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संपादकीयः दुनिया का संकट

भारत में जिस तरह के हालात बन रहे हैं, वे स्थिति की गंभीरता को बता रहे हैं। तमाम पुख्ता इंतजामों और सावधानियों के बावजूद केरल में एक बच्चे सहित छह और लोगों में इस संक्रमण का पाया जाना बता रहा है कि बीमारी का दौर अभी थमा नहीं है।

कोरोना ने दुनिया के ज्यादातर देशों को चपेट में ले लिया है।

कोरोना ने दुनिया के ज्यादातर देशों को चपेट में ले लिया है। चीन से फैले इस वायरस से अब यूरोप के देश और अमेरिका भी अछूते नहीं रह गए हैं। ईरान के बाद अब इटली में भी हालात गंभीर हैं, जहां चौबीस घंटे के भीतर ही डेढ़ सौ लोगों की इस संक्रमण से मौत हो गई। उत्तरी इटली पूरी तरह बंद है, लोग घरों में कैद हैं, सिनेमाघरों से लेकर बाजार, शिक्षण संस्थान, दफ्तर सब जगह सन्नाटा है। घरों से बाहर निकलने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। यह स्थिति ठीक वैसी है जैसे चीन के कई शहरों को कैदखानों में बदल दिया गया। इटली में अब तक साढ़े तीन सौ से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग संक्रमित हैं। जर्मनी में भी एक हजार से ज्यादा लोग इस संक्रमण के शिकार हो गए। दुनिया कासबसे चौकन्ना रहने वाला और ताकतवर देश अमेरिका भी इस संक्रमण को अपने यहां पहुंचने से रोक नहीं पाया। वहां सौ से ज्यादा लोग इससे संक्रमित निकले हैं। न्यूयार्क से लेकर कई राज्यों में शिक्षण संस्थान बंद हैं। कैलिफोर्निया के तट पर खड़े एक क्रूज में इक्कीस लोग इस संक्रमण से ग्रस्त हैं। ज्यादा चिंताजनक यह है कि हालात काबू में आने के बजाय बिगड़ते जा रहे हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक दिन-रात इस वायरस का इलाज खोजने में जुटे हैं, लेकिन अभी तक कोई कामयाबी नहीं मिलने से सबके हाथ-पैर फूल रहे हैं।

भारत में जिस तरह के हालात बन रहे हैं, वे स्थिति की गंभीरता को बता रहे हैं। तमाम पुख्ता इंतजामों और सावधानियों के बावजूद केरल में एक बच्चे सहित छह और लोगों में इस संक्रमण का पाया जाना बता रहा है कि बीमारी का दौर अभी थमा नहीं है। हालांकि केरल सरकार ने इससे निपटने के लिए जिस तरह से काम किया है, वह दूसरे राज्यों के लिए मिसाल है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी कोरोना के दो मामले मिले हैं। भारत के अलग-अलग हिस्सों में कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामले जिस तेजी से सामने आ रहे हैं, उससे यह तो साफ है कि अभी तक जितने मामले सामने आए हैं, वे सब उन देशों से आने वाले लोगों में मिले हैं जहां कोरोना फैल चुका है। इसलिए भारत के समक्ष अब बड़ी मुश्किल ऐसे लोगों की पहचान करने को लेकर है जिनके संपर्क में कोरोना संक्रमित लोग आए होंगे। यों तो सरकार ने अब इस आपदा से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं और सक्रियता से हर स्तर पर काम भी शुरू हुआ है, लेकिन अगर समय रहते इससे बचाव के उपाय कर लिए जाते तो कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोका जा सकता था।

अच्छी बात यह है कि हालात को देखते हुए हर स्तर पर सतर्कता देखने को मिल रही है। इससे निपटने में जुटे डॉक्टर लोगों के मन से कोरोना का खौफ निकालने और जागरूकता पैदा करने में लगे हैं। बीमारी और इससे बचाव के उपाय बता रहे हैं। लेकिन बीमारी जिस तेजी से पैर पसार रही है, उसे देखते हुए हमारी तैयारियां कितनी और कैसी हैं, यह बड़ा सवाल है। भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का जो हाल है, उसे देखते हुए यह सवाल और महत्त्वपूर्ण हो जाता है। हाल में संसदीय समिति ने राष्ट्रीय जैव सुरक्षा नीति बनाने की जरूरत बताई है। कोरोना से निपटने के अभी जो इंतजाम हो रहे हैं, वे फौरी संकट से निपटने भर के लिए हैं। आने वाले वक्त में ऐसी बीमारियों की चुनौती से निपटने के लिए एक स्थायी और मजबूत तंत्र की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता।

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