ताज़ा खबर
 

फिक्सिंग का फंदा

अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआइ ने आइपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग खेलों में स्पॉट फिक्सिंग के दोषी दो खिलाड़ियों अजित चंदीला को आजीवन और हिकेन शाह को पांच साल के लिए क्रिकेट से प्रतिबंधित कर दिया है।

Author नई दिल्ली | January 20, 2016 02:45 am
हरियाणा के आफ स्पिनर अजित चंदीला पर 2013 के आइपीएल स्पाट फिक्सिंग मामले में आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया है।

अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआइ ने आइपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग खेलों में स्पॉट फिक्सिंग के दोषी दो खिलाड़ियों अजित चंदीला को आजीवन और हिकेन शाह को पांच साल के लिए क्रिकेट से प्रतिबंधित कर दिया है। बीसीसीआइ का कहना है कि वह क्रिकेट को साफ-सुथरा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। खेलों और खेल संघों को साफ-सुथरा बनाने के मकसद से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित लोढ़ा समिति की सिफारिशें आने के बाद बीसीसीआइ ने इस फैसले के जरिए भले अपनी कार्यप्रणाली को विश्वसनीय साबित करने की कोशिश की है, पर क्या इसे पारदर्शिता की खातिर की गई नई पहल कहा जा सकता है? इस मामले में पहले ही दोषी करार देते हुए श्रीसंत और अंकित चव्हाण को क्रिकेट में आजीवन प्रतिबंधित किया जा चुका है।

सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान रायल्स और चेन्नई सुपरकिंग्स टीमों को भी प्रतिबंधित कर दिया था। उसके बाद अजित चंदीला और हिकेन शाह पर प्रतिबंध लगा कर बीसीसीआइ ने एक तरह से अपना रुका हुआ फैसला पूरा किया है। खेलों में पैसे की भूख इस कदर बढ़ती गई है कि जो भी खेल लोकप्रिय और अधिक कमाई देने वाला साबित होता है, उसमें हार-जीत के नतीजों को पलटने का खेल शुरू हो जाता है। खिलाड़ियों पर सट््टेबाजी और खेल के नतीजे पलटने की कोशिश शुरू हो जाती है। आइपीएल के खेल इसी के चलते खासे बदनाम हुए। अब टेनिस में मैच फिक्सिंग का खुलासा हुआ है, जिसे लेकर खासा विवाद छिड़ गया है। बीबीसी और बजफीड ने गोपनीय फाइलों के भंडाफोड़ के जरिए दावा किया है कि एक दशक में टेनिस के शीर्ष पचास खिलाड़ियों में से सोलह सट्टेबाजी गिरोहों के लिए मैच फिक्सिंग में लिप्त रहे हैं। इनमें ग्रैंडस्लैम चैंपियन भी शामिल हैं। रिपोर्ट का दावा है कि विंबलडन के तीन मैच फिक्स थे।

पिछले आस्ट्रेलियाई ओपन चैंपियन नोवाक जोकोविच ने भी दावा किया है कि शुरुआती दौर में उन्हें मैच हारने के लिए एक अधिकारी के माध्यम से एक लाख दस हजार पाउंड देने की पेशकश की गई थी। हालांकि टेनिस के पेशेवर खिलाड़ियों का संगठन एसोसिएशन आॅफ टेनिस प्रोफेशनल इस खुलासे के खंडन में जुट गया है। मगर इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर अंगुली उठी है। लोकप्रिय खेलों में अनियमितता किसी से छिपी नहीं है। खासकर क्रिकेट में खिलाड़ियों के चयन और उसमें मिलने वाले अकूत धन की बंदरबांट को लेकर जब-तब अंगुलियां उठती रही हैं। क्रिकेट में बेपनाह कमाई के चलते ही उसकी जिला समितियों तक पर राजनेताओं, प्रशासकों, उद्योगपतियों ने कब्जा जमा रखा है।

आइपीएल मामले के बाद जाहिर हो गया कि इसमें किस कदर बड़े पैमाने पर धांधली होती है। ललित मोदी, राज कुंद्रा और गुरुनाथ मयप्पन जैसे लोगों के तार कहां तक जुड़े थे। खिलाड़ियों को प्रतिबंधित करने से दूसरे खिलाड़ियों को सबक जरूर मिल सकता है, मगर वे महज मोहरे होते हैं। परदे के पीछे का खेल करने वाले अक्सर अपना दामन बचाने में कामयाब रहते हैं। लोढ़ा समिति की सिफारिशों से उम्मीद बनी कि खेल संघों की कमान अनुभवी और ईमानदार खिलाड़ियों के हाथों में देने की पहल होगी, मगर जब तक दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव बना रहेगा, इस दिशा में सार्थक नतीजे नहीं आ सकते।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App