CBSE in Controversy: पिछले कुछ समय से हर क्षेत्र में डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसे पारदर्शिता और विश्वसनीयता का एक उपयोगी माध्यम भी बताया जाता है। मगर हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की बारहवीं कक्षा के गणित के प्रश्नपत्र में छपे एक क्यूआर कोड से परीक्षा से संबंधित जरूरी जानकारियों के बजाय ब्रिटेन के गायक रिक एस्टली के एक चर्चित गीत का वीडियो खुल जाने से कई सवाल उठे हैं।
बीते नौ मार्च को हुई इस परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र की तस्वीरें चर्चा में आईं, तो स्वाभाविक रूप से इसको लेकर चिंता जताई गई। क्यूआर कोड में किसी गीत का वीडियो खुलना निस्संदेह लापरवाही का ही संकेत देता है।
सवाल है कि समूचे प्रश्नपत्र को तैयार करते हुए जिस तरह हर बिंदुओं का ध्यान रखा जाता है, संबंधित क्यूआर कोड को लेकर भी सावधानी बरतना और जारी करने से पहले उसे एक बार जांच लेना जरूरी क्यों नहीं समझा गया।
हालांकि मामले के तूल पकड़ने के बाद सीबीएसई ने सफाई दी कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा में सेंध नहीं लगी है। मगर क्या सीबीएसई इस बात से इनकार कर सकती है कि प्रश्नपत्र में क्यूआर कोड के मामले में जिस तरह की लापरवाही बरती गई, उसकी वजह से सुरक्षा में सेंध लग सकती है? गौर करने वाली बात है कि परीक्षा देने गए विद्यार्थियों के सामने जब ऐसी स्थिति पैदा हुई होगी, तब उनकी क्या मन:स्थिति रही होगी?
आमतौर पर क्यूआर कोड के उपयोग के बाद इसमें किसी भी तरह की गलती की गुंजाइश नहीं होती। अब इस समूचे मसले के सार्वजनिक चर्चा में आने के बाद परीक्षा के आयोजन और उसकी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे हैं। एक ओर डिजिटल इंडिया के नारे के समांतर ज्यादातर क्षेत्रों में क्यूआर कोड के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं इसमें बरती जाने वाली लापरवाही से लेकर इसके बेजा इस्तेमाल के बढ़ते मामले भी चिंताजनक हैं।
ऐसी घटनाएं क्यूआर कोड की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं और इसके उपयोग के संबंध में पर्याप्त सजगता, प्रशिक्षण और सावधानी के तकाजे को रेखांकित करती हैं।
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