आम लोगों के जीवन के गहरे जख्मों को जीवंत शब्द देने वाले बशीर बद्र अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन दिल को छू लेने वाली अपनी शायरी के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे। वे जितने सरल थे, उनकी रचनाओं में उतनी ही सादगी और सहजता थी। उनमें इस कदर भाव अभिव्यक्त होते थे कि हर किसी को उनकी पंक्तियां अपनी-सी लगती थीं।

आधुनिक गजल के इस उस्ताद के रचना संसार में जिंदगी का हर वह लम्हा था, जिसे मनुष्य जीता है। बशीर बद्र अपने शब्दों में तन्हाई और पीड़ा को बखूबी उकेरते थे। वे चुभती जरूर थीं, मगर मन के किसी कोने दर्ज हो जाती थीं।

वे अपनी शायरी में उस शहर को भी जीते रहे, जहां अजनबियत बढ़ती चली गई थी। उन्होंने नए मिजाज के शहर को वक्त रहते पहचान लिया था। वे संघर्ष भरे रास्ते से गुजरे और जिंदगी की शाम आने से पहले उन्होंने लोगों की जुबान पर चढ़ जाने वाली कालजयी पंक्तियां रचीं। बशीर साहब के मशहूर शेर में समाज के जटिल ताने-बाने के बीच जद्दोजहद करने का जज्बा दिखता है। उनमें जिंदगी के कई पाठ हैं। उनकी शायरी हमें जीने का रास्ता दिखाती है।

हममें से न जाने कितने ऐसे लोग होंगे जो किसी न किसी मौके पर उनकी शायरी को याद करते रहे और उन्हें दोहराते रहे हैं। जीवन में संवेदनात्मक उतार-चढ़ाव के वक्त न जाने के कितने लोगों ने उनकी शायरी को अपना सहारा बनाया होगा। बशीर बद्र अपने जीवन में जिस मुकाम पर पहुंचे, वहां तक पहुंचना कोई आसान नहीं था। अपने दम पर उन्होंने पढ़ाई पूरी की और कॉलेज में लंबे समय तक पढ़ाया। हिंदी और फारसी पर उनकी गहरी पकड़ थी। वे उर्दू तक सीमित नहीं रहे।

उनकी कई रचनाओं का अनुवाद हुआ और दुनिया भर में वे मशहूर हुईं। कई बड़े पुरस्कारों से नवाजे गए बशीर हमेशा विनम्र रहे। दुनिया को मुसाफिरखाना मानने वाले बशीर बद्र के निधन से उनके प्रशंसक दुखी हैं। निस्संदेह उन्होंने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया है, जिन्हें आधुनिक शायरी का नगीना माना गया। सच यह है कि बशीर बद्र एक ऐसे शायर थे, जिनके शब्द भावों की गहराई लेकर दिलों में धड़कते हैं।

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मशहूर शायर बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके जाने की खबर से साहित्य और गजल प्रेमियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है। जावेद अख्तर समेत तमाम लोग उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं। उर्दू शायरी में बशीर बद्र का नाम बड़े और मशहूर गजलकारों में लिया जाता था। उनकी शानदार शायरी और साहित्य में योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार दिया था। उर्दू शायरी की दुनिया में वह एक शानदार नाम थे। उनकी मौत पर बॉलीवुड के लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने भी दुख जताया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक