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संपादकीय: भारत में टीका

कोरोना को हराने के लिए प्रधानमंत्री शुरू से ही बचाव के उपायों पर जोर देते रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि टीका आ जाने और लग जाने के बाद भी सुरक्षित दूरी और मास्क लगाने जैसे उपाय ही लोगों को महामारी बचाएंगे और इनकी अनदेखी हमें फिर से गंभीर संकट में डाल सकती है।

Corona Vaccineभारत का सीरम संस्थान देश में ऑक्सफोर्ड / एस्ट्राजेनेका के कोरोनावायरस वैक्सीन का निर्माण और परीक्षण कर रहा है (फोटो-रॉयटर्स)

आखिरकार नए साल में भारत को कोरोना का टीका मिल गया। केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन ने आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय-एस्ट्राजेनेका और भारत के सीरम इंस्टीट्यूट के साझा प्रयासों से तैयार टीके- कोविशील्ड के आपात इस्तेमाल को हरी झंडी दे दी। इस टीके की खूबी यह है कि इसे दो से आठ डिग्री सेल्सियस पर सुरक्षित रखा जा सकता है। ब्रिटेन में भी दो दिन पहले ही इस टीके को मंजूरी मिली है।

पिछला पूरा साल जिस तरह से महामारी के साये में गुजरा, उसमें उम्मीद की एकमात्र किरण इसका कारगर टीका ही थी। सब कुछ इसी संभावना पर टिका था कि जब तक कोरोना का टीका नहीं आ जाता, तब तक सिर्फ बचाव के उपायों से ही संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। महामारी की दस्तक के साथ ही दुनिया भर के वैज्ञानिक और चिकित्सक इसके टीके और दवा की खोज में जुटे और कुछ ही महीनों में कई देशों ने टीके तैयार कर लेने का दावा किया।

अमेरिका, रूस, चीन जैसे देशों में तैयार टीकों का कई देशों में परीक्षण पूरा हो चुका है और इनके इस्तेमाल की दिशा में बढ़ा जा रहा है। भारत भी दुनिया के उन अग्रणी देशों में रहा जिन्होंने टीका विकसित करने के काम को एक चुनौती के रूप में लिया और सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटेक सहित कुछ कंपनियों ने टीके तैयार किए। पिछले दिनों इन कंपनियों सहित अमेरिकी कंपनी- फाइजर ने भी डीजीसीआइ के समक्ष के अपने टीकों के आपात इस्तेमाल की इजाजत मांगी थी।

भारत की आबादी को देखते हुए टीकाकरण एक तरह का महाभियान है। कुछ ही महीनों में करोड़ों लोगों को इसकी खुराक दी जानी है। सबसे पहले किसे दिया जाए, इसे लेकर भी प्राथमिकता तय हो चुकी है। कोरोना महामारी से निपटने में स्वास्थ्यकर्मियों व बुजुर्गों को सबसे पहले इसे दिया जाना है। सीरम ने इस महीने दस करोड़ खुराक का उत्पादन कर लेने की तैयारी कर ली है।

टीकाकरण को लेकर अब तक जिस तरह की तैयारियां हुई हैं और पिछले हफ्ते जिस तरह से इसके प्रयोग को लेकर पूर्वाभ्यास हुए, उससे तो लग रहा है भारत इस काम को बखूबी पूरा कर ले जाएगा। यह तो तय था कि जल्द ही टीका उपलब्ध होगा, लेकिन बड़ी चुनौती यह थी कि इसे देश भर में सुरक्षित रूप से जरूरतमंदों तक पहुंचाया कैसे जाएगा। टीके की आपूर्ति और भंडारण सहित सारी तैयारियां समय से पूरी कर ली गईं और इसे देश के हर राज्य तक पहुंचाने के लिए वायुसेना को भी सतर्क रखा गया है।

कोरोना को हराने के लिए प्रधानमंत्री शुरू से ही बचाव के उपायों पर जोर देते रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि टीका आ जाने और लग जाने के बाद भी सुरक्षित दूरी और मास्क लगाने जैसे उपाय ही लोगों को महामारी बचाएंगे और इनकी अनदेखी हमें फिर से गंभीर संकट में डाल सकती है। परीक्षण के दौरान कुछ टीकों के नतीजे संतोषजनक न मिलने की बातें भी सामने आई। इससे टीकाकरण को लेकर लोगों के मन में थोड़ा डर भी बना। इसीलिए प्रधानमंत्री ने भी टीकाकरण को लेकर अफवाहों से बचने और बचाव के उपायों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया है।

हालांकि टीके वर्षों के लंबे प्रयोगों और परीक्षणों से गुजरने के बाद ही उपयोग के लिए बाजार में लाए जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने संपूर्ण मानकों के तहत जितने कम वक्त में कोरोना के टीके तैयार किए, इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। ऐसे में टीकाकरण को लेकर भयभीत होने की जरूरत नहीं है। पर्याप्त जनभागीदारी से इस अभियान सफल बना कर हम महामारी को हरा सकते हैं।

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