बच्चों की फिक्र

पिछले साल जब कोरोना विषाणु के संक्रमण ने कहर बरपाना शुरू किया था, तभी से समूची दुनिया में यह खौफ कायम है कि इससे बचाव का अचूक उपाय क्या होगा।

सांकेतिक फोटो।

पिछले साल जब कोरोना विषाणु के संक्रमण ने कहर बरपाना शुरू किया था, तभी से समूची दुनिया में यह खौफ कायम है कि इससे बचाव का अचूक उपाय क्या होगा। शुरुआती दौर में इसकी रोकथाम के लिए पूर्णबंदी से लेकर लोगों को हर स्तर पर सावधानी बरतने के लिए जागरूक किया गया। तभी से कुछ खास तय दवाओं, चिकित्सीय देखभाल और इसकी संक्रमण की चपेट में आने से बचने के लिए मास्क, सैनिटाइजर, आपसी दूरी बरतने आदि एहतियातों के साथ हर जगह लोग इसका सामना कर रहे हैं।

सरकारें अपने स्तर पर हर संभव कदम उठा रही हैं। इन उपायों की वजह से काफी हद तक इसका सामना करने और इसके असर को सीमित करने के हालात बन रहे हैं। लेकिन अब भी यह नहीं कहा जा सकता कि कोरोना विषाणु का खतरा टल गया है। खासतौर पर पिछले कुछ महीनों से शीर्ष स्वास्थ्य एजेंसियां और सरकारें लगातार इस बात की चेतावनी जारी कर रही हैं कि दूसरी लहर में व्यापक नुकसान पहुंचाने के बाद अभी राहत के दिन भले दिख रहे हैं, पर कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है और इसका खतरा सबसे ज्यादा बच्चों के सिर पर मंडरा रहा है।

स्वाभाविक ही दुनिया भर में विश्व स्वास्थ्य संगठन, अनेक देशों की शीर्ष स्वास्थ्य एजेंसियां और सरकारें इस कोशिश में हैं कि कैसे बच्चों को भी इस महामारी से बचाया जाए। हालांकि सबसे पहले बुजुर्गों और फिर युवाओं के लिए स्वीकृत टीकों के जरिए हमारे देश की व्यापक आबादी को इस महामारी से सुरक्षा के दायरे में लाने की कोशिश की गई है, लेकिन अब तक बच्चों की शरीर संरचना के लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित और सेहत के अनुकूल टीके तैयार करने में ठोस कामयाबी नहीं मिली है।

यों दुनिया के कुछ देशों ने एक स्तर तक कुछ टीकों के परीक्षण की इजाजत दी है और एहतियात के साथ सीमित स्तर पर टीकाकरण चल भी रहा है, लेकिन उनके संतुष्ट करने वाले परिणामों को लेकर चिकित्सा जगत अभी अध्ययन के दौर में है। इस क्रम में भारत में भी बच्चों को टीका लगाने के लिए सावधानी के साथ कदम उठाए जा रहे हैं। मंगलवार को आई खबर के मुताबिक भारत का केंद्रीय औषधि प्राधिकरण भी दो से अठारह साल तक के बच्चों और किशोरों को कुछ शर्तों के साथ कोवैक्सीन टीका लगाने के लिए एक निष्कर्ष पर पहुंचने की प्रक्रिया में है। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने साफ किया कि अभी इस पर काम चल रहा है और विशेषज्ञों के निर्णय लेने के बाद टीके को अंतिम मंजूरी दी जाएगी।

दरअसल, शुरुआत के बाद से कोरोना विषाणु के संक्रमण और असर का जो स्वरूप रहा है, उसके मद्देनजर यह कहना मुश्किल है कि आने वाले दिनों में यह कैसी शक्ल लेगा। तीसरी लहर की आशंका अब भी लगातार बनी हुई है और इसमें सबसे ज्यादा डर बच्चों के ही प्रभावित होने का है। दूसरी लहर के कहर के बाद अब तक विषाणु के फैलाव की रफ्तार कुछ धीमी देखी जा रही है, तो यह राहत की बात जरूर है, मगर इससे इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता कि लोग इससे सुरक्षित हो गए हैं। यों देश भर में टीकाकरण अपनी गति से चल रहा है और इस मामले में अब तक की उपलब्धि को संतोषजनक कहा जा सकता है। लेकिन यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि बुजुर्गों और युवाओं के साथ-साथ बच्चों और किशोरों को भी कोरोना के संक्रमण से बचाने की जिम्मेदारी सब पर है।

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