चन्नी की चुनौतियां

चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस आलाकमान ने एक साथ कई संदेश दिए हैं।

चरणजीत सिंह चन्‍नी । फाइल फोटो।

चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस आलाकमान ने एक साथ कई संदेश दिए हैं। पहला तो यही कि कांग्रेस को दलितों की फिक्र औरों से कहीं ज्यादा है। इसलिए दलितों के उत्थान के लिए चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया है। दूसरा संदेश यह कि पार्टी के भीतर आपसी होड़ खत्म कराने के मामले में कांग्रेस आलाकमान कोई भी कदम उठाने में हिचक नहीं रहा है।

पिछले कई महीनों से पंजाब कांग्रेस में जो हालात बने हुए थे, वे किसी अराजक स्थिति से कम नहीं थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच जंग ने पार्टी को संकट में डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इससे जनता के बीच लगातार यह हवा बनती रही कि अब कांग्रेस पार्टी इस हालत में पहुंच चुकी है कि कोई आलाकमान की भी नहीं सुन रहा। बल्कि सिद्धू और अमरिंदर सिंह जिस तरह से आलाकमान के सुझावों की अनदेखी करते रहे, उससे पार्टी में संकट बढ़ रहा था।

कांग्रेस के लिए इस वक्त बड़ी चिंता पंजाब में खुद को बचाए रखने की है। चन्नी वैसे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कहीं नहीं थे। लेकिन उन्हें कमान सौंप कर कांग्रेस ने अपनी सामाजिक राजनीति की रणनीति को नया स्वरूप दिया है। इसलिए चन्नी के सामने बड़ी चुनौती दलितों को साधने की है। राज्य में दलित आबादी पैंतीस फीसद के लगभग है। दलित वोटों का यह आधार पार्टी को फिर से सत्ता में पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। हालांकि दलितों को अपनी ओर खींचने के लिए दूसरे दल भी जोर लगाए हुए हैं।

लेकिन अब तक किसी ने भी दलित समुदाय से किसी को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पेश नहीं किया। गौरतलब है कि पंजाब विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा वक्त बचा नहीं है। इसलिए देखने की बात यह होगी कि दलितों के विकास और उत्थान के लिए चन्नी कदम क्या उठाते हैं। दलितों पर अत्याचार के मामले में पंजाब का रेकार्ड भी दूसरे राज्यों से कोई अलग नहीं है। यह देखना होगा कि दलितों के उत्थान के लिए वे कौन-सी ठोस योजनाएं पेश करते हैं जो वाकई इस तबके को सामाजिक न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती हैं। वैसे चुनाव करीब आते ही राजनीतिक दलों को दलितों की चिंता सताने लगती है। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि अब तक किसी भी दल ने किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाने की बात नहीं कही थी। इस लिहाज से पंजाब में दलित को मुख्यमंत्री बनाना कांग्रेस को नया धरातल दे सकता है।

सवाल यह भी है कि क्या चन्नी को मुख्यमंत्री बना देने से पंजाब कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक हो जाएगा! इसीलिए अब देखना यह होगा कि भविष्य में कैप्टन और सिद्धू के बीच व्यवहार कैसा रहता है। एक दिलचस्प बात है कि एक वक्त कैप्टन को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने तक की चर्चा चलने लगी थीं, लेकिन आज उन्हें सिद्धू के कारण मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। गौरतलब यह भी है कि हाल ही में अमरिंदर सिंह ने सिद्धू को भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बता डाला। जाहिर है, चन्नी के सामने बड़ी मुश्किल अमरिंदर और सिद्धू को साथ लेकर चलने की होगी। कांग्रेस आलाकमान ने सारा बदलाव पंजाब के आगामी चुनावों को ध्यान में रख कर किया है। पार्टी ने चन्नी को चुनाव में मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश करने का फैसला भी किया है। इसलिए अब चन्नी की पहली चुनौती चुनाव जिताने की है।

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