महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित पांच लोगों की एक विमान हादसे में मृत्यु दिल दहला देने वाली घटना है। इस त्रासदी ने न केवल देश के एक कुशल नेता को छीन लिया, बल्कि उन दर्दनाक हादसों की कड़वी यादें भी ताजा कर दीं, जिनमें पहले भी देश ने कई राजनीतिक दिग्गजों और प्रमुख हस्तियों को असमय खोया है। पुणे जिले के बारामती में हुए इस हादसे की अब कई कोणों से जांच की जा रही है, मगर सवाल है कि इससे पहले हुई ऐसी दुर्घटनाओं से क्या सरकारी तंत्र ने कोई सबक नहीं लिया?
आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि जब यह हादसा हुआ, उस वक्त हवाई अड्डे पर दृश्यता कम थी। अगर स्थिति वास्तव में जोखिमपूर्ण थी, तो विमान को उतरने की अनुमति क्यों दी गई? दूसरा, यह सवाल भी महत्त्वपूर्ण है कि आधुनिक तकनीक के इस दौर में क्या ऐसी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए हवाई अड्डों पर विशेष व्यवस्था नहीं की जा सकती है?
अजित पवार प्लेन क्रैश: कम विजिबिलिटी तो लैंडिंग क्यों… हादसे के बाद उठे 5 सवाल
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान बुधवार सुबह पुणे जिला के बारामती में हवाई अड्डे पर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। नीचे आने के बाद उसमें धमाके के साथ आग लग गई। इस हादसे में अजित पवार सहित विमान में सवार सभी पांच लोगों की जान चली गई।
इससे पहले वर्ष 1980 में कांग्रेस नेता संजय गांधी, वर्ष 2001 में माधवराव सिंधिया, वर्ष 2011 अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू, वर्ष 2021 में तत्कालीन सीडीएस जनरल बिपिन रावत और वर्ष 2025 में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी जैसे दिग्गजों को भी देश ने विमान दुर्घटनाओं में खोया है।
कहा जा रहा है कि अजित पवार के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले हवाई यातायात नियंत्रण ने पायलट से पूछा कि क्या रनवे दिखाई दे रहा है, तो जवाब ‘नहीं’ था। इसके बाद विमान ने आसमान में ही एक चक्कर लगाया। इससे स्पष्ट है कि हवाई अड्डे पर परिस्थितियां विमान को उतारने के अनुकूल नहीं थीं। यह दावा भी किया जा रहा है कि दूसरी बार पूछे जाने पर पायलट ने सकारात्मक जवाब दिया। मगर सवाल है कि क्या किसी तरह के जोखिम की आशंका के बीच विमान को उतारने की अनुमति दी जा सकती है?
अजित पवार महाराष्ट्र में कांग्रेस, शिवसेना और भाजपा के नेतृत्व वाली कई सरकारों में उपमुख्यमंत्री रहे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के संस्थापक शरद पवार की छत्रछाया से बाहर निकल कर उन्होंने जुलाई 2023 में पार्टी के नाम और चिह्न के साथ-साथ दल के ज्यादातर विधायकों को अपने पाले में कर लिया था। इसके बाद वे राजग नीत महायुति में शामिल हो गए थे।
उनके नेतृत्व वाली राकांपा ने हाल में पुणे और पिंपरी चिंचवड में हुए निकाय चुनाव में शरद पवार की अगुआई वाली पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। इसके बाद सियासी गलियारों में अजित पवार और शरद पवार के बीच नजदीकियां बढ़ने की अटकलें भी जोर पकड़ रही थीं।
ऐसे में विपक्षी दल इस हादसे की सर्वाेच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग कर रहे हैं। बहरहाल, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस विमान दुर्घटना की निष्पक्ष और गहन जांच हो, ताकि हादसे के असली कारण सामने आ सकें। सरकारी तंत्र को भी इस तरह के हादसों से सबक लेकर व्यवस्था में जरूरी सुधार करने चाहिए, ताकि भविष्य में और कोई विमान दुर्घटना न हो।
