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आतंक के विरुद्ध

सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने आतंकवाद और उसके उन खतरों से बाकी देशों को आगाह किया, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर मंडरा रहे हैं। साथ ही, उन्होंने इस क्षेत्र की अहम चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए आसियान देशों के बीच एकजुटता और व्यापक सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

Author Published on: November 5, 2019 8:03 AM
पीएम मोदी एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) शिखर सम्मेलन के मौके पर पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लिया। (एपी)

थाइलैंड की राजधानी बैंकाक में आसियान यानी दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का सम्मेलन यों तो इसमें शामिल सभी दस देशों के बीच आर्थिक मामलों में आपसी साझेदारी विकसित और मजबूत करने के मकसद से आयोजित है, लेकिन इसमें उठे कई जरूरी मुद्दों से यह साफ हुआ है कि हाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के पक्ष को बेहतर स्वीकार्यता मिली है। गौरतलब है कि सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने आतंकवाद और उसके उन खतरों से बाकी देशों को आगाह किया, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर मंडरा रहे हैं। साथ ही, उन्होंने इस क्षेत्र की अहम चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए आसियान देशों के बीच एकजुटता और व्यापक सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। इसके महत्त्व को समझते हुए आसियान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका की साफतौर पर सराहना की और आपस में रणनीतिक संबंधों को व्यापक बनाने और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने का संकल्प लिया। जाहिर, यह एक तरह से भारत के बढ़ते कद का संकेत है, जिसमें दक्षिण-पूर्व एशिया के कई अहम देशों ने वैश्विक राजनीति में हाल के वर्षों में उभरे कई मुद्दों, खासकर आतंकवाद के खिलाफ भारत के पक्ष पर गौर किया है और व्यापक स्तर पर ठोस पहलकदमी की वकालत की है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर यह अहम घटनाक्रम इसलिए है कि जिस दौर में समूचे हिंद-प्रशांत इलाके में भूराजनीतिक रस्साकशी के अलावा चीन और कई देशों के बीच विवाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, उसमें आसियान देशों के बीच भारत की भूमिका को स्वीकार किया गया है। यानी इस नए घटनाक्रम का सिरा अगर आगे बढ़ता है तो इसका सीधा और सकारात्मक असर न केवल आसियान देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी पर पड़ेगा, बल्कि आतंकवाद के मसले पर एक ठोस सहयोग का मोर्चा भी खड़ा होगा, जिसमें आतंक को शह देने वाले देशों की राह मुश्किल हो सकती है। कहने को हाल के महीनों में पाकिस्तान ने आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देने का इरादा जताया है। लेकिन सच यह है कि दुनिया के सामने आतंकवाद को खत्म करने का आश्वासन पेश करना और मौके-बेमौके आतंकियों को शह देना फिलहाल पाकिस्तान की फितरत में शामिल है। यही वजह है कि एक ओर आसियान देश आपसी आर्थिक सहयोग के लिए अनुकूल माहौल बनाने की कोशिश में हैं तो दूसरी ओर आतंकवाद उनके सामने एक बड़ी चुनौती की तरह है।

दरअसल, आसियान के देश अगर आपस में अलग-अलग स्तरों पर सहयोग के लिए साथ मिल कर काम करने और आर्थिक समृद्धि के लिए नए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं, तो इसके लिए जरूरी है कि समूचे इलाके में शांति और सुरक्षा का माहौल रहे। लेकिन भारत के लिहाज से ही देखें तो यह किसी से छिपा नहीं है कि यहां आए दिन आतंकी गतिविधियों और हमलों से कैसी बाधाएं पैदा होती रहती हैं और इन सबके लिए कौन जिम्मेदार है! हालांकि भारत ने अक्सर यह शिकायत दुनिया के सामने रखी है कि सीमापार आतंकवाद ने एक गंभीर चुनौती पैदा कर दी है और इससे निपटना जरूरी है। विडंबना यह है कि अपनी जमीन से आतंकी गतिविधियां संचालित करने की छूट देने वाले पाकिस्तान ने आमतौर पर इन शिकायतों की अनदेखी की। नतीजा आज यह है कि भारत की तमाम कोशिशों के बावजूद आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम लगाना संभव नहीं हो सका है। जबकि भारत ने गाहे-बगाहे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस समूचे इलाके में आतंकवाद की जटिलता और उसके लिए जिम्मेदार कारकों की हकीकत बताई है। इस लिहाज से देखें तो आसियान के देशों की ओर से आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का समर्थन खुल कर सामने आना एक अहम कामयाबी है।

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