त्रासदी के शिविर - Jansatta
ताज़ा खबर
 

त्रासदी के शिविर

सामाजिक कल्याण के नाम पर अक्सर धर्मादा संस्थाएं और सरकारी अस्पताल चिकित्सा शिविर आयोजित करते रहते हैं। मोतियाबिंद और नसबंदी के शिविर आम हैं।

Author November 7, 2015 9:57 AM

सामाजिक कल्याण के नाम पर अक्सर धर्मादा संस्थाएं और सरकारी अस्पताल चिकित्सा शिविर आयोजित करते रहते हैं। मोतियाबिंद और नसबंदी के शिविर आम हैं। यों रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा आदि रोगों की पहचान और इनसे बचाव के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए भी जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं, पर उनमें वैसा जोखिम नहीं रहता जैसा ऑपरेशन में। मोतियाबिंद और नसबंदी शिविरों में संक्रमण के चलते रोगियों के अपनी आंख गंवा बैठने, यहां तक कि जान से हाथ धो बैठने तक के कई उदाहरण मौजूद हैं।

पर हैरानी की बात है कि ऐसे शिविर आयोजित करने वाले एहतियाती उपायों का ध्यान नहीं रखते। यही वजह है कि कई बार बड़े हादसे हो जाते हैं। महाराष्ट्र के वासिम जिला अस्पताल में नेत्र चिकित्सा शिविर के दौरान मोतियाबिंद के आॅपरेशन में दो लोगों के अपनी आंखों की रोशनी गंवा बैठने और बत्तीस लोगों के गंभीर संक्रमण की गिरफ्त में आ जाने की घटना इसी सिलसिले की ताजा कड़ी है। विचित्र है कि जब रोगियों ने ऑपरेशन के बाद आंख में तकलीफ बढ़ने की शिकायत की तो उन्हें अकोला के अस्पताल में भेज दिया गया, जबकि वहां कोई नेत्र चिकित्सक नहीं है। बताया जा रहा है कि यह हादसा इसलिए हुआ, क्योंकि आॅपरेशन के दौरान जरूरी साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा गया। हालांकि जिला अस्पताल का कहना है कि उसने उपकरणों की सफाई और ऑपरेशन के दौरान दस्ताने वगैरह बदलने के मामले में पूरी सावधानी बरती। मगर रोगियों में बैक्टीरिया का आक्रमण कैसे हुआ, इसका कोई संतोषजनक जवाब वह नहीं दे सका है।

दो साल पहले राजस्थान के एक निजी अस्पताल में लगाए गए नेत्र चिकित्सा शिविर में इसी तरह ऑपरेशन के बाद संक्रमण से कई लोग आंखों की रोशनी गंवा बैठे थे। पिछले साल छत्तीसगढ़ में नसबंदी शिविर में ऑपरेशन के बाद संक्रमण के चलते कई महिलाओं की जान चली गई थी। इस सब सेअगर महाराष्ट्र के वासिम जिला अस्पताल प्रशासन ने सबक लेना जरूरी नहीं समझा तो यह गंभीर लापरवाही ही कही जाएगी। यह सामान्य तकाजा है कि ऑपरेशन के दौरान साफ-सफाई का खास ध्यान रखना पड़ता है। ऑपरेशन के बाद कुछ समय तक रोगियों पर लगातार नजर रखने की जरूरत होती है। स्वास्थ्य शिविरों में बड़ी तादाद में लोगों का आॅपरेशन किया जाता है। इसलिए अक्सर अस्पतालकर्मी उपकरणों की साफ-सफाई, दस्ताने बदलने आदि को लेकर लापरवाही बरतते देखे जाते हैं।

मोतियाबिंद और नसबंदी के बाद अक्सर रोगियों को घर भेज दिया जाता है, इसलिए उन पर जरूरी नजर नहीं रखी जा पाती। किन्हीं वजहों से अगर उनमें संक्रमण फैलता है तो उसकी जांच आदि में काफी समय लग जाता है, फिर सेहत तेजी से बिगड़ती चली जाती है, जिसे संभाल पाना कठिन हो जाता है। वासिम जिला अस्पताल में हुए ऑपरेशन में भी यही हुआ। फिर अस्पतालकर्मियों में यह धारणा भी लापरवाही की वजह बनती है कि चिकित्सा शिविरों में आमतौर पर गरीब तबके के लोग आते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App