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टकराव और उकसावा

देश के इकहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस पर चीनी सेना ने लद्दाख क्षेत्र में घुसपैठ करने की हिमाकत की, जिसे भारतीय फौज ने नाकाम कर दिया।

india china, sikkim border, doklamचीन, भूटान व भारत की सीमा डोकलाम में मिलती है।

देश के पूरबी कोने में स्थित सिक्किम सेक्टर के डोकलाम क्षेत्र में चीनी सेना के साथ भारतीय सेना का टकराव दो महीने से जारी है। इस बीच मंगलवार यानी देश के इकहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस पर चीनी सेना ने लद्दाख क्षेत्र में घुसपैठ करने की हिमाकत की, जिसे भारतीय फौज ने नाकाम कर दिया। भारतीय सीमा से खदेड़े जाने के बाद झल्लाए चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर पत्थरबाजी की, जिसका कड़ा जवाब भारत की ओर से दिया गया। पथराव के कारण दोनों तरफ के कुछ सैनिकों को चोटें पहुंची हैं, हालांकि इस बारे में कोई अधिकृत बयान जारी नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच नाथू ला सीमा पर पंद्रह अगस्त को प्रस्तावित परंपरागत कार्यक्रम नहीं हो सका क्योंकि चीनी सेना ने भारत के निमंत्रण का कोई जवाब नहीं दिया। 2005 के बाद यह रस्मी बैठक पहली बार नहीं हो सकी। इसी तरह पहली अगस्त, जो कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की वर्षगांठ है, पर भी यह सीमा-बैठक नहीं हो पाई थी।

जो घटनाक्रम सामने आया है, उसके मुताबिक लद्दाख की मशहूर पैंगोंग झील के किनारे सुबह छह बजे से नौ बजे के बीच पीएलए के नौका-सैनिकों ने दो इलाकों- फिंगर फोर और फिंगर फाइव में भारतीय सीमा में दाखिल होने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सैनिक उनके सामने मानव दीवार बनाकर खड़े हो गए। फिंगर-फोर क्षेत्र में कुछ दूरी तक चीनी सैनिक प्रवेश कर गए थे, लेकिन भारतीय सैनिकों ने उन्हें वहां से भगा दिया। इससे कुपित होकर पीएलए के जवानों ने भारतीय जांबाजों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इसका कड़ा जवाब भारतीय जवानों ने भी पथराव करके दिया। असल में पैंगोंग झील का नब्बे किलोमीटर हिस्सा चीन और पैंतालीस किलोमीटर हिस्सा भारत में आता है। इसमें दोनों तरफ से नौकाएं और पैदल सैनिक तैनात हैं। चीनी सैनिक नावों के सहारे भारतीय सीमा में घुसने की ताक में रहते हैं। आखिरकार, दोनों ओर से एक रस्मी ‘बैनर ड्रिल’ का प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद स्थिति काबू में आई। यह एक सैनिक संहिता है, जिसमें दोनों पक्ष अपने स्थान पर वापस जाने से पहले बैनर दिखाते हैं।

गौरतलब है कि पिछले महीने चीनी सेना के दस-पंद्रह जवान उत्तराखंड के चमोली जिले में भी देखे गए थे, जिन्हें वापस जाना पड़ा था। देखा जा रहा है कि दो महीने पहले शुरू हुए डोकलाम टकराव के बाद से ही चीन आक्रामक रुख का प्रदर्शन कर रहा है। कभी चीनी राजदूत, कभी चीनी विदेश मंत्रालय धमकी भरे स्वरों में बात करते हैं तो कभी चीनी का सरकार नियंत्रित मीडिया अतिरंजित भाषा में हास्यास्पद दलीलें देता है। चीन जानबूझ कर जगह-जगह उकसावे की कार्रवाई कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह चीन की एक रणनीतिक अदा है। लद्दाख में घुसपैठ की यह कोशिश भी दरअसल भारत पर दबाव बनाने की रणनीति का ही एक हिस्सा है। भारत की तरफ से समय-समय पर चीन के इन उकसावे भरे बयानों और सैनिक हथकंडों का जवाब दिया जा रहा है। इस दौरान चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक लेख के जरिए फिर कहा है, ‘भारत के प्रधानमंत्री ने टकराव का रास्ता चुना है क्योंकि उन्हें लगता है कि वे चीन को चुनौती देकर एशिया में भारत का दबदबा बनाए रख सकते हैं।’ वास्तव में विभिन्न मोर्चों पर चीन की अतिशय सक्रियता कहीं न कहीं उसकी हताशा की परिचायक भी है। उसकी सारी रणनीति फिलहाल दुष्प्रचार तक सीमित है। अब तक उसकी सारी कार्रवाइयां उकसावे की ही रही हैं।

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