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अमरावती की राह

आखिरकार आंध्र प्रदेश की नई राजधानी की नींव पड़ गई। गुरुवार को अमरावती में एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी आधारशिला रखी।

Author Published on: October 23, 2015 1:17 PM

आखिरकार आंध्र प्रदेश की नई राजधानी की नींव पड़ गई। गुरुवार को अमरावती में एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी आधारशिला रखी। राज्य के लाखों लोगों की मौजूदगी वाले इस समारोह में अनेक केंद्रीय मंत्रियों और जापान तथा सिंगापुर से आए शहरी विकास और निर्माण विशेषज्ञों ने भी शिरकत की। फिलहाल गुंटूर जिले में स्थित कृष्णा नदी के किनारे अमरावती को आंध्र का केंद्र बनाने के पीछे नायडू का एक सपना रहा है।

वे इसे एक विश्व-स्तरीय शहर के रूप में विकसित करना चाहते हैं, जो खूबसूरती में देश के अन्य महानगरों को पीछे छोड़ दे, साथ ही आंध्र के आर्थिक विकास की धुरी बन जाए। नई राजधानी के प्रति लोगों का उत्साह जगाने और इसके निर्माण में भागीदारी का स्पर्श कराने के लिए चंद्रबाबू नायडू ने एक अभियान भी चलाया, जिसमें आंध्र के हर गांव से कलश में मिट्टी और जल लाया गया। आधारशिला रखे जाने से एक रोज पहले सोलह हजार गांवों से लाए गए मिट्टी और जल को उस इलाके में छिड़का गया जहां नई राजधानी बननी है।

यों कई लोगों का यह सुझाव था कि राज्य के मौजूदा शहरों में से ही किसी को राजधानी के तौर पर विकसित किया जाए, जैसा कि अन्य बहुत-सी राजधानियों के साथ हुआ है। इससे नई राजधानी बनने पर कम खर्च आएगा। लेकिन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इसके लिए कतई राजी नहीं थे। शायद उनके मन में कुछ और बातों के अलावा हैदराबाद को गंवा देने का दंश भी एक कारण रहा होगा। हैदराबाद को आइटी-हब बनाने का श्रेय नायडू को ही जाता है।

पिछले साल आंध्र प्रदेश का विभाजन काफी तकरार और कटुता के बाद हुआ था। विवाद के बड़े मसलों में एक यह भी था कि हैदराबाद किसके हिस्से में आएगा। अंत में समझौता यह हुआ कि हैदराबाद दस साल तक आंध्र और तेलंगाना, दोनों की राजधानी रहेगा। उसके बाद आंध्र की अलग राजधानी होगी। इसके लिए नायडू ने एक ऐसी परियोजना चुनी जिसके लिए खर्च जुटाना आसान नहीं होगा। आधारशिला रखने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए प्रधामंत्री ने कहा कि हम इसे समस्या के रूप में नहीं, अवसर के रूप में देखें। निश्चय ही यह आंध्र के लिए एक बड़ा अवसर है, अमरावती को शहरी विकास के एक मॉडल के तौर पर विकसित करने का।

पर इसके लिए आवश्यक धनराशि कहां से आएगी? केंद्र से कितनी मदद मिल पाएगी? अभी से राज्य के दूसरे हिस्सों में इस बात को लेकर अंसतोष के स्वर सुनाई देने लगे हैं कि विकास के मद में उनके हिस्से का पैसा काट कर अमरावती में लगाया जा रहा है। इससे भी ज्यादा विवाद भूमि अधिग्रहण को लेकर उठा है। नई राजधानी के लिए कृष्णा नदी के किनारे के जिस इलाके में बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहीत की जानी है वह बहुफसली इलाका है।

जाहिर है, हजारों हेक्टेयर काफी उपजाऊ जमीन राज्य की नई राजधानी की भेंट चढ़ जाएगी। रियल एस्टेट के कारोबारी और कुछ राजनीतिकों की भी दिलचस्पी जमीन के दाम में हुई और होने वाली बढ़ोतरी का लाभ उठाने में है। क्या पहले से मौजूद किसी शहर को राज-काज का केंद्र न बना कर नई राजधानी बनाने के पीछे यह भी एक वजह रही होगी?

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