वालों पर कार्रवाई करेगी। सवाल है कि तमाम पाबंदियों के बावजूद ये धागे उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में चोरी-छिपे या खुलेआम कैसे बिक रहे हैं। ये कहां से आते हैं और इनके स्रोत क्या हैं? यह किसकी लापरवाही का नतीजा है और इसे रोकने में संबंधित एजंसियां अब तक नाकाम क्यों रही हैं?
यह दुखद है कि जन सरोकार के इतने बड़े मसले की हर स्तर पर उपेक्षा होती रही है। समय-समय पर चीनी मांझे पर प्रतिबंध लगाने की बातें की गईं, लेकिन वे कारगर साबित नहीं हुईं। प्रश्न यह है कि इन धागों को बेचने की छूट कौन देता है?
गौरतलब है कि इसे खरीदने और बेचने पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम की धारा पंद्रह के तहत सजा और जुर्माने का प्रावधान है। मगर इनका सख्ती से अनुपालन नहीं किया जाता। चीनी मांझे पर कई राज्यों में रोक है। दिल्ली में भी पाबंदी है, लेकिन यहां भी ये बेरोकटोक बिकते हैं।
साफ है कि चीनी मांझे के बाजार में पहुंचने से लेकर बिकने तक, कहीं भी नियमों का पालन नहीं हो रहा। खतरनाक मांझे के साथ पतंग उड़ाने का ऐसा क्या जुनून है लोगों में कि जोखिम की आशंका के बावजूद वे न सजा से डरते हैं, न जुर्माने से। इस तरह के जानलेवा धागे से पतंग उड़ाने की जिद को किस तरह देखा जाएगा?
