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संपादकीयः चीन की चाल

भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद थमे ज्यादा वक्त नहीं बीता है कि चीन की दो हरकतों ने भारत को फिर से सकते में डाल दिया। हाल में अरुणाचल प्रदेश के असाफीला में भारतीय सैनिकों की गश्त को लेकर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है।

Author April 11, 2018 02:51 am
प्रतीकात्मक चित्र

भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद थमे ज्यादा वक्त नहीं बीता है कि चीन की दो हरकतों ने भारत को फिर से सकते में डाल दिया। हाल में अरुणाचल प्रदेश के असाफीला में भारतीय सैनिकों की गश्त को लेकर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है। यह मामला अरुणाचल प्रदेश के सुबानसिरी जिले का है। यह इलाका चीनी सीमा से सटा है। चीन इस बात से बौखलाया हुआ है कि भारतीय सेना के जवान यहां गश्त क्यों लगा रहे हैं। उसका कहना है कि यह विवादित इलाका है। हालांकि भारत ने चीन के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए साफ कर दिया कि सुबानसिरी क्षेत्र और असाफीला इलाका भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसे लेकर चीन को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। भारतीय सेना को वास्तविक नियंत्रण रेखा के बारे में पता है और वह हमेशा की तरह इलाके में गश्त जारी रखेगी। दरअसल, 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से ही चीन अरुणाचल के बड़े हिस्से पर अपना दावा जताता रहा है।

दूसरी घटना लद्दाख क्षेत्र की है, जहां पैंगोंग झील के पास तीन बार चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि लद्दाख सेक्टर में इस साल 28 फरवरी से 12 मार्च के बीच चीनी सैनिक तीन बार भारतीय सीमा में छह किलोमीटर तक घुस आए। पिछले एक महीने के दौरान अतिक्रमण की बीस कोशिशें हुई थीं। सीमाओं को लेकर हमेशा कोई न कोई टंटा खड़े करते रहना चीन की पुरानी फितरत रही है। भारत-चीन की सीमा करीब चार हजार किलोमीटर लंबी है। इसमें हिमालय के दुर्गम इलाके भी आते हैं। व्यावहारिक दृष्टि से ऐसा सीमांकन संभव नहीं है जिससे सीमा रेखा का स्पष्ट रूप से पता चल सके। चीन हमेशा इसी का फायदा उठाता रहा है। पहले वह भारतीय सीमा में कई किलोमीटर तक अपने सैनिकों की घुसपैठ कराता है और फिर हर क्षेत्र को ‘विवादित’ बताते हुए उस पर कब्जे की ताक में रहता है। लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी से लेकर डोकलाम तक चीन ने यही किया।

चीन के अपने ज्यादातर पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद हैं। ऐसा वह अपने साम्राज्यवादी-विस्तारवादी प्रभाव को बनाए रखने के लिए करता है। चीन इस वक्त तेजी से अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा है। इसमें उसके सामरिक और व्यापारिक दोनों हित हैं। दक्षिण चीन सागर में सैन्य अड्डा बना कर उसने अमेरिका तक की नींद उड़ा दी है। हिंद महासागर में प्रभाव जमाने के लिए उसने मालदीव को ठिकाना बना लिया है। मध्यपूर्व में पहुंच बनाने के लिए चीन पाकिस्तान में आर्थिक गलियारे का निर्माण कर रहा है। नेपाल में भी चीन अपनी पैठ बनाने में जुट गया है। चीन के इस तरह के कदमों से क्षेत्रीय शांति की कोशिशों को धक्का पहुंचता है। कूटनीतिक, सामरिक, कारोबारी या फिर अन्य किसी भी नजरिए से देखें, साफ है कि चीन भारत को घेर कर उसे दबाव में रखना चाहता है, ताकि उपमहाद्वीप में उसका प्रभाव न बढ़ पाए। सीमा विवाद जैसी घटनाओं से चीन का दोहरा चरित्र उजागर होता है। एक तरफ तो वह भारत से अच्छे रिश्तों की दुहाई देता है, और दूसरी ओर, ऐसी चालें चलता है जो संबंध सुधार की संभावना पर पानी फेर देती हैं।

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