Budget 2026:अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर जिस तरह की वैश्विक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं, नए समीकरण तैयार हो रहे हैं, उसमें सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा बजट पेश करना एक चुनौती भरा काम है, जो संतुलित हो और जिसमें लोकलुभावन प्रस्तावों से बचने की कोशिश की जाए। सरकार का मानना है कि देश अब तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए दृढ़ संकल्पित है और 2026-27 का आम बजट भविष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया।
किसी भी बजट की उपादेयता इससे साबित होती है कि वह देश की आर्थिक मजबूती में कितना सहायक साबित हुआ और उसका आम जनता के जीवन पर क्या असर पड़ा। इस लिहाज से देखें तो रविवार को पेश बजट को व्यापार और पूंजी के क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों के साथ-साथ भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ तालमेल बिठाते हुए अधिक निर्यात और स्थिर दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करने वाला कहा जा सकता है।
यह भी पढ़ें- विचार: बजट 2026 में IT और MSME को रफ्तार, किसानों और आम आदमी को क्या मिला?
यों इस बजट को गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के हितों के संदर्भ में उम्मीद जगाने वाले प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है, मगर कोई लोकलुभावन घोषणाओं से बचते हुए यथार्थवादी दृष्टिकोण पर जोर दिया गया। युवा वर्ग के सशक्तीकरण के मकसद से शिक्षा क्षेत्र में लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पचास नए आइआइटी और मेडिकल कालेज खोले जाने की बात कही गई है।
साथ ही कौशल के विकास के उद्देश्य से ‘स्किल इंडिया’ कार्यक्रम को जमीन पर उतारने के लिए दो लाख करोड़ रुपए और प्रशिक्षु योजना से पांच करोड़ युवाओं को छात्रवृत्ति की व्यवस्था की जाएगी। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई के क्षेत्र में मदद के साथ ही रोजगार केंद्रित विकास को प्रमुखता दी जाएगी। दरअसल, देश में आज भी विकास के सारे सवाल बढ़ती बेरोजगारी के सामने चुनौती की तरह लगने लगते हैं।
यह भी पढ़ें- हिंसा, भरोसा और स्थानीय जुड़ाव: बंगाल में दीदी की ‘ममता’ के आगे भाजपा का राष्ट्रवाद क्यों नहीं बन रहा चुनौती?
इसके मद्देनजर बजट में बेरोजगारी दर को आठ फीसद से नीचे लाने का संकल्प जाहिर किया गया है। मगर सारे निवेश और कार्यक्रम की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि शहरों-महानगरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी रोजगार के कितने अवसर सृजित हुए और उसमें हिस्सेदारी करने के लिए कौशल की कसौटी पर कितनी प्रशिक्षित युवा आबादी तैयार हुई।
इसी तरह, लक्ष्मी वंदना योजना को विस्तार दिया गया है और स्वरोजगार ऋण के नियम शिथिल किए गए, ताकि महिला सशक्तीकरण की दिशा में ठोस नतीजे हासिल किए जा सकें। मगर यह देखने की बात होगी कि इससे जमीनी स्तर पर लैंगिक समानता की स्थितियों को सशक्त बनाने में कितनी मदद मिलेगी। पांच ‘विश्वविद्यालय शहर’ के निर्माण, डिजिटल नालेज ग्रिड की स्थापना और देश के प्रत्येक जिले में महिला छात्रावास खोलना युवा सशक्तीकरण की राह को मजबूती दे सकती है।
यह भी पढ़ें- सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 क्या है? सरकार खर्च कर रही 40 हजार करोड़
अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के मकसद से विनिर्माण, पर्यटन, दुर्लभ खनिजों के खनन और नई बुनियादी ढांचा परियोजना को बढ़ावा देने का प्रस्ताव किया गया है। बदलते दौर में तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में मजबूती के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र की स्थापना डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करने में मददगार होगी, लेकिन यह ध्यान रखने की जरूरत होगी कि गरीब और अमीर आबादी के बीच डिजिटल विभाजन को पाटा जा सके, क्योंकि आने वाले वर्षों में अगर देश को दुनिया में एक अग्रणी अर्थव्यवस्था बनना है, तो उसमें समावेशी विकास के सिद्धांत को वास्तव में जमीन पर उतारना होगा। यह भी पढ़ें- Budget 2026-27: वित्त मंत्री के बजट भाषण की मुख्य बातें; जानें किस सेक्टर को क्या मिला
