नेपाल में हुए चुनाव के नतीजे आने के बाद देश की राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। नई पीढ़ी के अगुआ बने बालेंद्र शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने कई दिग्गजों और पुरानी पार्टियों को भारी शिकस्त दी है। अगर सब कुछ उम्मीद के अनुरूप हुआ और बालेंद्र शाह को ही नेता चुना गया, तो नेपाल के संसदीय इतिहास में वे सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री होंगे। अब तक वहां जितने भी प्रधानमंत्री बने हैं, वे कभी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।
माना जा रहा है कि दो-तिहाई सीटों पर जीत के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुकी आरएसपी के नेतृत्व में बनने वाली सरकार अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी। देश में पिछले दिनों हुए चुनावों में नागरिकों और विशेषकर युवा वर्ग ने इस पार्टी पर जिस तरह भरोसा किया है, उसके मद्देनजर नेपाल में भावी सरकार के सामने जन आकांक्षाओं को पूरा करने की बड़ी चुनौती होगी।
भारत के साथ संबंध बेहतर करने होंगे
वहीं नई सरकार को घरेलू समस्याओं से निपटने के साथ देश के आर्थिक विकास में आए ठहराव को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उसे पड़ोसी देशों खासकर भारत से संबंध बेहतर बनाने के भी प्रयास करने होंगे। पुरानी सरकार के कामकाज के जिस तरीके के खिलाफ वहां युवा वर्ग के भीतर व्यापक आक्रोश पैदा हुआ, उसे बदलना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगा।
नेपाल के लोगों का मानना है कि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बालेंद्र शाह के भीतर देश की राजनीति और नीतियों को बदल सकने की क्षमता है। दरअसल, शाह को महापौर के अपने कार्यकाल में जमीनी स्तर पर सुधार के कई कार्यों के लिए जाना जाता है। चुनावी नतीजों के बाद अब उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करने के साथ व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव करेंगे।
नई सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती रोजगार सृजन की भी होगी। नेपाल में बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है और बड़ी संख्या में वहां के युवा वर्षों से काम के लिए पलायन करते रहे हैं। बहरहाल, नेपाल में छह महीने पहले व्यवस्था में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर नई पीढ़ी के व्यापक आंदोलन से उभरे बालेंद्र शाह और उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी सबकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरेंगे, देश को किस तरह की वैकल्पिक राजनीति देंगे, यह देखने की बात होगी।
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नेपाल ने अपना नेता चुन लिया है। चुनाव परिणामों से साफ है कि बालेन शाह जनता की पहली पसंद हैं। मतलब ये कि बालेन शाह नेपाल के नए प्रधानमंत्री होंगे। बालेन शाह ने चार बार के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को लगभग 50,000 वोटों के भारी अंतर से हराया। सितंबर में युवाओं के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद ओली की निर्वाचित सरकार के पतन के बाद नेपाल में यह पहला चुनाव था। नेपाल भारत का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। आइए जानते हैं कि बालेन शाह की जीत का नई दिल्ली पर क्या प्रभाव पड़ेगा? पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
