चीन की हरकतें

लद्दाख और उत्तराखंड से लगे सीमाई इलाकों में चीन की बढ़ती हरकतें चिंता पैदा करने वाली हैं।

सांकेतिक फोटो।

लद्दाख और उत्तराखंड से लगे सीमाई इलाकों में चीन की बढ़ती हरकतें चिंता पैदा करने वाली हैं। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास पचास हजार से ज्यादा सैनिक तैनात कर दिए जाने की खबरें हैं। चीन जिस तरह से सैनिकों का जमावड़ा बढ़ा रहा है, उससे लगता है कि वह एक और विवाद खड़ा की साजिश रच रहा है। पिछले दिनों उसने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अपने सैनिकों के रहने के लिए बड़ी संख्या में तंबू भी तान डाले। चिंता ज्यादा इसलिए भी है कि चीन हमेशा इसी तरह से हमले और कब्जे की रणनीति अपनाता रहा है। लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली गंभीर घटना यह है कि पिछले महीने की तीस तारीख को सौ चीनी सैनिक उत्तरांखड के बाड़ाहोती सैक्टर में घुस आए थे। ये जवान तीन घंटे तक वहां रहे और जाते-जाते नदी पर बनी एक छोटी पुलिया तोड़ गए। ये घटनाएं चीन की मंशा को उजागर करने के लिए काफी हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि इस तरह की तनावपूर्ण गतिविधियों से चीन भारत को उकसाना चाह रहा है। उसे लग रहा है कि जवाबी कार्रवाई में भारत कुछ करे और फिर विवाद खड़े हों।

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा और बाड़ागोती की घटनाएं पिछले साल गलवान घाटी हमले की याद ताजा कराने से कम नहीं हैं। गलवान घाटी में चीन ने जानबूझ कर भारतीय सैनिकों को निशाना बनाया था। हालांकि गलवान में भी घुसपैठ काफी पहले से चल रही थी। इसलिए अब चीन की किसी भी गतिविधि को खासतौर से सीमाई इलाकों में मामूली मान कर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कहने को गलवान में भारतीय सैनिकों पर हमले के बाद अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए भारत ने कोई कसर नहीं छोड़ी। चीन के किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत ने सीमा पर पर्याप्त सैनिक और सैन्य साजोसामान तैनात कर लिया है। चीन इसलिए भी चिड़ा हुआ है कि भारत ने अपने सीमाई इलाकों में सड़कों से लेकर दूसरी सुविधाएं भी तेजी से विकसित कर ली हैं। पर सवाल इस बात का है कि जब पूर्वी लद्दाख के गतिरोध को खत्म करने के लिए भारत और चीन के बीच वार्ताओं का सिलसिला जारी है तो फिर ऐसे नाजुक दौर में चीन सीमाई इलाकों में तनाव और उकसावे के काम क्यों कर रहा है। बाड़ाहोती में भारतीय क्षेत्र में चीनी सैनिक जिस आसानी से घुस आए, वह कम गंभीर बात नहीं है।

इसमें तो कोई संदेह नहीं कि सीमाई इलाकों में सैन्य गतिविधियां बढ़ा कर चीन भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया, जापान और भारत के चौगुटे (क्वाड) की सक्रियता से चीन के माथे पर परेशानी साफ झलक रही है। हिंद प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर क्वाड में भारत की बढ़ती भूमिका से भी चीन हिला हुआ है। इसलिए भारतीय इलाकों में घुसपैठ और हमले करके वह भारत को धमका रहा है। चीन को समझना चाहिए कि यह वक्त विवाद बढ़ाने का नहीं, बल्कि लंबित मुद्दों को शांति के साथ निपटाने का है। गलवान घाटी मसले पर अब तक हुई वार्ताओं में बनी सहमतियों के अनुरूप काम करने की जरूरत है। सीमा पर सैन्य गतिविधियां बढ़ाने के बजाय चीन का जोर और प्राथमिकता विवादित स्थलों से अपने सैनिकों को हटाने पर होना चाहिए। लेकिन जानबूझ कर वह जिस रास्ते पर बढ़ रहा है, वह टकराव को और बढ़ाने वाला ही साबित होगा।

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